मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिया ऐसा बयान जिससे रोहिंग्या मुसलमानो की उड़ गई नींद, मुस्लिम नेताओ में मची चीख पुकार
मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में साफ़ कर दिया है की रोहिंग्या राष्ट्र की सुरक्षा के लिए खतरा हैं, यह बात केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल एक हलफनामे में कही है। हलफनामे में सरकार ने कहा है कि रोहिंग्याओं के आतंकी समूहों से संबंध हो सकते हैं और हो सकता है कि इन लोगों को आईएसआईएस द्वारा इस्तेमाल किया जाए। केंद्र सरकार ने कहा कि उन लोगों को वापस भेजा जाना ही देश के हित में है। साथ ही न्यायालय से इस मामले में दखल न देने की अपील की है।
अपने हलफनामे में केंद्र सरकार ने कहा कि खुफिया एजेंसियों के पास इस बात की जानकारी है कि रोहिंग्या समुदाय के कुछ लोगों के आतंकी समूहों से संबंध हैं। सरकार ने कहा कि ये समूह जम्मू, दिल्ली, हैदराबाद और मेवात में सक्रिय हैं।
बता दें कि सर्वोच्च न्यायालय दो रोहिंग्या प्रवासियों की याचिका पर सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है। याचिका करने वालों का कहना है कि वे म्यांमार में उत्पीड़न का सामना कर रहे थे और उन्हें वापस भेजे जाने का फैसला अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है। सर्वोच्च न्यायालय इस मामले पर सोमवार को सुनवाई करेगा।
आपको बता दे की इससे पहले जम्मू-कश्मीर के दौरे पर गए केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इस बारे में सवाल पूछे जाने पर यही बात कही थी। श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान गृह मंत्री ने कहा था कि गैरकानूनी ढंग से रह रहे विदेशी प्रवासियों से मजबूती से निपटा जाएगा। इससे पहले अगस्त में केंद्र सरकार ने कहा था कि सुरक्षा के मद्देनजर रोहिंग्या देश के लिए बड़ी चुनौती हो सकते हैं। हो सकता है कि उन्हें आतंकी समूहों द्वारा नियुक्त किया गया हो। केंद्र ने राज्य सरकारों से ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने के लिए कहा है।
मुस्लिम नेता
आल इंडिया इत्तेहादुल मुस्लिमीन के नेता सय्यद आसिम वक़ार ने इस मामले पर कहा कि AIMIM मांग करती है या तो सरकार रोहगिया मुसलिंम को भी तिब्बतियो और दलाईलामा की तरह refugee माने या दलाई लामा को भी देश से बाहर निकाले. वही उन्होंने कहा कि दुनिया में एक नए तरह का आतंकवाद पनप रहा है जोकि बौद्ध आतंकवाद है,आसिम वकार ने कहा कि बर्मा के जानवर बौद्ध भिक्षु आशिन विराथू पर दलाईलामा क्यों चुप है?
source – satyabharat.net
अपने हलफनामे में केंद्र सरकार ने कहा कि खुफिया एजेंसियों के पास इस बात की जानकारी है कि रोहिंग्या समुदाय के कुछ लोगों के आतंकी समूहों से संबंध हैं। सरकार ने कहा कि ये समूह जम्मू, दिल्ली, हैदराबाद और मेवात में सक्रिय हैं।
बता दें कि सर्वोच्च न्यायालय दो रोहिंग्या प्रवासियों की याचिका पर सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है। याचिका करने वालों का कहना है कि वे म्यांमार में उत्पीड़न का सामना कर रहे थे और उन्हें वापस भेजे जाने का फैसला अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है। सर्वोच्च न्यायालय इस मामले पर सोमवार को सुनवाई करेगा।
आपको बता दे की इससे पहले जम्मू-कश्मीर के दौरे पर गए केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इस बारे में सवाल पूछे जाने पर यही बात कही थी। श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान गृह मंत्री ने कहा था कि गैरकानूनी ढंग से रह रहे विदेशी प्रवासियों से मजबूती से निपटा जाएगा। इससे पहले अगस्त में केंद्र सरकार ने कहा था कि सुरक्षा के मद्देनजर रोहिंग्या देश के लिए बड़ी चुनौती हो सकते हैं। हो सकता है कि उन्हें आतंकी समूहों द्वारा नियुक्त किया गया हो। केंद्र ने राज्य सरकारों से ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने के लिए कहा है।
मुस्लिम नेता
आल इंडिया इत्तेहादुल मुस्लिमीन के नेता सय्यद आसिम वक़ार ने इस मामले पर कहा कि AIMIM मांग करती है या तो सरकार रोहगिया मुसलिंम को भी तिब्बतियो और दलाईलामा की तरह refugee माने या दलाई लामा को भी देश से बाहर निकाले. वही उन्होंने कहा कि दुनिया में एक नए तरह का आतंकवाद पनप रहा है जोकि बौद्ध आतंकवाद है,आसिम वकार ने कहा कि बर्मा के जानवर बौद्ध भिक्षु आशिन विराथू पर दलाईलामा क्यों चुप है?
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