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    28 साल हो गए अपने ही देश में रेफूजी बने, न कोई मीलॉर्ड और न ही कोई मानवाधिकार वाला !

    बांग्लादेशी मुसलमानो को बाहर करने की बात आती है तो उनके समर्थन में नेता बयानबाजी करने लगते है
    भारत को ही धमकियाँ देने लगते है

    लालू यादव - बांग्लादेशियों को नहीं निकाला जा सकता, उन्हें भारत की नागरिकता दी जाये
    ममाता बनर्जी - बांग्लादेशियों को हाथ भी लगाया तो छोडूंगी नहीं

    जब रोहिंग्या मुसलमानो की बात आती है तो
    मानवाधिकार वाले केंद्र को नोटिस भेजने लगते है, प्रशांत भूषण जैसे वकील सुप्रीम कोर्ट जाने लगते है
    सुप्रीम कोर्ट भी अवैध रोहिंग्या मुसलमानो पर सुनवाई करने लगती है और केंद्र को नोटिस भेज देती है

    शशि थरूर कहते है की रोहिंग्या को बाहर नहीं किया जा सकता
    आतंकी ज़ाकिर मूसा तो कहता है रोहिंग्या को हाथ लगाया तो हिन्दुओ से उसका बदला लेगा
    तमाम सामाजिक कार्यकर्त्ता और मानवाधिकार वाले रोहिंग्या को नागरिकता देने के लिए बयानबाजी करने लगते है

    28 साल हो गए जी हां 28
    कश्मीर के हिन्दू, ये भारत के ही हिन्दू है, बांग्लादेश या म्यांमार से नहीं नहीं आये
    अपने ही देश में कश्मीर के 6 लाख हिन्दू रेफूजी बनकर रहने को मजबूर है, उनके जमीनों पर कश्मीरी मुसलमानो का कब्ज़ा है, उनके घर जलाकर बर्बाद कर दिए गए, उनके मंदिर जला दिए गए

    पर इन हिन्दुओ के लिए न ही कोई मीलॉर्ड है, और न ही कोई मानवाधिकार
    पर बांग्लादेशियों, रोहिंग्या मुसलमानो, सोमाली मुसलमानो के लिए सबकुछ फ्री है, उनके लिए मानवाधिकार भी है, मीलॉर्ड भी है 

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