मायावती बोलीं, "मैं राज्य सभा से इस्तीफ़ा दे दूंगी", लोग बोले "जल्दी करो, देश का भला होगा"
मायावती ने राज्य सभा से इस्तीफ़ा देने का फैसला किया है, उन्होंने आज धमकी दी है कि उन्हें राज्य सभा में दलितों और दबे कुचलों के मुद्दों पर बोलने नहीं दिया जा रहा है इसलिए मेरे राज्य सभा सदस्य होने पर लानत है. उनके इस फैसले का ट्विटर पर जोरदार स्वागत किया गया, कई लोगों ने कहा कि आप जल्दी इस्तीफ़ा दे दीजिये ताकि देश का भला हो जाए, आज उत्तर प्रदेश में दलितों की जो हालत है उसके लिए आप ही जिम्मेदार हैं.
मायावती यहीं नहीं रुकी, उन्होंने सहारनपुर दंगों का इल्जाम भी बीजेपी पर लगा दिया, उन्होंने कहा कि बीजेपी ने ही जानबूझकर सहारनपुर में दंगा कराया और अब दलितों की आवाज दबाई जा रही है. उन्होंने कहा कि अगर मुझे बोलने नहीं दिया गया तो मैं इस्तीफ़ा दे दूंगी.
उन्होने कहा कि स्थगन प्रस्ताव के समय कोई टाइम लिमिट नहीं होती है, उस समय अगर मैं चाहूँ तो आधे घंटे और एक घंटे भी बोल सकती हूँ, लेकिन मुझे अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया. उन्होंने कहा कि अब मैंने फैसला लिया है कि इस हाउस के अन्दर ऐसी सरकार के रहते हुए, जो सरकार बाबा अंबेडकर के नाम पर दलितों को गुमराह करती रहती है, मैं इस सदन से इस्तीफ़ा दे दूंगी.
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बात दरअसल यह थी कि मायावती ने बिना नोटिस के ही सहारनपुर में हाल ही में हुए दंगे का मुद्दा उठाना शुरू कर दिया, बिना नोटिस के राज्य सभा में कोई मुद्दा नहीं उठाया जा सकता और ना ही चर्चा की जा सकती है लेकिन मायावती सभी नियम कायदे तोड़कर सहारनपुर दंगे पर चर्चा करना चाहती थीं. जब बीजेपी सदस्यों ने उनका विरोध किया तो मायावती ने मोदी सरकार को दलित विरोधी बताना शुरू कर दिया.मायावती यहीं नहीं रुकी, उन्होंने सहारनपुर दंगों का इल्जाम भी बीजेपी पर लगा दिया, उन्होंने कहा कि बीजेपी ने ही जानबूझकर सहारनपुर में दंगा कराया और अब दलितों की आवाज दबाई जा रही है. उन्होंने कहा कि अगर मुझे बोलने नहीं दिया गया तो मैं इस्तीफ़ा दे दूंगी.
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मायावती ने कहा कि मैं राज्य सभा में दबे कुचलों की बात रख रही थी तो मेरी बात को सुना नहीं गया और सत्ता पक्ष के लगो जिसमें मंत्री भी शामिल थे, सारे के सारे खड़े हो गए. मुझे जब बोलने नहीं दिया गया तो मेरी राज्यसभा सदस्य होने पर लानत है. क्या फायदा है मेरे राज्य सभा में आने का.उन्होने कहा कि स्थगन प्रस्ताव के समय कोई टाइम लिमिट नहीं होती है, उस समय अगर मैं चाहूँ तो आधे घंटे और एक घंटे भी बोल सकती हूँ, लेकिन मुझे अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया. उन्होंने कहा कि अब मैंने फैसला लिया है कि इस हाउस के अन्दर ऐसी सरकार के रहते हुए, जो सरकार बाबा अंबेडकर के नाम पर दलितों को गुमराह करती रहती है, मैं इस सदन से इस्तीफ़ा दे दूंगी.
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उन्होंने कहा कि सहारनपुर में जो दलित उत्पीडन कांड हुआ है, उसके बारे में मुझे इस सरकार ने बोलने नहीं दिया है तो इसमें इनकी नौटंकी नहीं है तो और क्या है. जब मैं देश और जनहित के मुद्दों पर अपनी बात नहीं रख सकती, जब मैं अपने समाज की बात नहीं रख सकती, दलितों और आदिवासियों की बात नहीं रख सकती तो मेरे इस हाउस में रहने का अधिकार नहीं है, इसलिए मैंने राज्य सभा से इस्तीफ़ा देने का फैसला लिया है.




