ममता के खिलाफ हाईकोर्ट के बड़े फैसले से देश में ख़ुशी की लहर, खिले स्वामी और मोदी के चेहरे !
कोलकाता : बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी किसी तानाशाह की तरह राज्य में शासन चलाती है और एक ख़ास समुदाय का जबरदस्त तुष्टिकरण किया जाता है, ये बात तो किसी से छिपी नहीं है. लगभग हर साल राज्य में हिन्दू-मुस्लिम दंगे होते हैं और मुस्लिम दंगाई बड़े आराम से दंगा मचा कर चले जाते हैं, पुलिस-प्रशासन को कार्रवाई करने के आदेश नहीं दिए जाते. अब तो सभी हदें पार हो चुकी हैं, खुद ममता खुलकर हिन्दुओं के त्योहारों के खिलाफ फरमान जारी करने लगी है. अब कोलकाता हाईकोर्ट ने ममता के खिलाफ फैसला सुनाया है.
भारत में तानाशाही नहीं चलेगी !
आपको याद ही होगा कि अभी हाल ही में ममता ने फरमान जारी किया था कि मुहर्रम के कारण दुर्गा मूर्ति विसर्जन पर ही प्रतिबन्ध लगा दिया. जिसकी पूरे देश में आलोचना की गयी थी. इस मुद्दे पर कोलकाता हाईकोर्ट ने ममता के खिलाफ फैसला सुनाया है.
ये कैसी तानाशाही है? प्रतिबंध लगाना तो सरकार का सबसे आखिरी विकल्प है. तो फिर एक वर्ग की तुष्टिकरण के लिए दुसरे वर्ग को क्या त्यौहार ही नहीं मनाने दिया जाएगा? हाईकोर्ट ने कहा है कि आखिरी विकल्प का इस्तेमाल सबसे पहले क्यों किया गया?
तुष्टिकरण की राजनीति को झटका !
सरकार को सिलसिलेवार तरीके से कदम उठाने होंगे. प्रतिबन्ध लगाना ही था तो सब पर क्यों नहीं लगाया, एक वर्ग पर ही क्यों लगाया? हाईकोर्ट ने कहा कि ने ममता सरकार बिना किसी आधार के अधिकार का इस्तेमाल कर रही है. सरकार कैलेंडर को नहीं बदल सकती है, क्योंकि आप सत्ता में हैं इसलिए दो दिनों के लिए बलपूर्वक आस्था पर रोक नहीं लगा सकते हैं. सरकार को हर हालात के लिए तैयार रहना होगा.
सरकार ये तय नहीं करेगी कि कौन सा त्यौहार कब मनाया जाए. वहीं, सरकार के वकील ने कोर्ट में कहा कि क्या सरकार को कानून व्यवस्था का अधिकार नहीं है? वकील की ओर से कहा गया है कि अगर कानून व्यवस्था बिगड़ी तो किसकी जिम्मेदारी होगी. मगर कोर्ट ने ममता सरकार के खिलाफ फैसला सुनाया है.
बता दें कि इससे पहले बुधवार को भी हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा था कि, “आप दो समुदायों के बीच दरार पैदा क्यों कर रहे हैं. दुर्गा पूजन और मुहर्रम को लेकर राज्य में कभी ऐसे स्थिति नहीं बनी है. उन्हें साथ रहने दीजिए.”
मीडिया ने आँखें मूंदी !
ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब हाईकोर्ट में ममता सरकार इसी तरह जलील हुई हो. इससे पहले हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया था जिसके बाद ममता बनर्जी सरकार को मूर्ति विजर्सन की तय समय सीमा के फैसले को बदलना पड़ा था. उस वक़्त भी ममता ने विजयदशमी के दिन विसर्जन की समय सीमा शाम 6 बजे तक निर्धारित की थी, जिसे बाद में बढ़ाकर रात 10 बजे तक कर दिया गया था.
कोई मीडिया सच नहीं दिखा रहा है, बंगाल की भयानक सच्चाई ये है कि बंगाल को इस्लामिक बनाने की साजिशें की जा रही हैं. तुष्टिकरण करने वाले नेताओं ने अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिमों की बड़ी तादात घुसाई हुई है. घर-घर में देसी बमों की फैक्ट्रियां चल रही हैं. मौलाना देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ फतवे जारी करने की हिमाकत करते हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि वोटों की लालची ममता कुछ नहीं करेगी. आलम ये हो गया है कि अब तो मुख्यमंत्री खुद हिन्दुओं के खिलाफ सरकारी फैसले लेने लगी है. बंगाल बारूद और नफरत के ढेर पर बैठा हुआ है, जिसमे कभी भी विस्फोट हो सकता है.
हाईकोर्ट के फैसले के बाद हिन्दुओं को कुछ राहत तो जरूर मिली है लेकिन समस्या बेहद गंभीर है. मगर हैरानी की बात है कि इन मुद्दों पर देश का मीडिया बात नहीं करता है. किसी को बंगाल की ओर देखने की कोई दिलचस्पी ही नहीं है.
Source - Ddbharti.in
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आपको याद ही होगा कि अभी हाल ही में ममता ने फरमान जारी किया था कि मुहर्रम के कारण दुर्गा मूर्ति विसर्जन पर ही प्रतिबन्ध लगा दिया. जिसकी पूरे देश में आलोचना की गयी थी. इस मुद्दे पर कोलकाता हाईकोर्ट ने ममता के खिलाफ फैसला सुनाया है.
ये कैसी तानाशाही है? प्रतिबंध लगाना तो सरकार का सबसे आखिरी विकल्प है. तो फिर एक वर्ग की तुष्टिकरण के लिए दुसरे वर्ग को क्या त्यौहार ही नहीं मनाने दिया जाएगा? हाईकोर्ट ने कहा है कि आखिरी विकल्प का इस्तेमाल सबसे पहले क्यों किया गया?
तुष्टिकरण की राजनीति को झटका !
सरकार को सिलसिलेवार तरीके से कदम उठाने होंगे. प्रतिबन्ध लगाना ही था तो सब पर क्यों नहीं लगाया, एक वर्ग पर ही क्यों लगाया? हाईकोर्ट ने कहा कि ने ममता सरकार बिना किसी आधार के अधिकार का इस्तेमाल कर रही है. सरकार कैलेंडर को नहीं बदल सकती है, क्योंकि आप सत्ता में हैं इसलिए दो दिनों के लिए बलपूर्वक आस्था पर रोक नहीं लगा सकते हैं. सरकार को हर हालात के लिए तैयार रहना होगा.
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सरकार ये तय नहीं करेगी कि कौन सा त्यौहार कब मनाया जाए. वहीं, सरकार के वकील ने कोर्ट में कहा कि क्या सरकार को कानून व्यवस्था का अधिकार नहीं है? वकील की ओर से कहा गया है कि अगर कानून व्यवस्था बिगड़ी तो किसकी जिम्मेदारी होगी. मगर कोर्ट ने ममता सरकार के खिलाफ फैसला सुनाया है.
बता दें कि इससे पहले बुधवार को भी हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा था कि, “आप दो समुदायों के बीच दरार पैदा क्यों कर रहे हैं. दुर्गा पूजन और मुहर्रम को लेकर राज्य में कभी ऐसे स्थिति नहीं बनी है. उन्हें साथ रहने दीजिए.”
मीडिया ने आँखें मूंदी !
ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब हाईकोर्ट में ममता सरकार इसी तरह जलील हुई हो. इससे पहले हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया था जिसके बाद ममता बनर्जी सरकार को मूर्ति विजर्सन की तय समय सीमा के फैसले को बदलना पड़ा था. उस वक़्त भी ममता ने विजयदशमी के दिन विसर्जन की समय सीमा शाम 6 बजे तक निर्धारित की थी, जिसे बाद में बढ़ाकर रात 10 बजे तक कर दिया गया था.
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कोई मीडिया सच नहीं दिखा रहा है, बंगाल की भयानक सच्चाई ये है कि बंगाल को इस्लामिक बनाने की साजिशें की जा रही हैं. तुष्टिकरण करने वाले नेताओं ने अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिमों की बड़ी तादात घुसाई हुई है. घर-घर में देसी बमों की फैक्ट्रियां चल रही हैं. मौलाना देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ फतवे जारी करने की हिमाकत करते हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि वोटों की लालची ममता कुछ नहीं करेगी. आलम ये हो गया है कि अब तो मुख्यमंत्री खुद हिन्दुओं के खिलाफ सरकारी फैसले लेने लगी है. बंगाल बारूद और नफरत के ढेर पर बैठा हुआ है, जिसमे कभी भी विस्फोट हो सकता है.
हाईकोर्ट के फैसले के बाद हिन्दुओं को कुछ राहत तो जरूर मिली है लेकिन समस्या बेहद गंभीर है. मगर हैरानी की बात है कि इन मुद्दों पर देश का मीडिया बात नहीं करता है. किसी को बंगाल की ओर देखने की कोई दिलचस्पी ही नहीं है.
Source - Ddbharti.in




