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    राम मंदिर के लिये साक्ष्य नहीं, निर्णय चाहिए !

    उत्तर प्रदेश का चुनाव खत्म होते मानव राम मंदिर का मुद्दा ही खत्म हों चुका है। भाजपा कुछ दिन पहले राम मंदिर को लेकर के काफी उत्साहित थी लेकिन इस समय देखा जा रहा है कि कोई भी इस मुद्दे को लेकर किसी भी तरह की बात नहीं कर रहा है । और वहीं कांग्रेस के लोग भी इस मुद्दे पर भाजपा को घेर नहीं पा रहे हैं । एक बात जो इन सबसे अलग है कि सुप्रीम कोर्ट जो कि राम मंदिर बनवाने के लिए वहां पर कोर्ट में सबूत मांगते हैं ।

    जहाँ कोर्ट में गवाही से पहले गीता पर हाथ रखकर लोक कसम खाते हैं वह भी हिंदू धर्म की ही एक ग्रंथ है । तो फिर रामायण जैसे पवित्र ग्रंथ को क्यों सुप्रीम कोर्ट मानने को तैयार नहीं होती है । रामायण में लिखी गई सारी बातें उसी तरह से हैं जो हमें आज दिखाई देता है । हो सकता है कुछ जगहों में थोड़ा बहुत परिवर्तन हुआ हो लेकिन यह परिवर्तन बड़े स्तर पर नहीं हुआ है। यह मान लेना कि जो कुछ रामायण में लिखा गया है वह काल्पनिक है ; और राम मंदिर बनवाने के लिए साक्ष्य की आवश्यकता है ; तो यह हमारे देश के सुप्रीम कोर्ट पर सवाल उठाता है ।

    क्योंकि यदि आप एक हिंदू धर्म ग्रंथ गीता को पवित्र मानते हैं । तो वहीं आप दूसरे हिंदू ग्रंथ रामायण को मानने से इनकार कैसे कर सकते हैं ? रामायण में जो कुछ लिखा गया है उसमें सब कुछ तो साक्षी मिलता ही रहा है। खुदाई के दौरान भी वहां पर राम मंदिर होने के साक्ष्य मिले थे । उसके बाद भी आज सुप्रीमकोर्ट इतने दिनों से इस मामले को लटकाया पड़ा है । इस पर फैसला जल्द करना चाहिए। इसके लिए किसी वार्ता की आवश्यकता नहीं है । क्योंकि साक्षी तो अभी तक 1990 में हुआ कश्मीरी पंडितों का पलायन  का भी सुप्रीमकोर्ट नहीं जुटा सकी है; तो क्या 1528 में बाबर द्वारा तोड़े गए इस मंदिर का साक्ष्य सरकार सुप्रीम कोर्ट जुटा पाएगी। यदि ऐसा ही रहा तो राम मंदिर तो कभी बन ही नहीं सकता इसके लिए सच कि नहीं बल्कि एक निर्णय की आवश्यकता है ।

    source – http://www.authenticinfomania.com

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