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    1940 में हिन्दुओ को काफिर बताने वाले आज हिन्दुओ के साथ भारत में रहना चाहते है !

    भारत का बंटवारा मुसलमानो ने भले ही 1947 में करवाया हो पर उसकी तैयारी कई दशकों से चल रही थी
    म्यांमार तब बर्मा कहलाता था, और भारत का ही हिस्सा था

    1940 की बात है, बर्मा के अराकान में मुसलमान बहुसंख्यक थे
    और यहाँ जिन्नाह और उसकी मुस्लिम लीग पाकिस्तान बनाने की दिशा में काम कर रही थी

    1940  बर्मा के इन बंगाली मुसलमानो जिन्हे रोहिंग्या कहते है उन्होंने जिन्नाह को चिट्ठी लिखकर पाकिस्तान में शामिल होने की इक्षा जताई थी
    रोहिंग्या मुसलमानो ने जिन्नाह को चिट्ठी लिखकर कहा था की, बर्मा के अराकान में हम लोग बहुसंख्यक है

    और आप पाकिस्तान बना रहे है तो पूर्वी पाकिस्तान में अराकान को भी शामिल कर लीजिये क्यूंकि हम इस्लामिक देश में रहना चाहते है न की काफिर हिन्दू और बौद्धों के साथ

    पर रोहिंग्या मुसलमानो की ये इक्षा पूरी नहीं हो सकी
    और अराकान कभी भी पूर्वी पाकिस्तान जो अब बांग्लादेश है उसमे शामिल नहीं हो सका

    उसके बाद से ही रोहिंग्या मुसलमानो ने अराकान में आतंक मचाये रखा, इस्लामिक देश की मांग को लेकर
    कश्मीर जैसे ही हालात थे, पर 2012 के बाद बौद्धों ने भी शांति का मांर्ग त्याग दिया

    और ये रोहिंग्या मुसलमान जो 1940 में भारत और हिन्दुओ के खिलाफ जहर उगल रहे थे
    वो भारत में शरण पाना चाहते है, हिन्दुओ के साथ रहना चाहते है

    असल में ये रोहिंग्या मुसलमान उस कैंसर की तरह है जो फैलता ही जाता है, ये भारत में भी अपने मिनी पाकिस्तान इलाके बनाएंगे, और वही करेंगे जो इन्होने बर्मा के अराकान में किया
    Source-Dainik-bharat.com

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