मोदी के गुस्से का शिकार बना देश का ये सबसे बड़ा नेता, आयकर छापों से हुआ सनसनीखेज खुलासा !
नई दिल्ली : 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान कई अलग-अलग दलों के नेताओं ने मोदी लहर को भांप लिया और उस पर सवार होने के लिए बीजेपी ज्वाइन कर ली. मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से तो कई बड़े कोंग्रेसी नेताओं तक ने कांग्रेस को डूबता जहाज मान उससे किनारा कर लिया और बीजेपी में शामिल हो गए. उन्हें लगा कि बीजेपी में शामिल हो कर उन्होंने अपने भ्रष्टाचार छिपा लिए, मगर ऐसे नेताओं की अक्ल आज की इस खबर को पढ़कर ठिकाने आ गयी होगी.
पूर्व मुख्यमंत्री के दामाद के घर इनकम टैक्स की छापेमारी !
इसी साल मार्च में कांग्रेस पार्टी को छोड़ वरिष्ठ कोंग्रेसी नेता एसएम कृष्णा बीजेपी में शामिल हो गए थे. एसएम कृष्णा कर्नाटक के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं. सोनिया के दामाद ने अकेले अकूत संपत्ति बनायी हो ऐसा नहीं है, सभी बड़े नेताओं ने मिल बाँट कर मचाई थी लूट. आज कालेधन के बारे में जानकारी मिलते ही अब बीजेपी नेता और पूर्व कर्नाटक मुख्यमंत्री एसएम कृष्णा के दामाद वीजी सिद्धार्थ के घर पर आयकर विभाग की टीमें पहुंच गयी और छापेमारी कर दी.
एसएम कृष्णा के दामाद वीजी सिद्धार्थ मशहूर रेस्ट्रॉ कैफे कॉफी डे के मालिक है. केवल घर ही नहीं बल्कि सिद्धार्थ के बेंगलुरु, मुंबई, चेन्नई और चिकमागलुर के 20 से ज्यादा ठिकानों पर आयकर विभाग की टीमों ने धावा बोला है. बैंग्लुरु, मुंबई, चेन्नई और चिकमागल्लुर में फिलहाल यह छापेमारी चल रही है.
आयकर विभाग के छापों से कंपनी के कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है. छापे के दौरान आयकर विभाग ने कई अहम दस्तावेजों को भी बरामद किया है. बताया जा रहा है कि सिद्धार्थ काफी वक़्त से इनकम टैक्स अफसरों के रडार पर थे. आयकर विभाग के अधिकारीयों के मुताबिक़ सिद्धार्थ पर आरोप है कि उन्होंने काफी वक़्त से इनकम टैक्स की चोरी की है और उनके पास आय से अधिक संपत्ति है.
12 हजार 500 एकड़ में फैला है बिजनेस !
कॉफी की खेती करने वाले सिद्धार्थ ने जर्मन कॉफी चेन चिबो को देख भारत में कैफे कॉफी डे आउटलेट की शुरुआत की थी. 500 एकड़ से शुरू किया कॉफी प्लांटेशन का उनका काम 20 साल में 12 हजार 500 एकड़ के कॉफी एस्टेट तक पहुंच चुका है. सिद्धार्थ की पत्नी मालविका कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एसएम कृष्णा की बेटी हैं.
इसी साल फरवरी में ही समाज परिवर्तन समुदाय नाम के एनजीओ ने बेंगलुरू में मीडिया के सामने सिद्धार्थ पर कालेधन के आरोप लगाए थे. उन्होंने कहा था कि 1999 तक सिद्धार्थ की माली हालत इतनी खराब थी कि उनकी ओर से जारी चैक तक बाउंस हो जाया करते थे. लेकिन उसके बाद उनके ससुर एसएम कृष्णा जो उस वक़्त कोंग्रेसी नेता थे, कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने, राज्यपाल और हुए विदेश मंत्री के पद तक भी पहुंचे.
फर्जी स्टाम्प घोटाले में भी नाम !
इसी का फायदा उठा कर सिद्धार्थ रईसी की सीढ़ियां चढ़ते गए. आरोप यह भी कि सिद्धार्थ उन लोगों में भी शामिल रहे जिन्होंने फर्जी स्टाम्प घोटाले (तेलगी घोटाला) के जरिए बड़ी तादाद में काली कमाई जमा की. अपने ससुर के रसूख का फायदा उठाया सो अलग.
यहाँ तक कि एनजीओ के प्रमुख एसआर हीरेमथ ने कालेधन की जांच कर रही एसआईटी के सामने भी इन तथ्यों को पेश किया और मांग की कि सिद्धार्थ के खिलाफ जल्द जांच शुरू की जाए. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सीबीआई से भी उन्होंने सिद्धार्थ की आय से अधिक संपत्ति की जांच की मांग की थी.
ससुर के ओहदे का लाभ उठा जमा की अकूत संपत्ति !
केवल इतना ही नहीं बल्कि इससे पहले चंदन तस्कर वीरप्पन ने जब कृष्णा के मुख्यमंत्री रहते हुए दक्षिण भारतीय फिल्मों के हीरो राजकुमार का अपहरण कर लिया था तो उन्हें छुड़ाने के लिए सिद्धार्थ ने फिरौती थी और दो किश्तों में 10 करोड़ रुपए वीरप्पन तक पहुंचाए थे. एनजीओ के प्रमुख के मुताबिक़ उस दौर में इतने पैसे सिद्धार्थ के पास कहां से आए?
कृष्णा की बेटी का इतिहास भी जान लीजिये !
कोंग्रेसी नेता कृष्णा भी कुछ कम नहीं हैं. उनकी छोटी बेटी शाम्भवी शराब के कारोबार में जाना-पहचान नाम है और अपने बेटे देवा के नाम से ‘देवा ब्रांड’ की शराब बनाती हैं. उनपर भी आरोप है कि उनके पिता जब कर्नाटक के मुख्यमंत्री थे, उस दौरान एकाएक उनके पास अकूत दौलत आ गे और उन्होंने 2002-2003 में बेंगलुरु के नजदीक नंदी वैली में करीब 50 एकड़ के अंगूरों के दो बगीचे खरीद डाले.
इसके बाद शाम्भवी ने अंगूर महाराष्ट्र में वाइन बनाने वाली कंपनियों को बेचने शुरू किये और 2012-13 में वो खुद ही वाइन के कारोबार में उतर गईं. शाम्भवी के पति उमेश हिंगोरानी भी वाइन के कारोबारी हैं और वो बैंकों से करोड़ों का कर्ज लेकर लंदन भाग चुके शराब कारोबारी विजय माल्या के सौतेले भाई हैं और माल्या की कंपनी यूनाइटेड ब्रेवरेज में वाइस प्रेसिडेंट का पद भी संभाल चुके हैं.
Source-DDbharti.in
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इसी साल मार्च में कांग्रेस पार्टी को छोड़ वरिष्ठ कोंग्रेसी नेता एसएम कृष्णा बीजेपी में शामिल हो गए थे. एसएम कृष्णा कर्नाटक के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं. सोनिया के दामाद ने अकेले अकूत संपत्ति बनायी हो ऐसा नहीं है, सभी बड़े नेताओं ने मिल बाँट कर मचाई थी लूट. आज कालेधन के बारे में जानकारी मिलते ही अब बीजेपी नेता और पूर्व कर्नाटक मुख्यमंत्री एसएम कृष्णा के दामाद वीजी सिद्धार्थ के घर पर आयकर विभाग की टीमें पहुंच गयी और छापेमारी कर दी.
एसएम कृष्णा के दामाद वीजी सिद्धार्थ मशहूर रेस्ट्रॉ कैफे कॉफी डे के मालिक है. केवल घर ही नहीं बल्कि सिद्धार्थ के बेंगलुरु, मुंबई, चेन्नई और चिकमागलुर के 20 से ज्यादा ठिकानों पर आयकर विभाग की टीमों ने धावा बोला है. बैंग्लुरु, मुंबई, चेन्नई और चिकमागल्लुर में फिलहाल यह छापेमारी चल रही है.
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12 हजार 500 एकड़ में फैला है बिजनेस !
कॉफी की खेती करने वाले सिद्धार्थ ने जर्मन कॉफी चेन चिबो को देख भारत में कैफे कॉफी डे आउटलेट की शुरुआत की थी. 500 एकड़ से शुरू किया कॉफी प्लांटेशन का उनका काम 20 साल में 12 हजार 500 एकड़ के कॉफी एस्टेट तक पहुंच चुका है. सिद्धार्थ की पत्नी मालविका कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एसएम कृष्णा की बेटी हैं.
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इसी साल फरवरी में ही समाज परिवर्तन समुदाय नाम के एनजीओ ने बेंगलुरू में मीडिया के सामने सिद्धार्थ पर कालेधन के आरोप लगाए थे. उन्होंने कहा था कि 1999 तक सिद्धार्थ की माली हालत इतनी खराब थी कि उनकी ओर से जारी चैक तक बाउंस हो जाया करते थे. लेकिन उसके बाद उनके ससुर एसएम कृष्णा जो उस वक़्त कोंग्रेसी नेता थे, कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने, राज्यपाल और हुए विदेश मंत्री के पद तक भी पहुंचे.
फर्जी स्टाम्प घोटाले में भी नाम !
इसी का फायदा उठा कर सिद्धार्थ रईसी की सीढ़ियां चढ़ते गए. आरोप यह भी कि सिद्धार्थ उन लोगों में भी शामिल रहे जिन्होंने फर्जी स्टाम्प घोटाले (तेलगी घोटाला) के जरिए बड़ी तादाद में काली कमाई जमा की. अपने ससुर के रसूख का फायदा उठाया सो अलग.
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यहाँ तक कि एनजीओ के प्रमुख एसआर हीरेमथ ने कालेधन की जांच कर रही एसआईटी के सामने भी इन तथ्यों को पेश किया और मांग की कि सिद्धार्थ के खिलाफ जल्द जांच शुरू की जाए. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सीबीआई से भी उन्होंने सिद्धार्थ की आय से अधिक संपत्ति की जांच की मांग की थी.
ससुर के ओहदे का लाभ उठा जमा की अकूत संपत्ति !
केवल इतना ही नहीं बल्कि इससे पहले चंदन तस्कर वीरप्पन ने जब कृष्णा के मुख्यमंत्री रहते हुए दक्षिण भारतीय फिल्मों के हीरो राजकुमार का अपहरण कर लिया था तो उन्हें छुड़ाने के लिए सिद्धार्थ ने फिरौती थी और दो किश्तों में 10 करोड़ रुपए वीरप्पन तक पहुंचाए थे. एनजीओ के प्रमुख के मुताबिक़ उस दौर में इतने पैसे सिद्धार्थ के पास कहां से आए?
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कोंग्रेसी नेता कृष्णा भी कुछ कम नहीं हैं. उनकी छोटी बेटी शाम्भवी शराब के कारोबार में जाना-पहचान नाम है और अपने बेटे देवा के नाम से ‘देवा ब्रांड’ की शराब बनाती हैं. उनपर भी आरोप है कि उनके पिता जब कर्नाटक के मुख्यमंत्री थे, उस दौरान एकाएक उनके पास अकूत दौलत आ गे और उन्होंने 2002-2003 में बेंगलुरु के नजदीक नंदी वैली में करीब 50 एकड़ के अंगूरों के दो बगीचे खरीद डाले.
इसके बाद शाम्भवी ने अंगूर महाराष्ट्र में वाइन बनाने वाली कंपनियों को बेचने शुरू किये और 2012-13 में वो खुद ही वाइन के कारोबार में उतर गईं. शाम्भवी के पति उमेश हिंगोरानी भी वाइन के कारोबारी हैं और वो बैंकों से करोड़ों का कर्ज लेकर लंदन भाग चुके शराब कारोबारी विजय माल्या के सौतेले भाई हैं और माल्या की कंपनी यूनाइटेड ब्रेवरेज में वाइस प्रेसिडेंट का पद भी संभाल चुके हैं.
Source-DDbharti.in




