सुप्रीम कोर्ट से भिड़ गए मौलाना, तीन तलाक को लेकर जारी किया फतवा, खुलेआम दे डाली धमकी !
नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक बताते हुए इसपर रोक लगा दी है. जिसके बाद से देशभर की मुस्लिम महिलाओं में ख़ुशी की लहर दौड़ गयी है. मगर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का कुछ लोग देश में सरेआम अपमान करने में भी जुट गए हैं. मजहब के ठेकेदार नहीं चाहते कि मुस्लिम महिलायें सबल हों.
ममता के मंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ फूँका बिगुल !
बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के मंत्री और जमीयत उलेमा-ऐ-हिन्द के प्रेजिडेंट सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने खुलकर देश के मुस्लिमों से कहा है कि तीन तलाक पर सुप्रीम का फैसला ही असंवैधानिक है, इसलिए देश के मुस्लिमों को इसे नहीं मानना चाहिए.
बताया जाता है कि बंगाल के लगभग 970 मदरसे, जिनमे तकरीबन एक लाख पचास हजार छात्र पढ़ते हैं, पर सिद्दीकुल्लाह चौधरी का अच्छा प्रभाव है. सिद्दीकुल्लाह ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट को मुस्लिम पर्सनल लॉ में दखल देने का कोई हक़ ही नहीं है. अपने मंत्री के बयान पर ममता ने चुप्पी साध ली है और बंगाल में मुहर्रम के दिन दुर्गा मूर्ती विसर्जन पर ही रोक लगा दी है.
देखिये स्वराज्य का ये ट्वीट !
सजा दे दो मगर मौलाना मदनी नहीं मानेंगे कोर्ट का फैसला !
वहीँ इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक़ जमात उलेमा ए हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने भी कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बावजूद ‘एक साथ तीन तलाक़’ या तलाक़-ए-बिद्दत को वैध मानना जारी रखा जाएगा. मदनी ने कहा कि यदि आप सज़ा देना चाहें तो दें, लेकिन इस तरह से तलाक़ मान्य होगा. मदनी ने कहा वो सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सहमत नहीं हैं.
मदनी ने तीन तलाक़ और एक साथ तीन तलाक़ पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है. उन्होंने कहा, ‘मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि तलाक़ अब भी जारी रहेगा, भले ही यह इस्लाम में सबसे बड़ा पाप है लेकिन फिर भी तलाक़ और एक बार में तीन तलाक़ मान्य रहेगा. यदि आप उस व्यक्ति को दंड देना चाहते हैं, तो दे सकते हैं लेकिन तलाक़ तो मान्य होगा.’
तीन तलाक के खिलाफ जंग जीतने वालीं इशरत भी मुश्किल में !
सबसे ज्यादा हैरान करने वाली खबर तो ये है कि तीन तलाक के खिलाफ लड़ने वाली मुस्लिम महिला इशरत जहां की मुश्किलें सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद भी कम नहीं हुई हैं. गरीबी के सामने भी हार ना मानते हुए सामाजिक न्याय के लिए लड़ने वाली और एक मिसाल पेश करने वाली इशरत का उनके ही रिश्तेदारों और पड़ोसियों ने सामाजिक बहिष्कार कर दिया है. इशरत को अब उनकी आलोचना और बदजुबानी का शिकार होना पड़ रहा है.
इशरत ने बताया कि आसपास के लोग उन्हें ‘गंदी औरत’ और इस्लाम विरोधी कहते हैं. हावड़ा की रहने वाली इशरत जहां भी तीन तलाक से पीड़ित रही हैं. उनके शौहर ने 2014 में दुबई से फोन करके उन्हें तीन तलाक दे दिया था. इशरत उन पांच याचिकाकर्ताओं में से एक हैं जिनकी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया है.
इशरत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला उनके पक्ष में आने के बाद से उनके ससुराल वालों और पड़ोसियों ने उनके चरित्र को लेकर भद्दी टिपण्णियां करना शुरू कर दिया है. उन्हें गंदी औरत जैसे शब्द सुनने को मिलते हैं. कई पड़ोसियों ने तो उनसे बात तक करना बंद कर दिया है.
वहीँ इशरत की वकील नाजिया इलाही खान का भी कुछ ऐसा ही हाल है, उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा है. उनपर भद्दी फब्तियां कासी जाने लगी हैं. ऐसा लग रहा है कि मानो मजहबी कट्टरपंथी इस फैसले को पचा ही नहीं पा रहे. वो चाहते ही नहीं कि मुस्लिम महिलाएं भी बराबरी की हकदार हों. आजादी से, अधिकारों के साथ जी पाएं.
ममता के मंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ फूँका बिगुल !
बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के मंत्री और जमीयत उलेमा-ऐ-हिन्द के प्रेजिडेंट सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने खुलकर देश के मुस्लिमों से कहा है कि तीन तलाक पर सुप्रीम का फैसला ही असंवैधानिक है, इसलिए देश के मुस्लिमों को इसे नहीं मानना चाहिए.
बताया जाता है कि बंगाल के लगभग 970 मदरसे, जिनमे तकरीबन एक लाख पचास हजार छात्र पढ़ते हैं, पर सिद्दीकुल्लाह चौधरी का अच्छा प्रभाव है. सिद्दीकुल्लाह ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट को मुस्लिम पर्सनल लॉ में दखल देने का कोई हक़ ही नहीं है. अपने मंत्री के बयान पर ममता ने चुप्पी साध ली है और बंगाल में मुहर्रम के दिन दुर्गा मूर्ती विसर्जन पर ही रोक लगा दी है.
देखिये स्वराज्य का ये ट्वीट !
सजा दे दो मगर मौलाना मदनी नहीं मानेंगे कोर्ट का फैसला !
वहीँ इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक़ जमात उलेमा ए हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने भी कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बावजूद ‘एक साथ तीन तलाक़’ या तलाक़-ए-बिद्दत को वैध मानना जारी रखा जाएगा. मदनी ने कहा कि यदि आप सज़ा देना चाहें तो दें, लेकिन इस तरह से तलाक़ मान्य होगा. मदनी ने कहा वो सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सहमत नहीं हैं.
मदनी ने तीन तलाक़ और एक साथ तीन तलाक़ पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है. उन्होंने कहा, ‘मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि तलाक़ अब भी जारी रहेगा, भले ही यह इस्लाम में सबसे बड़ा पाप है लेकिन फिर भी तलाक़ और एक बार में तीन तलाक़ मान्य रहेगा. यदि आप उस व्यक्ति को दंड देना चाहते हैं, तो दे सकते हैं लेकिन तलाक़ तो मान्य होगा.’
तीन तलाक के खिलाफ जंग जीतने वालीं इशरत भी मुश्किल में !
सबसे ज्यादा हैरान करने वाली खबर तो ये है कि तीन तलाक के खिलाफ लड़ने वाली मुस्लिम महिला इशरत जहां की मुश्किलें सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद भी कम नहीं हुई हैं. गरीबी के सामने भी हार ना मानते हुए सामाजिक न्याय के लिए लड़ने वाली और एक मिसाल पेश करने वाली इशरत का उनके ही रिश्तेदारों और पड़ोसियों ने सामाजिक बहिष्कार कर दिया है. इशरत को अब उनकी आलोचना और बदजुबानी का शिकार होना पड़ रहा है.
इशरत ने बताया कि आसपास के लोग उन्हें ‘गंदी औरत’ और इस्लाम विरोधी कहते हैं. हावड़ा की रहने वाली इशरत जहां भी तीन तलाक से पीड़ित रही हैं. उनके शौहर ने 2014 में दुबई से फोन करके उन्हें तीन तलाक दे दिया था. इशरत उन पांच याचिकाकर्ताओं में से एक हैं जिनकी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया है.
इशरत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला उनके पक्ष में आने के बाद से उनके ससुराल वालों और पड़ोसियों ने उनके चरित्र को लेकर भद्दी टिपण्णियां करना शुरू कर दिया है. उन्हें गंदी औरत जैसे शब्द सुनने को मिलते हैं. कई पड़ोसियों ने तो उनसे बात तक करना बंद कर दिया है.
वहीँ इशरत की वकील नाजिया इलाही खान का भी कुछ ऐसा ही हाल है, उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा है. उनपर भद्दी फब्तियां कासी जाने लगी हैं. ऐसा लग रहा है कि मानो मजहबी कट्टरपंथी इस फैसले को पचा ही नहीं पा रहे. वो चाहते ही नहीं कि मुस्लिम महिलाएं भी बराबरी की हकदार हों. आजादी से, अधिकारों के साथ जी पाएं.




