भारत-पाकिस्तान बंटवारे का पूरा सच,जो आपको कभी किसी किताब में नही बताया गया होगा
भारत की आजादी को लेकर के अक्सर कह दिया जाता है कि इस देश को गांधी जी ने आजाद करवाया था और उनके भारत छोडो आन्दोलन जैसे पुलिंदे बताकर के हिस्ट्री खत्म कर दी जाती है लेकिन असल में इसकी हकीकत कुछ और ही है ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री जब 1955 में भारत आये थे तब भी उन्होंने कहा था कि हमने भारत गांधी की वजह से नही बल्कि आईएनए की वजह से छोड़ा, द्वितीय विश्व युद्ध में भारतीयों को सेना में इस्तेमाल किया गया जिसके दौरान सुभाष चन्द्र बोस ने उन्हें अपने साथ करके इंडियन नेशनल आर्मी का गठन किया।
Source: roots.sg
जुलाई 1947 में इंडियन इन्डिपेंडेंस एक्ट पास किया गया और अगस्त में दोनों देशो को आजाद करने से पहले अंग्रेजो ने जिन्ना की मदद से हिन्दुस्तान को दो टुकडो में बाँट दिया। जिसमे हिन्दुओ के लिए हिन्दुस्तान और मुस्लिमो के लिए पाकिस्तान बना जो कि आज भी मौजूद है। इसके विभाजन के लिए रेडक्लिफ नाम के भूगोलविद की मदद ली गयी जिसके ही नाम पर आज रेडक्लिफ सीमा रेखा जानी जाती है विभाजन के दौरान कई हत्याए हुई कई रेप हुए लूटपाट हुई जिसके चलते दोनों ओर के लोग अपने अपने धर्म के आधार पर मिले देश की ओर पलायन करने के लिए मजबूर हुए।
इसके बाद भी अंग्रेजो ने पाक को 51 करोड़ रूपये देने को कहा जिसे देने से भारत ने मना कर दिया लेकिन गांधी ने अपनी जिद के करके ये पैसे दिलवाए ये वो गांधी है। जिनका योगदान उस समय आजादी में उतना ही था जितना आज अन्ना हजारे का भ्रष्टाचार को उखाड़ फेंकने में है उनकी भारत छोडो मुहीम 1942 में ही फेल हो चुकी थी।
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इंडियन नेशनल आर्मी ने लगातार शसस्त्र विद्रोह करने शुरू किये और विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटेन की हालत इतनी बुरी हो चुकी थी कि वो भारत को संभाल पाने की हालत में भी नही थी इसलिए फैसला लिया गया कि अब भारत को आजाद कर दिया जाए।loading...
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जुलाई 1947 में इंडियन इन्डिपेंडेंस एक्ट पास किया गया और अगस्त में दोनों देशो को आजाद करने से पहले अंग्रेजो ने जिन्ना की मदद से हिन्दुस्तान को दो टुकडो में बाँट दिया। जिसमे हिन्दुओ के लिए हिन्दुस्तान और मुस्लिमो के लिए पाकिस्तान बना जो कि आज भी मौजूद है। इसके विभाजन के लिए रेडक्लिफ नाम के भूगोलविद की मदद ली गयी जिसके ही नाम पर आज रेडक्लिफ सीमा रेखा जानी जाती है विभाजन के दौरान कई हत्याए हुई कई रेप हुए लूटपाट हुई जिसके चलते दोनों ओर के लोग अपने अपने धर्म के आधार पर मिले देश की ओर पलायन करने के लिए मजबूर हुए।
इसके बाद भी अंग्रेजो ने पाक को 51 करोड़ रूपये देने को कहा जिसे देने से भारत ने मना कर दिया लेकिन गांधी ने अपनी जिद के करके ये पैसे दिलवाए ये वो गांधी है। जिनका योगदान उस समय आजादी में उतना ही था जितना आज अन्ना हजारे का भ्रष्टाचार को उखाड़ फेंकने में है उनकी भारत छोडो मुहीम 1942 में ही फेल हो चुकी थी।
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