चीन की आर्मी में बगावत, सैनिकों ने कहा-शक्तिशाली भारत से कोई नहीं जीत पाएगा
New Delhi : INDIA से युद्ध लड़ने की बात कर रहे CHINA के सैनिकों ने बगावत छेड़ दी है। सैनिकों ने उन्हें मिल रही सुविधाओं को अधूरा बताया है।
सैनिकों ने पत्र में कहा है कि चीनी सरकार हर दिन उनकी सुविधाओं में कटौती कर रही है। पहले बिना बताए 10 लाख सैनिकों को सेना से निकाल दिया इसके बाद 3 लाख सैनिक और निकालने की बात चल रही है।
वहीं, बातचीत के लिए 26-27 जुलाई को भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल बीजिंग पहुंच रहे हैं। इसमें भी अभी पांच दिन ही बचे हुए हैं।
चीनी अधिकारी दबाव में हैं और उन्हें जल्द ही कुछ रास्ता निकालना होगा। वो कोई कार्रवाई करने से पहले डोभाल के दौरे को आज़मा लेना चाहते हैं।
बीते गुरुवार को चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारत के साथ बातचीत के कूटनीतिक रास्ते खुले हुए हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने इस बात की पुष्टि की कि 'पांच सप्ताह पहले सिक्किम के पास शुरू हुए सैन्य तनाव को हल करने के लिए दोनों देशों के राजयनिक बातचीत कर रहे हैं।
हालांकि उनका इस बात पर ज़ोर था कि, "दोनों देशों के बीच किसी भी अर्थपूर्ण बातचीत और सूचनाओं के आदान प्रदान के लिए भारत की ओर से अपनी सेना को हटाना पहली शर्त है."
एक तरफ़ अनौपचारिक बातचीत पर राज़ी होने और दूसरी तरफ़ 'अर्थपूर्ण बातचीत' के जुमले के पीछे क्या चीनी अधिकारी कुछ छिपा रहे हैं? अगर हां, तो डोभाल के पास बीजिंग में किसी सहमति तक पहुंचने का मौका है।
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चीनी सैनिकों की एक टुकड़ी ने रक्षा मंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि भारत पहले से बेहद शक्तिशाली हो गया है। भारत के पास हमसे ज्यादा हाइटेक हथियार हैं। अब भारत से युद्ध लड़ने का मतलब बर्बादी होगा।सैनिकों ने पत्र में कहा है कि चीनी सरकार हर दिन उनकी सुविधाओं में कटौती कर रही है। पहले बिना बताए 10 लाख सैनिकों को सेना से निकाल दिया इसके बाद 3 लाख सैनिक और निकालने की बात चल रही है।
वहीं, बातचीत के लिए 26-27 जुलाई को भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल बीजिंग पहुंच रहे हैं। इसमें भी अभी पांच दिन ही बचे हुए हैं।
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चीनी अधिकारी दबाव में हैं और उन्हें जल्द ही कुछ रास्ता निकालना होगा। वो कोई कार्रवाई करने से पहले डोभाल के दौरे को आज़मा लेना चाहते हैं।
बीते गुरुवार को चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारत के साथ बातचीत के कूटनीतिक रास्ते खुले हुए हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने इस बात की पुष्टि की कि 'पांच सप्ताह पहले सिक्किम के पास शुरू हुए सैन्य तनाव को हल करने के लिए दोनों देशों के राजयनिक बातचीत कर रहे हैं।
हालांकि उनका इस बात पर ज़ोर था कि, "दोनों देशों के बीच किसी भी अर्थपूर्ण बातचीत और सूचनाओं के आदान प्रदान के लिए भारत की ओर से अपनी सेना को हटाना पहली शर्त है."
एक तरफ़ अनौपचारिक बातचीत पर राज़ी होने और दूसरी तरफ़ 'अर्थपूर्ण बातचीत' के जुमले के पीछे क्या चीनी अधिकारी कुछ छिपा रहे हैं? अगर हां, तो डोभाल के पास बीजिंग में किसी सहमति तक पहुंचने का मौका है।
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