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    फ्रांस आया भारत के साथ: कहा- भारत से भिड़ने की चीन में हिम्मत नहीं

    NEW DELHI: भारत और चीन के बीच तनाव और बढ़ गया है। 1962 की भारत-चीन लड़ाई के बाद यह पहला मौका है जब सिक्किम से लगी सीमा पर भारत और चीन के बीच गतिरोध इतना लंबा चल गया है।
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    इस इलाके में दोनों तरफ सैनिक भेजे गए हैं। यहां भारत ने डोकाला में जो सैनिक भेजे हैं, उन्हें नॉन काम्बैटिव मोड में तैनात किया गया है। इस मोड में सैनिक अपनी बंदूक की नाल को जमीन की ओर रखते हैं। सिक्किम की सीमा पर एक इलाका है, जहां चीन, भारत और भूटान की सीमा मिलती है और इसी इलाके में चीन को भारत ने सड़क बनाने से रोका।
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    भारत के पक्ष में अमेरिका, इस्राइल और रुस पहले से ही था। लेकिन अब फ्रांस भी भारत के पक्ष में आ गया है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैन्युएल मैक्रॉन ने कहा है कि भारत चीन के मसले पर हम भारत के साथ है। भारत से हमारे रिश्ते हमेशा सही रहे हैं और हमारी दोस्ती भी अटूट है। जहां तक हम जानते हैं भारत कभी भी गलत कदम नहीं उठा सकता है। इसलिए हम हर तरफ से भारत के साथ है।



    इससे पहले चीनी सेना ने भारत के दो बंकर नष्ट कर दिए और इस घटना के बाद से तनाव बढ़ता गया। भूटान ने भारत की मदद से चीन के सामने अपनी चिंता ज़ाहिर की क्योंकि चीन और भूटान के बीच राजनयिक संबंध नहीं है। इस बीच चीन ने भारत से सेना की गतिविधि को लेकर आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई और यह भी संदेश दिया कि गतिरोध ख़त्म होने के बाद ही तीर्थयात्रियों को कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने के लिए नाथू-ला पास का रास्ता खोला जाएगा।

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