बड़ी-खबर: 2 करोड़ उपद्रवी बंगलादेशी मुसलमानों को भारत से बाहर निकालेगी मोदी सरकार
मोदी जी आने वाले दिनों में सेकूलरों को पीड़ा देने वाला एक और ज़बरदस्त काम करने वाले हैं , क्यूँकि भारतीय अधिकारी भारत में अवैध रूप से भारत में रह रहे बांग्लादेशियों की रिपोर्ट तैयार करने में जुट गये हैं आने वाले दिन भारत के लिए और भी अच्छे और मुस्लिम वोट बैंक पर टिके नेताओं के लिए बेहद बुरे हो सकते हैं ।
देश में भयंकर तरीक़े से नेताओं , अवॉर्ड वापसी वालों और तथाकथित सहिस्नु मीडिया वालों का विधवा विलाप दोबारा शुरू होने वाला है । हम आपको पहले ही बता रहे हैं कि अवैध बांग्लादेशियों के बचाव के लिए अजीब अजीब तर्क गढ़ें जाएँगे । केजरीवाल कहेंगे कि मोदी बांग्लादेशियों की आड़ में मुसलमानों के पीछे हैं । कोंग्रेस वाले कहेंगे यहाँ कुछ पाकिस्तानी हिंदू भी हैं उनको भी निकालों ।
ममता बनर्जी तो बुरी तरह से तड़पेंगी क्यूँकि उनका तो वोट बैंक ही बंगलादेशी मुस्लिम हैं सबसे ज़्यादा पीड़ा उन्ही को होने वाली है । आपको पता ही है बंगलादेशी मुस्लिमों की वजह से काफ़ी जगह हिंदू अलपसंख्यक हो चुके हैं । भारतियों के हाथ से रोज़गार छिन चुके हैं आख़िर भारत कोई धर्मशाला तो है कि कोई भी यहाँ अवैध रूप से घुसे और आकर रहने लगे । 2013 में आयी UN की रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत में 320 लाख बंगला देशी मुसलमान रहते हैं ।
भारतीय अधिकारी इन बंगला देशी मुसलमानों को निकाल बाहर करने के लिए जो अभियान चला रहे हैं उसका नाम हैं detect-delete-deport । बड़े पैमाने पर बंगलादेशी मुस्लिमों के साथ आतंकवादी संघटन भी भारत में पैर पसारते जा रहे हैं इसलिए भारतियों अधिकारियों के सामने उनसे निपटने की भी बड़ी चुनोती है ।
अब देश की सुरक्षा को दाव पर लगाकर यहाँ रह रहे बंगलादेशी मुसलमानों को संरक्षण देना कहाँ तक उचित हैं ? लेकिन वोट बैंक की लालची पार्टियों दशकों से यही करती आ रही हैं अकेले दिल्ली में बड़े पैमाने पर बंगला देशीयों ने पैठ जमा रखी है पर वोट बैंक के लालच में नेता लोग इस पर आवाज़ नहीं उठाते । एक रिपोर्ट के अनुसार ये बंगलादेशी मुस्लिम बेहद हिंसक होते हैं और भारत में हो रहे 20 %अपराधों में इनका हाथ की बात सामने आयी है । क्या कुछ नेताओं के लिए मुसलमानों का वोट बैंक इतना महतवपूर्ण हो गया है कि उन्होंने भारतीय मुसलमानों के अस्तित्व को भी बंगलादेशीयों की वजह से दाँव पर लगा दिया है ।
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देश में भयंकर तरीक़े से नेताओं , अवॉर्ड वापसी वालों और तथाकथित सहिस्नु मीडिया वालों का विधवा विलाप दोबारा शुरू होने वाला है । हम आपको पहले ही बता रहे हैं कि अवैध बांग्लादेशियों के बचाव के लिए अजीब अजीब तर्क गढ़ें जाएँगे । केजरीवाल कहेंगे कि मोदी बांग्लादेशियों की आड़ में मुसलमानों के पीछे हैं । कोंग्रेस वाले कहेंगे यहाँ कुछ पाकिस्तानी हिंदू भी हैं उनको भी निकालों ।
ममता बनर्जी तो बुरी तरह से तड़पेंगी क्यूँकि उनका तो वोट बैंक ही बंगलादेशी मुस्लिम हैं सबसे ज़्यादा पीड़ा उन्ही को होने वाली है । आपको पता ही है बंगलादेशी मुस्लिमों की वजह से काफ़ी जगह हिंदू अलपसंख्यक हो चुके हैं । भारतियों के हाथ से रोज़गार छिन चुके हैं आख़िर भारत कोई धर्मशाला तो है कि कोई भी यहाँ अवैध रूप से घुसे और आकर रहने लगे । 2013 में आयी UN की रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत में 320 लाख बंगला देशी मुसलमान रहते हैं ।
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भारतीय अधिकारी इन बंगला देशी मुसलमानों को निकाल बाहर करने के लिए जो अभियान चला रहे हैं उसका नाम हैं detect-delete-deport । बड़े पैमाने पर बंगलादेशी मुस्लिमों के साथ आतंकवादी संघटन भी भारत में पैर पसारते जा रहे हैं इसलिए भारतियों अधिकारियों के सामने उनसे निपटने की भी बड़ी चुनोती है ।
अब देश की सुरक्षा को दाव पर लगाकर यहाँ रह रहे बंगलादेशी मुसलमानों को संरक्षण देना कहाँ तक उचित हैं ? लेकिन वोट बैंक की लालची पार्टियों दशकों से यही करती आ रही हैं अकेले दिल्ली में बड़े पैमाने पर बंगला देशीयों ने पैठ जमा रखी है पर वोट बैंक के लालच में नेता लोग इस पर आवाज़ नहीं उठाते । एक रिपोर्ट के अनुसार ये बंगलादेशी मुस्लिम बेहद हिंसक होते हैं और भारत में हो रहे 20 %अपराधों में इनका हाथ की बात सामने आयी है । क्या कुछ नेताओं के लिए मुसलमानों का वोट बैंक इतना महतवपूर्ण हो गया है कि उन्होंने भारतीय मुसलमानों के अस्तित्व को भी बंगलादेशीयों की वजह से दाँव पर लगा दिया है ।
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