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    91 साल में पहली बार आतंक के गढ़ कश्मीर में RSS की मीटिंग , दी सीधी चुनौती !

    अलगाववादियों को संदेश देगा RSS, जम्मू में पहली बार होगी वार्षिक मीटिंग..

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    जम्मू-कश्मीर को अशांत करने के पीछे सिर्फ और सिर्फ पाकिस्तान का हाथ है, पाक की तरफ से हो रही आतंकवादी घुसबैठ ने पूरे भारत को परेशान कर रखा है. इसी के चलते आरएसएस पहली बार जम्मू-कश्मीर में वार्षिक समीक्षा बैठक का आयोजन करने जा रहा है. यह वार्षिक समीक्षा बैठक इसी साल 18 से 20 जुलाई के बीच होगी. संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य ने इसकी पुष्टि की है. इस मीटिंग में आरएसएस चीफ समेत कई दिग्गज नेता भी शामिल होंगे.

    बता दे कि मीटिंग का उद्देश्य अलगाववादियों को ये संदेश देना है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और इसे बचाने के लिए भारत का हर एक नागरिक एकजुट होकर पाकिस्तानी आतंकवादियों का सामना कर सकता है.
    कई बड़े नाम होंगे शामिल :

    आपको बता दे कि 18 से 20 जुलाई को आयोजित होने वाली इस बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और विहिप के नेता हिस्सा लेंगे. इनके साथ-साथ केंद्रीय मंत्रिमंडल से भी कई लोगों के पहुंचे की संभावना व्यक्त की जा रही है.
    बैठक में इन बातों पर होगी चर्चा :


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    मीडिया से बात करते हुए मनमोहन वैद्य ने बताया है कि इस बैठक में प्रांत प्रचारकों के कार्यो और गतिविधियों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया जाता है और बैठक में कोई बड़ा फैसला नहीं लिया जाएगा, बल्कि उन मुद्दों पर ही चर्चा होगी जिनका देश सामना कर रहा है. इस बैठक में जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजी और सीआरपीएफ जवानों पर हमले की घटनाओं पर विचार-विमर्श किया जा सकता है. साथ ही उन्हें रोकने के लिए कौन से कदम उठाने चाहिए ये भी चर्चा का विषय है.
    90 वर्ष बाद आई इस प्रदेश की याद :
    RSS की स्थापना 1925 में हुई थी और आज संघ 91 वर्ष का हो चुका है. लेकिन बदलते हालातों को देखते हुए संघ ने जम्मू-कश्मीर में बैठक का आयोजन किया है. यह इनकी पहली बैठक होगी.

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    बताते चले कि अलगाववादी ताकतें देश विरोधी ताकतों को बढ़ावा दे रही हैं, कश्मीर में लगातार पत्थरबाजी और सेना पर हमले की घटनाएं लगातार बढ़ रही है. ऐसे में कश्मीर घाटी में अलगाववादियों को यह संदेश देने के लिए बैठक का आयोजन किया जाएगा कि कश्मीर भारत का हिस्सा ही नहीं है बल्कि उसका ताज भी है. इस पर आंच भी आई तो पाक को बर्बाद होने से चीन तो क्या दुनिया का कोई देश नहीं रोक सकता है. बैठक में पथराव और सीआरपीएफ जवानों पर हमले की घटनाओं पर चर्चा हो सकती है.

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