वंदे मातरम से इस्लाम को कोई खतरा नहीं, कट्टरपंथी जिहादी सिर्फ फैला रहे है नफरत ! - Jagran 24
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ये 14 अप्रैल 1931 में लाहौर के स्थानीय मुसलमानो ने ही छापा था, इस अख़बार का नाम देख सकते है
नाम है "द डेली वंदे मातरम", लाहौर का स्थानीय उर्दू अख़बार
वंदे मातरम अख़बार, 14 अप्रैल 1931 लाहौर
साफ़ हो जाता है की वंदे मातरम इस्लाम के लिए कोई खतरा नहीं है
इसे 1947 से पहले मुसलमान गाते भी रहे है, और वंदे मातरम के नाम का अखबार भी चलाते रहे है
वंदे मातरम के नाम से मुसलमान कई कार्यक्रम भी चलाते रहे है
वनडे मातरम लाहौर
जो कट्टरपंथी वंदे मातरम का विरोध कर रहे है वो केवल नफरत और जिहाद फैला रहे है
वंदे मातरम इस्लाम के लिए कभी कोई खतरा नहीं रहा है
ये आज के कट्टरपंथी केवल मजहबी उन्माद, समाज में नफरत फैलाने के मकसद से वंदे मातरम का विरोध कर रहे है
ये 14 अप्रैल 1931 में लाहौर के स्थानीय मुसलमानो ने ही छापा था, इस अख़बार का नाम देख सकते है
नाम है "द डेली वंदे मातरम", लाहौर का स्थानीय उर्दू अख़बार
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वंदे मातरम अख़बार, 14 अप्रैल 1931 लाहौर
साफ़ हो जाता है की वंदे मातरम इस्लाम के लिए कोई खतरा नहीं है
इसे 1947 से पहले मुसलमान गाते भी रहे है, और वंदे मातरम के नाम का अखबार भी चलाते रहे है
वंदे मातरम के नाम से मुसलमान कई कार्यक्रम भी चलाते रहे है
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ये देखिये लाहौर में छपवाया गया फंफ्लेटवनडे मातरम लाहौर
जो कट्टरपंथी वंदे मातरम का विरोध कर रहे है वो केवल नफरत और जिहाद फैला रहे है
वंदे मातरम इस्लाम के लिए कभी कोई खतरा नहीं रहा है
ये आज के कट्टरपंथी केवल मजहबी उन्माद, समाज में नफरत फैलाने के मकसद से वंदे मातरम का विरोध कर रहे है




