ये है फर्क : मनमोहन को कोई पूछता तक नहीं था, और अब मोदी से बात किये बिना कोई रह नहीं पाता !
अक्सर कहा जाता है की तस्वीरें झूठ नहीं बोलती
हालाँकि आजकल फोटोशॉप का जमाना है, पर ऊपर की चारों तस्वीरें बिलकुल असली है, और गूगल पर भी मौजूद है, खैर
मनमोहन सिंह भी इसी भारत के प्रधानमंत्री थे, और नरेंद्र मोदी भी इसी भारत के प्रधानमंत्री हैं
मोदी भी विदेशी दौरों पर जाते है, कार्यक्रमों में हिस्सा लेते है
मनमोहन भी विदेशी दौरों पर जाते थे, और कार्यक्रमों में हिस्सा लेते थे
मनमोहन सिंह की तस्वीरें है, 2011 की
और नरेंद्र मोदी की तस्वीरें हैं 2017
आप देख सकते हैं मनमोहन सिंह को कोई भी विदेशी नेता भाव नहीं देता था, क्यूंकि सभी जानते थे ये शख्स खुद कुछ नहीं कर सकता, एक रोबोट है, दूसरे की हाथों की कठपुतली है
चूँकि सत्ता तो एंटोनिया मियानो उर्फ़ सोनिया गाँधी चलाया करती थी, इसलिए मनमोहन सिंह को विदेशों क्या इसी देश में लोग भाव नहीं देते थे
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मनमोहन की रैली में 200 लोग भी आ जाये तो बड़ी बात हुआ करती थी, खैर
अब आप नरेंद्र मोदी की तस्वीरों को भी देख सकते है, सभी नेता नरेंद्र मोदी से बात करना चाहते है, उनको पता है ये शख्स वर्ल्ड लीडर है
यही फर्क है मैडम के गुलाम मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी में
और सच में 2004 से लेकर 2014 का काल भारत के लिए अत्यंत पीड़ादायक भी रहा
हालाँकि आजकल फोटोशॉप का जमाना है, पर ऊपर की चारों तस्वीरें बिलकुल असली है, और गूगल पर भी मौजूद है, खैर
मनमोहन सिंह भी इसी भारत के प्रधानमंत्री थे, और नरेंद्र मोदी भी इसी भारत के प्रधानमंत्री हैं
मोदी भी विदेशी दौरों पर जाते है, कार्यक्रमों में हिस्सा लेते है
मनमोहन भी विदेशी दौरों पर जाते थे, और कार्यक्रमों में हिस्सा लेते थे
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पर दोनों को विदेशों में क्या भाव मिलता था ये आप ऊपर की तस्वीरों में देख सकते हैमनमोहन सिंह की तस्वीरें है, 2011 की
और नरेंद्र मोदी की तस्वीरें हैं 2017
आप देख सकते हैं मनमोहन सिंह को कोई भी विदेशी नेता भाव नहीं देता था, क्यूंकि सभी जानते थे ये शख्स खुद कुछ नहीं कर सकता, एक रोबोट है, दूसरे की हाथों की कठपुतली है
चूँकि सत्ता तो एंटोनिया मियानो उर्फ़ सोनिया गाँधी चलाया करती थी, इसलिए मनमोहन सिंह को विदेशों क्या इसी देश में लोग भाव नहीं देते थे
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मनमोहन की रैली में 200 लोग भी आ जाये तो बड़ी बात हुआ करती थी, खैर
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यही फर्क है मैडम के गुलाम मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी में
और सच में 2004 से लेकर 2014 का काल भारत के लिए अत्यंत पीड़ादायक भी रहा
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