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    अभी-अभी – हाई कोर्ट ने जड़ा ज़ोरदार तमाचा, लाइन पर आयी ममता बेनर्जी, वापस लिया फैसला

    कोलकाता : बंगाल में सीएम ममता बनर्जी की मुस्लिम तुष्टिकरण वाली राजनीति आज जनता अच्छे से देख रही है. एक विशेष समुदाय को खुश करने के लिए आज हिन्दू अपने ही देश में अपने त्यौहार नहीं मना पा रहे हैं. इसी वजह से आज बंगाल में खुद हिन्दुओं की ही स्थिति बड़ी दयनीय हो गयी है. इस बीच बड़ी खबर आ रही है कि हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी पर ज़ोरदार तमाचा जड़ा है जिसके बाद उन्हें थोड़ी अक्ल आयी है.

    ममता बनर्जी को अदालत से पड़ा झन्नाटेदार तमाचा
    ऐसा लगता है ममता सरकार को हाई कोर्ट के तमाचे की आदत सी हो गयी है. जब तक हाई कोर्ट का तमाचा नहीं पड़ता है ममता बनर्जी आगे चलती ही नहीं है. अभी बड़ी खबर आ रही है जिसमें दुर्गा पूजा पर मूर्ति विसर्जन पर रोक मामले लोगों के गुस्से का शिकार बनने पर आखिरकार ममता बनर्जी ने अपना फैसला वापिस लिया है. उन्‍होंने कोर्ट में कहा है कि लोग विजयदशमी के दिन रात 10 बजे तक मूर्ति विसर्जन कर सकते हैं. हालाँकि कोर्ट ने ममता को लताड़ मारते हुए पूछा था कि जब मुंबई में गणेश विसर्जन और मुहर्रम एक साथ हो सकता है, तो आप क्यों नहीं कर सकते?

    सुनाया था तानाशाही फरमान
    इससे पहले ममता सरकार ने तय किया था कि मूर्ति विसर्जन केवल शाम 6 बजे तक ही हो सकेगा. इसके पीछे उन्‍होंने दलील दी थी कि मुहर्रम और विजयदशमी एक साथ होने के कारण मूर्ति विसर्जन 6 बजे के बाद नहीं किया जा सकता. इसके बाद कई संगठन इस पर विरोध दर्ज कराते हुए मामले को कोर्ट में ले गए थे.


    कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान ममता सरकार ने अपने फैसले में बदलाव लाते हुए कहा कि हमने विसर्जन के समय को बढ़ाते हुए रात 10 बजे तक कर दिया है. हालांकि याचिकाकर्ता इस समय को देर रात 1 बजे तक कराना चाहते थे. दरअसल पिछले दिनों सीएम ममता बनर्जी ने मुस्लिमों की बड़ी आबादी के चलते घोषणा की थी कि मोहर्रम के कारण इस साल दुर्गा पूजा के बाद होने वाले मूर्ति विसर्जन पर 30 सितंबर की शाम 6 बजे से लेकर 1 अक्टूबर तक रोक रहेगी.

    सीएम ममता ने कहा था ” इस साल दुर्गा पूजा और मुहर्रम एक ही दिन पड़ रहा है. मोहर्रम के 24 घंटों को छोड़कर 2, 3 और 4 अक्टूबर को मूर्ति विसर्जन किया जा सकता है.’ जिसके बाद देश भर में गुस्से की लहर सी दौड़ पड़ी थी. हर बार हिन्दू को अपने ही देश में समझौता करके क्यों रहना पड़ता है.

    हाई कोर्ट ने जमकर लताड़ा, तुष्टिकरण की राजनीती नहीं चलेगी
    पिछले साल भी कोर्ट ने ममता को ज़ोरदार फटकार लगते हुए कहा था कि “ये ममता सरकार की तुष्टीकरण की नीति है. जिसमें एक समुदाय को खुश करने के लिए ऐसा फैसला लिया गया है. अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि इससे पहले कभी विजयदशमी के मौके पर मूर्ति विसर्जन पर रोक नहीं लगी थी. हाई कोर्ट ने ममता सरकार के फैसले को ‘मनमाना’ करार दिया था और ‘जनता के अल्पसंख्यक वर्ग को खुश करने’ का राज्य द्वारा ‘स्पष्ट प्रयास’ कहा था.

    आपको बता दें ये केस अभी यहाँ खत्म नहीं हुआ है. इसकी अगली सुनवाई अभी सोमवार को फिर से होनी हैं. तब देखा जायेगा कि हाईकोर्ट अपना क्या फैसला सुनाता है. यही नहीं कोर्ट ने कहा साल 1982 और 1983 में दशमी और मुहर्रम इसी तरह एक दिन आगे पीछे पड़ा था तब तो कोई पाबंदी नहीं लगाई गई थी. फिर ममता सरकार का यह तानशाह रवैया क्यों?

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