गाँधी नेहरू का जन्मदिवस होता तो राष्ट्रीय छुट्टी होती कार्यक्रम होते, भगत सिंह को कौन पूछने वाला !
गाँधी नेहरू का जन्मदिवस होता तो राष्ट्रीय छुट्टी होती कार्यक्रम होते, भगत सिंह को कौन पूछने वाला !
ये बात हम किसी कटाक्ष के रूप में नहीं कह रहे
बल्कि यही हकीकत है
आज है 27 सितम्बर, आज भगत सिंह जिन्होंने मात्र 23 साल की उम्र में भारत के लिए अपनी जान दे दी
उनका जन्मदिवस है
पर हम दावे के साथ कह सकते है की, अधिकतर भारतीय लोगों को न ये तारीख याद है और न ही भगत सिंह का जन्मदिवस
इस देश का यही हाल है, जो सम्मान के असली हकदार होते है
वो गुमनाम हो जाते है, और जो दलाली करते है वो महान हो जाते है
2 अक्टूबर होता तो राष्ट्रीय छुट्टी होती, कार्यक्रम चलाये जा रहे होते
नेहरू का जन्मदिवस होता तो बाल दिवस मनाया जा रहा होता, पर 27 सितम्बर इसे कौन पूछने वाला है
अंग्रेजो ने भारतीयों पर जुल्म किया, भगत सिंह ने उनसे लड़ाई लड़ी
अंग्रेजो ने खुद के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले को फांसी दी
गाँधी नेहरू न जाने अंग्रेजों से कैसे लड़ रहे थे, की अंग्रेज उनके साथ बैठकर चाय पिया करते थे
न जाने कौन से कवच कुण्डल गाँधी नेहरू जैसे लोगों ने पहने थे की अंग्रेज उन्हें 1 लाठी भी नहीं मारते थे, हां अपनी महिलाओं के साथ उनको सम्बन्ध बनाने देते थे
हमने पहले ही कहा की इस देश का यही हाल है, सम्मान के असली हकदार गुमनाम है, और दलाली करने वाले महान है, तभी 27 सितम्बर किसी को नहीं याद है
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ये बात हम किसी कटाक्ष के रूप में नहीं कह रहे
बल्कि यही हकीकत है
आज है 27 सितम्बर, आज भगत सिंह जिन्होंने मात्र 23 साल की उम्र में भारत के लिए अपनी जान दे दी
उनका जन्मदिवस है
पर हम दावे के साथ कह सकते है की, अधिकतर भारतीय लोगों को न ये तारीख याद है और न ही भगत सिंह का जन्मदिवस
इस देश का यही हाल है, जो सम्मान के असली हकदार होते है
वो गुमनाम हो जाते है, और जो दलाली करते है वो महान हो जाते है
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नेहरू का जन्मदिवस होता तो बाल दिवस मनाया जा रहा होता, पर 27 सितम्बर इसे कौन पूछने वाला है
अंग्रेजो ने भारतीयों पर जुल्म किया, भगत सिंह ने उनसे लड़ाई लड़ी
अंग्रेजो ने खुद के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले को फांसी दी
गाँधी नेहरू न जाने अंग्रेजों से कैसे लड़ रहे थे, की अंग्रेज उनके साथ बैठकर चाय पिया करते थे
न जाने कौन से कवच कुण्डल गाँधी नेहरू जैसे लोगों ने पहने थे की अंग्रेज उन्हें 1 लाठी भी नहीं मारते थे, हां अपनी महिलाओं के साथ उनको सम्बन्ध बनाने देते थे
हमने पहले ही कहा की इस देश का यही हाल है, सम्मान के असली हकदार गुमनाम है, और दलाली करने वाले महान है, तभी 27 सितम्बर किसी को नहीं याद है
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