मोदी सरकार के खिलाफ बेहद सनसनीखेज साजिश का भंडाफोड़, रौंद्र रूप में आये मोदी ने दिए आदेश !
नई दिल्ली : मोदी सरकार के विरोध में विपक्षी पार्टियां किस तरह से पगला गयी हैं, ये बात आप इस खबर को पढ़कर समझ जाएंगे. कांग्रेस के वक़्त में तो अक्सर ही घोटालों की ख़बरें आती रहती थीं, लेकिन मोदी सरकार में विरोध करने लायक कोई मुद्दा ही नहीं मिल रहा, इसलिए विपक्षी पार्टियां साजिश करने पर आमादा हो चुकी हैं. अभी-अभी दशहरा, दिवाली के त्यौहार के दौरान प्याज के दामों में आग लगाने की बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है.
त्योहारों में प्याज के रेट बढ़ा कर मोदी सरकार को बदनाम करने की साजिश !
खबर के मुताबिक़ भारी मात्रा में जमाखोरी करके बाजार में इसकी कीमत 100 रुपये प्रति किलो के पार ले जाने का टारगेट था. सबसे अहम् बात जो सामने आयी है, उसके मुताबिक़ इस साजिश के पीछे एक बड़ी राजनीतिक पार्टी का हाथ है. सरकार पर कीचड उछालने की कोशिशें की जा रही हैं.
भांडा फोड़ तब हुआ जब गुरुवार को महाराष्ट्र के नासिक में आयकर अधिकारियों ने 7 बड़े कारोबारियों पर छापेमारी की. आयकर विभाग की छापेमारी के बाद भावों में सट्टेबाजी की ये सनसनीखेज सच्चाई सामने आई है. इन छापेमारी के बाद महाराष्ट्र की मंडियों में प्याज का थोक भाव एक ही दिन में 35 फीसदी तक नीचे गिर गया है. ये छापे नासिक की लासलगांव एपीएमसी में मारे गए थे.
जमाखोरी के पीछे सियासी साज़िश ?
बता दें कि छापे मारने से पहले मंडी में प्याज का ठोक रेट 1400 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा था, लेकिन छापे पड़ते ही गुरुवार 14 सितंबर की शाम तक भाव 900 रुपये क्विंटल तक गिर गया. नासिक जिले की लासलगांव मंडी के 7 बड़े प्याज कारोबारियों के कुल 25 ठिकानों पर आयकर विभाग ने छापेमारी की थी. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ये मंडी देश की सबसे बड़ी प्याज मंडी है.
पुणे रीजन के आयकर अधिकारियों को खुफिया जानकारी मिली कि ये 7 कारोबारी काफी काम दाम पर किसानो से भारी मात्रा में प्याज खरीद रहे हैं और जमाखोरी कर रहे हैं, ताकि देशभर में प्याज के दामों में आग लग जाए. आप तो जानते ही हैं कि प्याज रोजमर्रा के खाने में इस्तमाल होने वाली ऐसी चीज है, जिसके दाम बढ़ते हैं तो जनता देश में सरकारें बदल देती है.
प्याज के सबसे बड़े कारोबारी निकले महाभ्रष्ट !
जानकारी मिलते ही आयकर अधिकारियों ने टीम बनायी और एक साथ सभी कारोबारियों पर छापा मार दिया. छापे की कार्रवाई अब भी जारी है. इस जमाखोरी में देश का सबसे बड़ा प्याज एक्सपोर्टर कारोबारी भी शामिल था. एक राजनीतिक पार्टी की शह पर ये लोग प्याज के दाम बढ़ाने की तैयारी मे थे.
इनका इरादा था कि दशहरे से लेकर दिवाली तक दाम इतने बढ़ जाएँ कि पूरे देश में हंगामा मच जाए और जनता मोदी सरकार पर टूट पड़े. इसी बहाने ये पार्टी भी अपनी राजनीतिक रोटियां सेक सके. आप समझ ही सकते हैं कि कौन सी पार्टियां इस साजिश में शामिल होंगी.
दाम बढ़ने शुरू हो चुके थे !
इन कारोबारियों के ऑफिस से कई कागजात जब्त किये गए हैं और इनकी जांच चल रही है. इनके गोदाम भी सील कर दिए गए हैं. इन गोदामों में जमाखोरी की जांच की जा रही है. बता दें कि यदि विभाग सजग नहीं होता तो ये भ्रष्टाचारी अपनी साजिश में सफल हो जाते क्योंकि जमाखोरी के कारण प्याज के दाम तेजी से बढ़ने शुरू भी हो गए थे.
हलक में हाथ डालकर उगलवाए जा रहे हैं साजिश के राज !
मंडियों से प्याज गायब कर दिया गया था, जिसके कारण ज्यादातर जगहों पर खुदरा भाव 20 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 30 और 40 रुपये तक पहुंच रहे थे. यदि साजिश पकड़ी नहीं जाती तो अगले 10 से 15 दिन में भाव दोगुना हो कर 80 रुपये किलो तक पहुंच जाता. जो कारोबारी इस साजिश में शामिल हैं, उनकी ज़रा अच्छी तरह से पूछताछ की जा रही है और हलक में हाथ डाल कर उनके राजनीतिक संपर्कों के बारे में भी उगलवाया जा रहा है.
एक और ख़ास बात आपको बता दें कि ये कारोबारी पहले से ही एक अन्य जांच के दायरे में हैं. आयकर विभाग के मुताबिक़ इन कारोबारियों ने नोटबंदी के दौरान भारी मात्रा में कालेधन को सहकारी बैंकों में जमा करवाया था, उसकी जांच भी अभी चल ही रही है. इस बार रंगे हाथों पकडे गए हैं ये सब, लंबा अंदर जाएंगे, जुर्माना लगेगा सो अलग.
त्योहारों में प्याज के रेट बढ़ा कर मोदी सरकार को बदनाम करने की साजिश !
खबर के मुताबिक़ भारी मात्रा में जमाखोरी करके बाजार में इसकी कीमत 100 रुपये प्रति किलो के पार ले जाने का टारगेट था. सबसे अहम् बात जो सामने आयी है, उसके मुताबिक़ इस साजिश के पीछे एक बड़ी राजनीतिक पार्टी का हाथ है. सरकार पर कीचड उछालने की कोशिशें की जा रही हैं.
भांडा फोड़ तब हुआ जब गुरुवार को महाराष्ट्र के नासिक में आयकर अधिकारियों ने 7 बड़े कारोबारियों पर छापेमारी की. आयकर विभाग की छापेमारी के बाद भावों में सट्टेबाजी की ये सनसनीखेज सच्चाई सामने आई है. इन छापेमारी के बाद महाराष्ट्र की मंडियों में प्याज का थोक भाव एक ही दिन में 35 फीसदी तक नीचे गिर गया है. ये छापे नासिक की लासलगांव एपीएमसी में मारे गए थे.
जमाखोरी के पीछे सियासी साज़िश ?
बता दें कि छापे मारने से पहले मंडी में प्याज का ठोक रेट 1400 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा था, लेकिन छापे पड़ते ही गुरुवार 14 सितंबर की शाम तक भाव 900 रुपये क्विंटल तक गिर गया. नासिक जिले की लासलगांव मंडी के 7 बड़े प्याज कारोबारियों के कुल 25 ठिकानों पर आयकर विभाग ने छापेमारी की थी. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ये मंडी देश की सबसे बड़ी प्याज मंडी है.
पुणे रीजन के आयकर अधिकारियों को खुफिया जानकारी मिली कि ये 7 कारोबारी काफी काम दाम पर किसानो से भारी मात्रा में प्याज खरीद रहे हैं और जमाखोरी कर रहे हैं, ताकि देशभर में प्याज के दामों में आग लग जाए. आप तो जानते ही हैं कि प्याज रोजमर्रा के खाने में इस्तमाल होने वाली ऐसी चीज है, जिसके दाम बढ़ते हैं तो जनता देश में सरकारें बदल देती है.
प्याज के सबसे बड़े कारोबारी निकले महाभ्रष्ट !
जानकारी मिलते ही आयकर अधिकारियों ने टीम बनायी और एक साथ सभी कारोबारियों पर छापा मार दिया. छापे की कार्रवाई अब भी जारी है. इस जमाखोरी में देश का सबसे बड़ा प्याज एक्सपोर्टर कारोबारी भी शामिल था. एक राजनीतिक पार्टी की शह पर ये लोग प्याज के दाम बढ़ाने की तैयारी मे थे.
इनका इरादा था कि दशहरे से लेकर दिवाली तक दाम इतने बढ़ जाएँ कि पूरे देश में हंगामा मच जाए और जनता मोदी सरकार पर टूट पड़े. इसी बहाने ये पार्टी भी अपनी राजनीतिक रोटियां सेक सके. आप समझ ही सकते हैं कि कौन सी पार्टियां इस साजिश में शामिल होंगी.
दाम बढ़ने शुरू हो चुके थे !
इन कारोबारियों के ऑफिस से कई कागजात जब्त किये गए हैं और इनकी जांच चल रही है. इनके गोदाम भी सील कर दिए गए हैं. इन गोदामों में जमाखोरी की जांच की जा रही है. बता दें कि यदि विभाग सजग नहीं होता तो ये भ्रष्टाचारी अपनी साजिश में सफल हो जाते क्योंकि जमाखोरी के कारण प्याज के दाम तेजी से बढ़ने शुरू भी हो गए थे.
हलक में हाथ डालकर उगलवाए जा रहे हैं साजिश के राज !
मंडियों से प्याज गायब कर दिया गया था, जिसके कारण ज्यादातर जगहों पर खुदरा भाव 20 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 30 और 40 रुपये तक पहुंच रहे थे. यदि साजिश पकड़ी नहीं जाती तो अगले 10 से 15 दिन में भाव दोगुना हो कर 80 रुपये किलो तक पहुंच जाता. जो कारोबारी इस साजिश में शामिल हैं, उनकी ज़रा अच्छी तरह से पूछताछ की जा रही है और हलक में हाथ डाल कर उनके राजनीतिक संपर्कों के बारे में भी उगलवाया जा रहा है.
एक और ख़ास बात आपको बता दें कि ये कारोबारी पहले से ही एक अन्य जांच के दायरे में हैं. आयकर विभाग के मुताबिक़ इन कारोबारियों ने नोटबंदी के दौरान भारी मात्रा में कालेधन को सहकारी बैंकों में जमा करवाया था, उसकी जांच भी अभी चल ही रही है. इस बार रंगे हाथों पकडे गए हैं ये सब, लंबा अंदर जाएंगे, जुर्माना लगेगा सो अलग.




