पश्चिमी यूपी के पांच विवादित नेता जिन्होंने बदल दिए सियासी समीकरण
यूपी के चुनावी दंगल में पहले चरण के लिए सियासी बिसात बिछ चुकी है. पश्चिमी यूपी में 15 जिलों की 73 विधानसभा सीटों पर 11 फरवरी को मतदान होना है.
इस चरण में तकरीबन साढ़े तीन साल पहले सांप्रदायिक दंगों का दंश झेल चुके मुज़फ़्फ़रनगर और शामली ज़िले भी शामिल हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान ध्रुवीकरकण के माहौल में हुए चुनाव में बीजेपी ने इलाक़े की सभी सीटें जीती थीं. इस बार के चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन, बीएसपी, बीजेपी के साथ ही चौधरी अजित सिंह की अगुवाई वाली राष्ट्रीय लोकदल के लिए भी परीक्षा की घड़ी है.ध्रुवीकरण की बिसात बिछाने में नेताओं के विवादित बयानों की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता. इस बार भी चुनाव प्रचार के दौरान आपत्तिजनक शब्दावली और बयानों का जमकर इस्तेमाल हुआ है. एक नज़र पश्चिमी यूपी के पांच विवादित नेताओं पर:
आज़म ख़ान
फाइल फोटो
आज़म ख़ान समाजवादी पार्टी का सबसे बड़ा मुस्लिम चेहरा हैं. 1980 में पहली बार रामपुर से विधायक बने. आठ बार रामपुर से विधायक रह चुके आज़म केवल एक बार 1996 के विधानसभा चुनाव में हारे हैं. सूबे के लोक निर्माण और संसदीय कार्यमंत्री का ओहदा उनके पास है. रामपुर की स्वारटांडा सीट से इस बार उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म भी सपा के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं.
हालांकि आज़म ख़ान अपने विवादित बयान और तंज कसने के लिए भी जाने जाते हैं. मुज़फ़्फ़रनगर में सांप्रदायिक दंगों की पृष्ठभूमि को लेकर बीजेपी ने आरोप लगाए कि आज़म के दबाव की वजह से पुलिस ने एकतरफ़ा कार्रवाई की, जिससे वहां दंगे भड़के. वहीं आज़म इसके लिए आरएसएस और बीजेपी को जिम्मेदार ठहराते रहे हैं. एक टीवी चैनल के स्टिंग में भी आज़म को कठघरे में खड़ा किया गया. हालांकि इसकी सत्यता प्रमाणित नहीं हो सकी.
इस बार के चुनाव में आज़म ख़ान का एक बयान काफ़ी चर्चित रहा है. रामपुर की चुनावी सभा में आज़म ने कहा कि 131 करोड़ लोगों का बादशाह लखनऊ के रामलीला मैदान में रावण का पुतला फूंकता है, लेकिन वह ये भूल जाता है कि सबसे बड़ा रावण दिल्ली में रहता है, लखनऊ में नहीं. आज़म के इस बयान को पीएम मोदी पर तंज माना गया.
संगीत सोम
फेसबुक
संगीत सोम को अगर पश्चिमी यूपी का सबसे विवादित चेहरा कहा जाए, तो शायद ग़लत नहीं होगा. मेरठ की सरधना सीट से संगीत सोम भारतीय जनता पार्टी के विधायक हैं. उनके ख़िलाफ समाजवादी पार्टी ने अतुल प्रधान को उतारा है. 2009 में संगीत सोम मुज़फ़्फ़रनगर सीट से ही लोकसभा का चुनाव लड़ चुके हैं.
मुज़फ़्फ़रनगर दंगों में अभियुक्त संगीत सोम पर सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल करके समुदाय विशेष के लोगों को भड़काने का आरोप लगा. 2013 में हुए दंगों के बाद उनके भड़काऊ भाषण का वीडियो भी सामने आया था. संगीत सोम लगातार वेस्ट यूपी की सियासत को गरमाते रहते हैं.
मुजफ्फरनर दंगों में संगीत सोम की भूमिका कठघरे में है. उन्हें कवाल कांड का फर्जी वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के मामले में गिरफ्तार भी किया गया था. मुज़फ़्फ़रनगर दंगों की कथित पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म शोरगुल को वेस्ट यूपी में रिलीज न होने देने की धमकी दी थी. इस वजह से फिल्म वेस्ट यूपी में नहीं प्रदर्शित हो सकी. फिल्म में जिमी शेरगिल का रोल संगीत सोम से प्रेरित बताया जा रहा था.
पिछले साल 17 जून को संगीत सोम ने शामली जिले के कैराना में कथित पलायन को लेकर निर्भय यात्रा निकालने का एलान किया था, जिससे इलाक़े में सांप्रदायिक तनाव का ख़तरा बढ़ गया था. पुलिस की सख्ती के चलते सोम को निर्भय यात्रा स्थगित करनी पड़ी थी.
सुरेश राणा
फाइल फोटो
पश्चिमी यूपी की राजनीति में एक और विवादित चेहरा है सुरेश राणा का. राणा मुज़फ़्फ़रनगर ज़िले से सटे शामली जिले की थाना भवन सीट से बीजेपी विधायक हैं. इस बार भी पार्टी ने उनके चेहरे पर ही भरोसा जताया है.
सुरेश राणा 2013 से ही विवादों में घिरे रहे हैं. मुज़फ्फ़रनगर ज़िले के मंगला मंदौड़ में हुई महापंचायत में भड़काऊ भाषण देने के आरोप में उन्हें गिरफ्तार किया गया था. उनका नाम मुजफ्फरनगर दंगों के मुख्य अभियुक्तों में से एक था. तभी से उनकी छवि एक स्थानीय कट्टर हिन्दुत्ववादी नेता की बन गई है जो बढ़ती ही जा रही है.
सुरेश राणा जब भी चुनावी सभाओं को संबोधित करते हैं, तो ज़हरीली बयानबाज़ी उनकी प्राथमिकता में होती है. पश्चिमी यूपी के चुनावी माहौल में भावनाएं भड़काने वाले नेताओं में राणा की गिनती होती है. यकीन न हो तो उनका हाल का ये बयान देखिए.
एक चुनावी सभा में सुरेश राणा ने कहा, "यदि मैदान मार दिया तो कैराना में, देवबंद में, मुरादाबाद में कर्फ्यू लग जाएगा मित्रों. भारत माता की जय लगाते हुए शामली से थाना भवन तक जुलूस होगा. सारे भाई-बहनों का आदर करते हुए और हर-हर महादेव का नारा लगाते हुए भगवा लहराए



