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    भारत से पाकिस्तान को मिलने वाले पानी पर मोदी सरकार का बड़ा एक्शन, पाक किसानों में चीख-पुकार !

    नई दिल्ली : “खून और पानी एक साथ नहीं बाह सकते” ये कहकर पीएम मोदी ने पाकिस्तान को चेतावनी दी थी कि आतंकवाद और सिंधु जल संधि साथ-साथ नहीं चल सकते. पीएम मोदी की ये चेतावनी महज भारत के गुस्साए लोगों को शांत करने के लिए नहीं थी, बल्कि उनका इरादा इस पर अमल करने का भी था. इसी के तहत पीएम मोदी ने अब एक ऐसा कदम उठाया है, जिससे पाकिस्तान की रूह काँप गयी है.

    इंदिरा गांधी नहर से पाक को मिलने वाला पानी बंद !
    मोदी सरकार ने श्रीगंगानगर में इंदिरा गांधी नहर में होने वाला पानी का रिसाव बंद कर दिया है, जिसका पाकिस्तान पिछले कई दशकों से फायदा उठा रहा था. मोदी सरकार ने आखिरकार पाकिस्तान को मिलने वाली इस ‘पानी की आपूर्ति’ को रोक दिया है, जिससे सीमावर्ती इलाकों में पाकिस्तानी किसानों की फसलें बर्बाद होना शुरू हो गयी हैं.

    हाल ही में सरकार ने एक परीक्षण किया और दावा किया है कि पाकिस्तान के किसान जो भारत से मिल रहे इस मुफ्त के पानी का इस्तेमाल कर रहे थे, अब उन्हें ये पानी नहीं मिल रहा है. दरअसल इस नहर में कई जगहों से पानी का रिसाव होता था, पिछली सरकारों ने इसके रख-रखाव व् मरम्मत की ओर ध्यान ही नहीं दिया. जिसके चलते पिछले कई दशकों से इस नहर से रिस-रिस कर भारी मात्रा में पानी सीमा पार पहुंच जाता था और बॉर्डर के निकट बसे भारतीय किसानों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता था, जिससे भारत को करोड़ों का नुक्सान होता था.


    दुनिया की सबसे लम्बी नहर “मरु गंगा” के नाम से मशहूर !
    पाक किसान इसी मुफ्त में मिले पानी का इस्तमाल करके देशी कपास, अमेरिकी कपास, गन्ना, गेहूं और सरसों की खेती कर रहे थे. जब श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ में अत्यधिक वर्षा होती है, तब नदी में पानी का स्तर बढ़ जाता है, लेकिन इंदिरा गांधी नहर में रिसाव के कारण गर्मियों में भी भारत का पानी नदी में चला जाता था और इस पानी से पाक किसान मौज में रहते थे. मगर अब और नहीं.

    आप कांग्रेस की मक्कारी इसी बात से समझ सकते हैं कि “राजस्थान नहर” के नाम से प्रसिद्द इस नहर का नाम कांग्रेस ने बदल कर इंदिरा गांधी के नाम पर रख दिया लेकिन इसके रख-रखाव की ओर ज़रा भी ध्यान नहीं दिया. ये नहर विश्व की सबसे लम्बी (649 किलोमीटर) नहर है और ये “मरु गंगा” के नाम से भी विख्यात है. भारतीय किसानों के लिए ये बेहद महत्वपूर्ण है.

    भारत की मेहनत का फल पाकिस्तान क्यों उठाये ?
    जब पाकिस्तान भारत के खिलाफ आतंकवादी संगठन तैयार कर रहा था, तब भारत अपने किसानों के लिए इस नहर का निर्माण कर रहा था. तो फिर इस नहर का फायदा पाकिस्तान को क्यों होना चाहिए? लेकिन कांग्रेस की छोटी सोच केवल भ्रष्टाचार तक ही चलती है. बहरहाल अब इस नहर के रिसाव बंद होने से भारत के किसानों को पानी की कोई कमी नहीं होगी और पाकिस्तान को ये पहला बड़ा झटका दिया गया है. उसे समझ आ गया है कि मोदी जो कहते हैं, वो करते भी हैं.

    इसके अलावा पीएम मोदी ने कश्मीर में 15 अरब डॉलर के बांधों के निर्माण पर तेजी से काम करने की मंजूरी दी हुई है. वहीँ विश्व बैंक में भी पीएम मोदी की कूटनीति काम कर गयी है और विश्व बैंक ने किशनगंगा-रातले पनबिजली प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए भारत को अनुमति दे दी है. सिंधु जल समझौता भी जवाहरलाल नेहरू की कई बड़ी गलतियों में से एक था. पानी का बंटवारा इस तरह से किया गया ताकि पाकिस्तान को फायदा पहुंचे और जम्मू-कश्मीर के किसान पानी के मोहताज हो जाएँ. दरअसल पाकिस्तान के पक्ष में संधि करके नेहरू ये दिखाना चाहते थे कि, देखो मैं कितने बड़े दिल वाला हूँ, मुझे अपने लोगों से ज्यादा पाकिस्तान की फ़िक्र है.

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