अभी-अभी : चीन की अक्ल ठिकाने लगाने के लिए ट्रंप ने भेजी सेना, पुतिन के क़दमों में गिरे जिनपिंग
नई दिल्ली : सिक्किम में डोकलाम विवाद पर चीन की दादागिरी काम नहीं हो रही है. चीन अपनी सेना पीछे हटाने को तैयार नहीं है, साथ ही उसने तकरीबन 20 हजार सैनिक बॉर्डर के पास तैनात कर दिए हैं. चीन के दिमाग ठीक करने के लिए पीएम मोदी के दोस्त डोनाल्ड ट्रम्प ने एक हाहाकारी फैसला ले लिया है.
ट्रंप ने दी अमेरिकी नेवी को फुल फ्रीडम
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन की अक्ल ठिकाने लगाने के लिए अपनी नौसेना को फ्री हैंड यानी खुली छूट दे दी है. ट्रम्प द्वारा इतना बड़ा कदम उठाने से चीन पूरी तरह से दवाब में आ गया है. चीन किसी की ना सुनते हुए दक्षिण चीन सागर को अपनी मिल्कियत समझ रहा था. लेकिन ट्रम्प के इस फैसले से चीन को बड़ी चुनौती मिली है. दरअसल चीन के अलावा पांच अन्य देश वियतनाम, मलयेशिया, इंडोनेशिया, ब्रुनेई और फिलिपिंस दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा जताते हैं.
ट्रम्प के इस कदम से चीन की नौसेना दक्षिण चीन सागर में ही व्यस्त रहेगी, जिसके चलते भारत के साथ बॉर्डर विवाद में चीन की सैन्य शक्ति कमजोर पड़ेगी. बिना नौसेना के भारत के सामने चीन की शक्ति आधी रह जायेगी और चीन अभी इतना मजबूत भी नहीं हो गया है कि दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश की नौसेना को हरा सके.
ट्रम्प के फैसले से चीन में हड़कंप
ट्रम्प के इस एक मास्टरस्ट्रोक से चीन बैकफुट पर आ गया है और अब उसपर भारत व् जापान जैसे अन्य पडोसी देशों के साथ सीमा विवाद के मसले सुलझाने के लिए दवाब पड़ना शुरू हो गया है, वो भी ऐसे नाजुक वक़्त में जब सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी अपने कॉन्क्लेव की तैयारी में लगी हुई है, जिसमें कई बड़े राजनैतिक बदलाव होने वाले हैं.
रूस के क़दमों पर गिरा ड्रैगन
अमेरिका के इस हाहाकारी कदम के बाद चीन रूस के क़दमों पर जा गिरा है. चीन रूस के साथ संयुक्त नौसैनिक युद्धाभ्यास के जरिए रूस को भरोसे में लेने की कोशिश कर रहा है कि पश्चिमी ताकतों के हमले के दौरान चीन रूस का साथ देगा. इस उम्मीद के साथ कि अमेरिका के खिलाफ रूस चीन का साथ दे.
चीनी नौसेना अधिकारी ने ग्लोबल टाइम्स को जानकारी दी कि चीन ने अपने आधुनिक गाइडेड मिसाइल विध्वंसक को भेजकर रूस के प्रति अपनी गहरी दोस्ती की ओर इशारा किया है.चीनी अधिकारी के मुताबिक़ चीन को उकसाने वाले देशों के लिए चीन का ये एक चुनौतीपूर्ण संदेश भी है.
मोदी की पांचो उंगलियां घी में
आपको बता दें कि चीन इंटरनेशनल कोर्ट में दक्षिण चीन सागर मुद्दे पर पहले ही मात खा चुका है. चीन दक्षिण सागर पर इसलिए अपना हक़ जताता है क्योंकि उसके नाम में चीन शब्द आता है. लेकिन इस लॉजिक के अनुसार तो पूरे हिन्द महासागर पर भारत का हक़ होना चाहिए क्योंकि उसके नाम में हिन्द शब्द आता है. हेग स्थित इंटरनेशनल कोर्ट ने चीन के दावे को खारिज कर उसे गैरकानूनी और अतिक्रमण वाला बताया था, लेकिन घमंडी चीन ने उलटा कोर्टे के फैसले को ही नकार दिया.
पीएम मोदी अब हर ओर से फायदे में आ गए हैं क्योंकि अब चीन भारत, जापान और अमेरिका के बीच पिस रहा है और जल्द ही बॉर्डर से अपनी तशरीफ़ का टोकरा उठाकर उलटे पाँव वापस चला जाएगा. ऐसे में इसे पीएम मोदी की कूटनीतिक सफलता माना जाएगा, जो उनकी छवि को और भी ज्यादा मजबूत बनाएगा. यदि चीन ने भारत से युद्ध लड़ने की गलती की, तो बिना पूरी नौसेना के वो भारतीय सेना के हाथों जबरदस्त पिटेगा, ऐसे में भी पीएम मोदी की छवि और भी ज्यादा मजबूत हो जायेगी.
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ट्रंप ने दी अमेरिकी नेवी को फुल फ्रीडम
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन की अक्ल ठिकाने लगाने के लिए अपनी नौसेना को फ्री हैंड यानी खुली छूट दे दी है. ट्रम्प द्वारा इतना बड़ा कदम उठाने से चीन पूरी तरह से दवाब में आ गया है. चीन किसी की ना सुनते हुए दक्षिण चीन सागर को अपनी मिल्कियत समझ रहा था. लेकिन ट्रम्प के इस फैसले से चीन को बड़ी चुनौती मिली है. दरअसल चीन के अलावा पांच अन्य देश वियतनाम, मलयेशिया, इंडोनेशिया, ब्रुनेई और फिलिपिंस दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा जताते हैं.
ट्रम्प के इस कदम से चीन की नौसेना दक्षिण चीन सागर में ही व्यस्त रहेगी, जिसके चलते भारत के साथ बॉर्डर विवाद में चीन की सैन्य शक्ति कमजोर पड़ेगी. बिना नौसेना के भारत के सामने चीन की शक्ति आधी रह जायेगी और चीन अभी इतना मजबूत भी नहीं हो गया है कि दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश की नौसेना को हरा सके.
ट्रम्प के फैसले से चीन में हड़कंप
ट्रम्प के इस एक मास्टरस्ट्रोक से चीन बैकफुट पर आ गया है और अब उसपर भारत व् जापान जैसे अन्य पडोसी देशों के साथ सीमा विवाद के मसले सुलझाने के लिए दवाब पड़ना शुरू हो गया है, वो भी ऐसे नाजुक वक़्त में जब सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी अपने कॉन्क्लेव की तैयारी में लगी हुई है, जिसमें कई बड़े राजनैतिक बदलाव होने वाले हैं.
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अमेरिका रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने एक प्लान पेश किया है, जिसके तहत अमेरिकी नौसेना के जंगी जहाज एक वर्ष के लिए दक्षिण चीन सागर में तैनात रहेंगे और वो भी खुली छूट के साथ. यानी यदि चीन के जंगी जहाज़ों ने घुसपैठ की कोशिश की तो अमेरिकी नौसेना चीनी जहाज़ों को उड़ा देगी.रूस के क़दमों पर गिरा ड्रैगन
अमेरिका के इस हाहाकारी कदम के बाद चीन रूस के क़दमों पर जा गिरा है. चीन रूस के साथ संयुक्त नौसैनिक युद्धाभ्यास के जरिए रूस को भरोसे में लेने की कोशिश कर रहा है कि पश्चिमी ताकतों के हमले के दौरान चीन रूस का साथ देगा. इस उम्मीद के साथ कि अमेरिका के खिलाफ रूस चीन का साथ दे.
चीनी नौसेना अधिकारी ने ग्लोबल टाइम्स को जानकारी दी कि चीन ने अपने आधुनिक गाइडेड मिसाइल विध्वंसक को भेजकर रूस के प्रति अपनी गहरी दोस्ती की ओर इशारा किया है.चीनी अधिकारी के मुताबिक़ चीन को उकसाने वाले देशों के लिए चीन का ये एक चुनौतीपूर्ण संदेश भी है.
मोदी की पांचो उंगलियां घी में
आपको बता दें कि चीन इंटरनेशनल कोर्ट में दक्षिण चीन सागर मुद्दे पर पहले ही मात खा चुका है. चीन दक्षिण सागर पर इसलिए अपना हक़ जताता है क्योंकि उसके नाम में चीन शब्द आता है. लेकिन इस लॉजिक के अनुसार तो पूरे हिन्द महासागर पर भारत का हक़ होना चाहिए क्योंकि उसके नाम में हिन्द शब्द आता है. हेग स्थित इंटरनेशनल कोर्ट ने चीन के दावे को खारिज कर उसे गैरकानूनी और अतिक्रमण वाला बताया था, लेकिन घमंडी चीन ने उलटा कोर्टे के फैसले को ही नकार दिया.
पीएम मोदी अब हर ओर से फायदे में आ गए हैं क्योंकि अब चीन भारत, जापान और अमेरिका के बीच पिस रहा है और जल्द ही बॉर्डर से अपनी तशरीफ़ का टोकरा उठाकर उलटे पाँव वापस चला जाएगा. ऐसे में इसे पीएम मोदी की कूटनीतिक सफलता माना जाएगा, जो उनकी छवि को और भी ज्यादा मजबूत बनाएगा. यदि चीन ने भारत से युद्ध लड़ने की गलती की, तो बिना पूरी नौसेना के वो भारतीय सेना के हाथों जबरदस्त पिटेगा, ऐसे में भी पीएम मोदी की छवि और भी ज्यादा मजबूत हो जायेगी.
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