रविवार की देर रात भारतीय सेना ने किया ऐसा ज़ोरदार धमाका, बिछी लाशें देख सहम से गए पत्थरबाज
श्रीनगर : कश्मीर से आतंकवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए सेना ने 150 आतंकियों की लिस्ट बनायीं थी. जिसमें अब तेज़ी से नाम कटते जा रहे हैं. तो वहीँ इन आतंकियों के समर्थक अलगाववादी नेता और पत्थरबाज का भी कई दिनों से हुक्का पानी बंद कर दिया है मोदी सरकार ने. इस बीच बड़ी खबर आयी है कि सेना ने फिर घाटी को आतंकियों के खून से आतंक के साये को धोया है.
फिर गरजा ऑपरेशन आल आउट (पूरा सफाया)
केंद्र में काफी वक़्त के बाद मज़बूत सरकार के आने का ही नतीजा है कि पिछले कई सालों का रिकॉर्ड सेना ने तोड़ दिया है. इस साल अभी तक 147 आतंकवादियों के खून से जाबांज़ सेना ने घाटी पर उनके काले साये को धोया है. यही मोदी सरकार ने ही सेना को 18 साल बाद खतरनाक ऑपरेशन कासो चलाने की खुली छूट दी है . जिसमें 4000 से ज़्यादा जवान और स्पेशल अफसर का ग्रुप साथ ही सीआरपीएफ आतंकियों को चुन चुन के मार रही है.
सेना ने कुलगाम में बिछाई लाशें, सुबह का सूरज भी नहीं देखने को मिला
इसी सिलसिले को बरकरार रखते हुए जम्मू कश्मीर के कुलगाम में सेना को बड़ी कामयाबी मिली है. जिसमें एनकाउंटर में हिज़्बुल संगठन के दो खूंखार आतंकवादी सयार अहमद वानी और दाऊद अहम वानी को मार गिराया है. साथ ही इनके एक अन्य आतंकी ने आत्मसमर्पण कर दिया जिसे जम्मू कश्मीर पुलिस ने जिन्दा पकड़ लिया. हालाँकि सेना ज़िंदा पकड़ने में विश्वास नहीं करती. काफी वक़्त से इन आतंकवादियों की तलाश थी. ज़िंदा पकडे आतंकवादी से सेना को कई अहम् सुराग मिले हैं जिससे कई छुपे हुए आतंकी अड्डों का पता चला है.
हिज़्बुल आतंकी संगठन हो रहा खाली
मारे गए ये आतंकवादियों के पास से भारी मात्रा में गोला बारूद, ढेर सारे कारतूस, AK 47 भी बरामद किये गए हैं. रविवार को देर रात तकरीबन 02.30 बजे 18 बटालियन सीआरपीएफ, 1 आरआर और जम्मू कश्मीर पुलिस के साथ आतंकियों की मुठभेड़ शुरू हुई. देखते ही देखते सेना ने ऑपरेशन आल आउट(पूर्ण सफाया) चलाया और गोलियों और बम धमाकों से इलाका गूंज उठा. जिसमें सिर्फ आतंकियों के चीखने की आवाजें ही गूँज रही थी. खुशखबरी है कि हमारा एक भी जवान घायल नहीं हुआ.
गिरफ्तार आतंकी की पहचान आरिफ सोनी के रूप में हुई है, उसके पास से एक एके-47 और 1 इंसास राइफल बरामद हुई है. लेकिन पुलिस उसकी पहचान आदिल भी बता रही है. वह इस साल मई में आतंकवादी गतिविधियों में शामिल हुआ था. उसने चारों ओर से घेर लिए जाने के बाद आत्मसमर्पण कर दिया. हाल के महीनों में यह पहली घटना है जब किसी आतंकवादी ने मुठभेड़ के दौरान अपने हथियार डाले हैं.
पत्थरबाजों में फैला है सेना का डर
सेना ने बड़े पैमाने पर मोदी सरकार से अनुमति मिलने के बाद ऑपरेशन कासो और ऑपरेशन आल आउट चलाये हुए हैं. जिसके बाद से आतंकियों की जितनी तेज़ी से भर्ती नहीं हो रही उतनी तेज़ी से सेना उनका सफाया कर रही है. अब वक़्त आ गया है कि कश्मीर से आतंकवादियों का नामो निशाँ मिटा दिया जाए. साथ ही अलगावादियों पर ताबड़तोड़ छापेमारी से आतंकियों और पत्थरबाजों को पैसा मिलना बंद हो गया है और देर रात हुए एनकाउंटर में वैसे भी कोई पत्थरबाज अड़चन डालने नहीं पहुँचता. इस डर से ताकि कहीं सेना आतंकी समझकर उन्हें ही जहन्नुम न पंहुचा दे. हाल ही के दिनों में कई पत्थरबाज भी अपना टिकट कटवा चुके हैं.
फिर गरजा ऑपरेशन आल आउट (पूरा सफाया)
केंद्र में काफी वक़्त के बाद मज़बूत सरकार के आने का ही नतीजा है कि पिछले कई सालों का रिकॉर्ड सेना ने तोड़ दिया है. इस साल अभी तक 147 आतंकवादियों के खून से जाबांज़ सेना ने घाटी पर उनके काले साये को धोया है. यही मोदी सरकार ने ही सेना को 18 साल बाद खतरनाक ऑपरेशन कासो चलाने की खुली छूट दी है . जिसमें 4000 से ज़्यादा जवान और स्पेशल अफसर का ग्रुप साथ ही सीआरपीएफ आतंकियों को चुन चुन के मार रही है.
सेना ने कुलगाम में बिछाई लाशें, सुबह का सूरज भी नहीं देखने को मिला
इसी सिलसिले को बरकरार रखते हुए जम्मू कश्मीर के कुलगाम में सेना को बड़ी कामयाबी मिली है. जिसमें एनकाउंटर में हिज़्बुल संगठन के दो खूंखार आतंकवादी सयार अहमद वानी और दाऊद अहम वानी को मार गिराया है. साथ ही इनके एक अन्य आतंकी ने आत्मसमर्पण कर दिया जिसे जम्मू कश्मीर पुलिस ने जिन्दा पकड़ लिया. हालाँकि सेना ज़िंदा पकड़ने में विश्वास नहीं करती. काफी वक़्त से इन आतंकवादियों की तलाश थी. ज़िंदा पकडे आतंकवादी से सेना को कई अहम् सुराग मिले हैं जिससे कई छुपे हुए आतंकी अड्डों का पता चला है.
हिज़्बुल आतंकी संगठन हो रहा खाली
मारे गए ये आतंकवादियों के पास से भारी मात्रा में गोला बारूद, ढेर सारे कारतूस, AK 47 भी बरामद किये गए हैं. रविवार को देर रात तकरीबन 02.30 बजे 18 बटालियन सीआरपीएफ, 1 आरआर और जम्मू कश्मीर पुलिस के साथ आतंकियों की मुठभेड़ शुरू हुई. देखते ही देखते सेना ने ऑपरेशन आल आउट(पूर्ण सफाया) चलाया और गोलियों और बम धमाकों से इलाका गूंज उठा. जिसमें सिर्फ आतंकियों के चीखने की आवाजें ही गूँज रही थी. खुशखबरी है कि हमारा एक भी जवान घायल नहीं हुआ.
गिरफ्तार आतंकी की पहचान आरिफ सोनी के रूप में हुई है, उसके पास से एक एके-47 और 1 इंसास राइफल बरामद हुई है. लेकिन पुलिस उसकी पहचान आदिल भी बता रही है. वह इस साल मई में आतंकवादी गतिविधियों में शामिल हुआ था. उसने चारों ओर से घेर लिए जाने के बाद आत्मसमर्पण कर दिया. हाल के महीनों में यह पहली घटना है जब किसी आतंकवादी ने मुठभेड़ के दौरान अपने हथियार डाले हैं.
पत्थरबाजों में फैला है सेना का डर
सेना ने बड़े पैमाने पर मोदी सरकार से अनुमति मिलने के बाद ऑपरेशन कासो और ऑपरेशन आल आउट चलाये हुए हैं. जिसके बाद से आतंकियों की जितनी तेज़ी से भर्ती नहीं हो रही उतनी तेज़ी से सेना उनका सफाया कर रही है. अब वक़्त आ गया है कि कश्मीर से आतंकवादियों का नामो निशाँ मिटा दिया जाए. साथ ही अलगावादियों पर ताबड़तोड़ छापेमारी से आतंकियों और पत्थरबाजों को पैसा मिलना बंद हो गया है और देर रात हुए एनकाउंटर में वैसे भी कोई पत्थरबाज अड़चन डालने नहीं पहुँचता. इस डर से ताकि कहीं सेना आतंकी समझकर उन्हें ही जहन्नुम न पंहुचा दे. हाल ही के दिनों में कई पत्थरबाज भी अपना टिकट कटवा चुके हैं.




