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    आईएसआईएस आतंकियों के चंगुल से छुड़ाई गयी नर्सों ने जो कहा, उसे सुन सुषमा समेत मोदी भी हैरान !

    नई दिल्ली : केरल की हालत कितनी चिंताजनक हो चुकी है, इसका अंदाजा आप इस खबर को पढ़कर लगा सकते हैं. केरल की जिन नर्सों का कट्टरपंथी सुन्नी आतंकी संगठन आईएसआईएस ने ईराक में अपहरण कर लिया था और जिन्हे भारत सरकार ने ना जाने कितनी कोशिशों के बाद आतंकियों के चुंगल से आजाद करवाया. उन नर्सों ने लौट कर जो बात कही, उसे सुनकर आपका दिमाग घूम जाएगा.


    आईएसआईएस आतंकी बहुत भले लोग थे ?
    इन नर्सों के मुताबिक़ आईएसआईएस के आतंकी तो बड़े भले लोग थे. इराक के पूर्व तानाशाह सद्दाम हुसैन के गृहनगर टिकरिट के एक अस्पताल में काम करने वाली इन 46 नर्सों का पिछले महीने आईएसआईएस आतंकियों ने अपहरण कर लिया था.

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    इन नर्सों ने भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई, जिसपर मोदी सरकार ने तुरंत एक्शन लेते हुए उन्हें बचाने के लिए जी-जान से कोशिश की और आखिरकार उन्हें मौत के मुँह से निकाल लाये. मगर केरल में हालात ही कुछ ऐसे हैं कि आईएसआईएस के खिलाफ कोई बोल ही नहीं सकता. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत से आईएसआईएस आतंकी संगठन ज्वाइन करने वाले युवकों में सबसे ज्यादा केरल से ही हैं.

    मौत के मुँह से निकल कर आयी इन नर्सों ने पहले तो भारत सरकार का शुक्रिया अदा किया था, लेकिन बाद में इनके सुर बदल गए और इन्होने कहा कि इन्हे आतंकियों को अपहरणकर्ता कहना अच्छा नहीं लगता, क्योंकि आतंकियों ने तो दरअसल उन्हें अगवा करके उनकी रक्षा ही की.


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    नर्सों की दोगलापंथी से देश सन्न !
    आतंकियों से बचाई गयी नर्सों में से एक नर्स एन एस श्रुति ने कहा कि, “हमारी आशंका ने हमें उनसे नफरत करने के लिए मजबूर किया, मगर दरअसल वो भले लोग तो हमारी सुरक्षा ही कर रहे थे. वो हमारे साथ कुछ भी कर सकते थे, मगर उन्होंने हमपर दया दिखाई और हमारे साथ बुरा बर्ताव नहीं किया.”

    हालांकि शुरू में आतंकी कमसे काफी विनम्रता से बात कर रहे थे, लेकिन बाद में उन्होंने चिल्लाना, डांटना-फटकारना शुरू कर दिया था. ऐसा लगता है कि वो हमारी रक्षा करने के लिए काफी दबाव में थे क्योंकि आतंकियों को इराकी सेना द्वारा खुद पर हमले का ख़तरा था. मरीना जोसे नाम की नर्स ने भी आतंकियों को भला इंसान बताया.

    यहाँ सवाल ये है कि यदि आतंकी इतने ही भले लोग थे, तो फिर इन नर्सों ने चोरी-छिपे भारत में अपने रिश्तेदारों को फोन करके ये क्यों कहा कि उनकी जान खतरे में है? वहीँ आतंकियों के साथ ही रह जाना चाहिए था?

    Source-DDbharti.in

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