आप मैच में व्यस्त थे, वहां मोदी सरकार ने बुज़ुर्ग के लिया बनाया तगड़ा कानून, ख़ुशी से झूम उठे लोग
नई दिल्ली : तेज़ी से प्रगति करते आधुनिक युग में हमारे देश के कुछ युवा अपने माता-पिता के बुज़ुर्ग होने पर साथ छोड़ देते हैं. जबकि यही माता-पिता बचपन में ऊँगली पकड़ कर चलना सिखाते हैं. ऐसे में बढ़ते वृद्ध आश्रम की संख्या भी सोचने को मज़बूर करती है और जब कोई हल नहीं निकलता तब सरकार को नियम बनाने पड़ते हैं.
बीजेपी सरकार लेकर आयी ज़बरदस्त कानून
अभी-अभी बहुत बड़ी खबर असाम से आ रही है जहाँ बीजेपी सरकार ने एक बेहद ही एक अनूठा और नया बिल पास किया है. जिसके मुताबिक अगर किसी भी सरकारी कर्मचारी ने अपने बुजुर्ग मां-बाप या विकलांग भाई-बहन (सहोदर) की देख-रेख नहीं की तो उसकी सैलरी से 10 से 15 फीसदी की कटौती कर ली जाएगी और रकम पीड़ितों के खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी. दरअसल काफी वक़्त से ये शिकायत आ रही थी कि अच्छा खासा मोटा पैसा कमाने वाले भी अपने बुज़ुर्ग माता-पिता को वृद्ध आश्रम छोड़ देते हैं.
इस बिल का का नाम रखा गया है ‘प्रणाम’ (पैरेन्ट्स रेस्पॉन्सिबिलिटी एंड नॉर्म्स फॉर अकाउंटेबिलिटी एंड मॉनिटरिंग) नाम का यह बिल शुक्रवार (15 सितंबर) को असम विधानसभा में पास कर दिया गया है. इसके अनुसार वंचित माता-पिता को सिर्फ लिखित रूप में एक शिकायत भर देनी होगी. उसके बाद 90 दिन के अंदर शिकायत की जांच कर समस्या का समाधान हो जाएगा.
और तो और अब इसके बाद में सांसदों, विधायकों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और असम में संचालित निजी कंपनियों के कर्मचारियों के लिए भी एक ऐसा ही विधेयक पेश किया जाएगा.
पीएम मोदी के जन्मदिन पर राज्य को सबसे बढ़िया तोहफा
असाम भाजपा सरकार में वित्त मंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि “इस कानून को बनाने का लक्ष्य यह है कि कोई भी बुजुर्ग माता-पिता अपने जीवन के अंतिम दिन के अकेलेपन में किसी वृद्धाश्रम में ना गुजार दें बल्कि वो इन लम्हों को अपने बच्चों के साथ गुजार सकें”
आपको बता दें यह अपने आप में बिलकुल ही अलग कानून है जिसे असाम भाजपा सरकार लेकर आयी है. अब तक किसी और राज्य में ऐसा कानून नहीं बना है. यही नहीं अब भजपा सरकार ऐसा ही कानून प्राइवेट नौकरियों वालों के लिए भी जल्द लाएगी.
असाम में इस कानून के आते ही सोशल मीडिया पर लोग जमकर तारीफ करने लगे. जिसमें कई लोगों ने इस कानून को पूरे देश में लागू करवाने कि बात कही. तो कई लोगों ने कहा कि यह कानून तो सबसे ज़्यादा ज़रूरी है सिर्फ सरकारी कर्मचारी ही नहीं देश के हर नागरिक के ऊपर यह कानून लागू किया जाना चाहिए.
Source-DDbharti.in
बीजेपी सरकार लेकर आयी ज़बरदस्त कानून
अभी-अभी बहुत बड़ी खबर असाम से आ रही है जहाँ बीजेपी सरकार ने एक बेहद ही एक अनूठा और नया बिल पास किया है. जिसके मुताबिक अगर किसी भी सरकारी कर्मचारी ने अपने बुजुर्ग मां-बाप या विकलांग भाई-बहन (सहोदर) की देख-रेख नहीं की तो उसकी सैलरी से 10 से 15 फीसदी की कटौती कर ली जाएगी और रकम पीड़ितों के खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी. दरअसल काफी वक़्त से ये शिकायत आ रही थी कि अच्छा खासा मोटा पैसा कमाने वाले भी अपने बुज़ुर्ग माता-पिता को वृद्ध आश्रम छोड़ देते हैं.
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इस बिल का का नाम रखा गया है ‘प्रणाम’ (पैरेन्ट्स रेस्पॉन्सिबिलिटी एंड नॉर्म्स फॉर अकाउंटेबिलिटी एंड मॉनिटरिंग) नाम का यह बिल शुक्रवार (15 सितंबर) को असम विधानसभा में पास कर दिया गया है. इसके अनुसार वंचित माता-पिता को सिर्फ लिखित रूप में एक शिकायत भर देनी होगी. उसके बाद 90 दिन के अंदर शिकायत की जांच कर समस्या का समाधान हो जाएगा.
और तो और अब इसके बाद में सांसदों, विधायकों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और असम में संचालित निजी कंपनियों के कर्मचारियों के लिए भी एक ऐसा ही विधेयक पेश किया जाएगा.
पीएम मोदी के जन्मदिन पर राज्य को सबसे बढ़िया तोहफा
असाम भाजपा सरकार में वित्त मंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि “इस कानून को बनाने का लक्ष्य यह है कि कोई भी बुजुर्ग माता-पिता अपने जीवन के अंतिम दिन के अकेलेपन में किसी वृद्धाश्रम में ना गुजार दें बल्कि वो इन लम्हों को अपने बच्चों के साथ गुजार सकें”
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आपको बता दें यह अपने आप में बिलकुल ही अलग कानून है जिसे असाम भाजपा सरकार लेकर आयी है. अब तक किसी और राज्य में ऐसा कानून नहीं बना है. यही नहीं अब भजपा सरकार ऐसा ही कानून प्राइवेट नौकरियों वालों के लिए भी जल्द लाएगी.
असाम में इस कानून के आते ही सोशल मीडिया पर लोग जमकर तारीफ करने लगे. जिसमें कई लोगों ने इस कानून को पूरे देश में लागू करवाने कि बात कही. तो कई लोगों ने कहा कि यह कानून तो सबसे ज़्यादा ज़रूरी है सिर्फ सरकारी कर्मचारी ही नहीं देश के हर नागरिक के ऊपर यह कानून लागू किया जाना चाहिए.
Source-DDbharti.in




