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    कल इस्तीफ़ा देंगे योगी आदित्यनाथ, अब कायदे से संभालेंगे नयी जिम्मेदारी, लेंगे नए पद की शपथ !

    लखनऊ : यूपी में प्रचंड बहुमत से जीत हासिल करके पीएम मोदी ने योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाया था. उनके इस फैसले से विपक्ष हक्का-बक्का रह गया था. योगी सीएम बन तो गए थे लेकिन अब तक वो एक लोकसभा सांसद थे और अस्थायी रूप से मुख्यमंत्री थे, क्योंकि एक मुख्यमंत्री के लिए विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य होना जरूरी होता है. कोई भी मुख्यमंत्री अगर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य नहीं है तो 6 महीनें से ज्यादा मुख्यमंत्री पद पर नहीं बना रह सकता.


    योगी आदित्यनाथ अब यूपी विधान परिषद का चुनाव जीतकर एमएलसी बन गए हैं और कल वो इस नए पद की शपथ लेकर अपने पुराने पद यानी लोकसभा सांसद पद से इस्तीफ़ा दे देंगे और कायदे से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल लेंगे. अब उनके लिए परेशानी की कोई बात नहीं है क्योंकि अब वो एमएलसी बन गए हैं. शुक्रवार को विधान परिषद के लिए वो निर्विरोध चुन लिए गए. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राज्य निर्वाचन आयोग ने जीत का प्रमाणपत्र जारी कर दिया है, जिसके बाद अब योगी लोकसभा सांसद पद से इस्तीफ़ा दे देंगे.

    आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनके तीनो साथियों ने विधान परिषद का चुनाव जीत लिया है. अब योगी आदित्यनाथ, उनके दोनों उप-मुख्यमंत्री और मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह एमएलसी बन गए हैं. अब अगले पांच सालों तक योगी सत्ता बिना किसी परेशान के संभालेंगे और पिछली अखिलेश सरकार के भ्रष्टाचार को उजागर करते हुए विकास कार्य करते जाएंगे.


    राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी प्रमाणपत्र
    विधान परिषद् चुनाव में योगी आदित्यनाथ के अलावा उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या, उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा, मंत्री मोहसिन रजा और स्वतंत्रदेव सिंह ने भी विधान परिषद के लिए नामांकन किया था. विधान परिषद की ये पांच सीटें एसपी के 4 और बीएसपी के 1 विधान परिषद सदस्य के इस्तीफे के बाद खाली हुईं थीं. इस्तीफा देकर सीट खाली करने वालों में एसपी के यशवंत सिंह, अशोक वाजपेयी, सरोजिनी अग्रवाल, बुक्कल नवाब और बीएसपी के जयवीर सिंह थे.

    योगी समेत पांचों बीजेपी नेता राज्य विधान मंडल के किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे, लेकिन नियमानुसार मंत्री पद संभालने के 6 महीने में उनका किसी ना किसी सदन का सदस्य बनना जरूरी है. ये समय सीमा 19 सितंबर को खत्म हो रही है.

    योगी आदित्यनाथ तो यशवंत सिंह की रिक्त सीट पर सदन में पहुंचे हैं, इनका कार्यकाल 6 जुलाई 2022 तक है. उप-मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा को डॉ. अशोक बाजपेयी की सीट से विधान परिषद में जाने का मौका मिला है, इनका कार्यकाल 30 जनवरी 2022 तक है. बुक्कल नवाब के इस्तीफा देने से खाली सीट पर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य विधान परिषद पहुंचे हैं, जिनका कार्यकाल छह जुलाई 2022 तक है. जबकि डॉ. सरोजनी अग्रवाल की रिक्त सीट पर परिवहन मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह उच्च सदन पहुँचे हैं, इनका कार्यकाल 30 जनवरी 2022 तक है. इस्तीफ़ा देने वाले चारों लोग समाजवादी पार्टी से विधान परिषद सदस्य थे.
    Source-DDbharti.in

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