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    जहाँ भी रहेंगे, जल्द ही कर देंगे दूसरे धर्म के लोगों को अल्पसंख्यक, फिर दिखाएंगे असली रंग !

    जो लोग रोहिन्यों की असलियत और असली खतरे को नहीं समझ पाए है
    और जो रोहिंग्यों को पीड़ित समझते है
    जबतक ऐसे लोग इनको समझेंगे, रोहिंग्या उनको अल्पसंख्यक कर चुके होंगे, और फिर ऐसे सेकुलरों के पास पलायन या मरने के अलावा कोई चारा ही नहीं होगा

    रोहिंग्या इतनी तेजी से प्रजनन करते है, की इनका मुकाबला जानवर भी नहीं कर सकते
    पीड़ित लोग तेजी से प्रजनन क्यों करेंगे, उनके पास तो खाने, रहने को भी नहीं है, फिर बच्चे क्यों करेंगे

    क्यूंकि जनसँख्या बढ़ाना है, मजहबी उन्माद फैलाना है
    इलाके को इस्लामिक बनाना है
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    जिस लड़की की तस्वीर आप ऊपर देख रहे है ये एक रोहिंग्या महिला है, इसे कायदे से बच्ची कहना चाहिए
    क्यूंकि ये मात्र 14 साल की है, पर हम इसे महिला कह रहे है
    क्यूंकि इसने 14 साल की उम्र में ही 2 बच्चे दे दिए है

    यानि जैसे ही ये 13 की हुई, यानि माँ बनने की योग्यता आयी, इसके समाज के लोगों ने फ़ौरन काम शुरू करते हुए, इसके अंदर से बच्चा निकालना शुरू कर दिया

    इस रोहिंग्या महिला का नाम है सखरा और इसकी उम्र मात्र 14 साल है, बीबीसी में इसकी डाक्यूमेंट्री भी आ चुकी है, इसका शौहर 54 साल का है
    और उसकी कुल 6 बीवियां है, सखरा उसकी 6 बीवियों में से एक है

    अब 14 साल में ही 2 बच्चे दे दिया, सखरा कम से कम अपने जीवन में 15 बच्चे करेगी ही करेगी
    या उस से भी अधिक 20 बच्चे भी मुमकिन
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    आपको याद होगा शाहजहां तो मुमताज़ बेगम के कोख से तबतक बच्चे निकालता रहा जबतक वो मर नहीं गयी, मुमताज़ 14वें बच्चे को जन्म देते हुए प्रसव पीड़ा से मरी थी

    आप इस रोहिंग्या मुस्लिम समाज को सोच को समझने की कोशिश कीजिये
    इनको शरण यानि कल आपके बच्चों की मौत

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