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    ब्रेकिंग- बीएचयू में मच रहे उत्पात का चौंकाने वाला सच आया सामने, वामपंथियों और कांग्रेस में हड़कंप

    वाराणसी : बनारस के बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) में कथित छेड़खानी के विरोध में और अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रही छात्राओं पर पुलिस के लाठीचार्ज पर विवाद अब काफी बढ़ गया है. इस मामले को लेकर अब अखिलेश यादव समेत कोंग्रेसी नेताओं ने बयानबाजी भी शुरू कर दी है. लेकिन अब इस मामले को लेकर बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. इस खबर को पूरा जरूर पढ़ें, सभी जानकारियां सबूतों के साथ दी गयी हैं.

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    किसने किया बीएचयू में दंगल ?
    बताया जा रहा है कि आम आदमी पार्टी के गुंडों ने आकर यूनिवर्सिटी में हंगामा किया. पीड़ित छात्रा को बीएचयू से कोई शिकायत नहीं है. दरअसल सालभर शांत रहने वाली बीएचयू में एकाएक तब हंगामा शुरू हो गया, जब पीएम मोदी बनारस के दौरे पर आये. जिसके बाद विपक्ष ने मौके का फायदा उठाया और मीडिया भी उसके संग हो ली.

    सबने मिलकर टीआरपी की दौड़ में विरोध की ऐसी आंधी चलाई, जिसमे सच पीछे छिप गया. बीएचयू में हो रहे दंगल के दौरान कई फोटोज सामने आयी हैं, जिनमे आम आदमी पार्टी के नेता व् गुंडे साफ़ दिखाई दे रहे हैं. अब सवाल ये है कि ये गुंडे यूनिवर्सिटी में पढ़ते तो हैं नहीं, तो फिर ये वहां क्या करने गए थे. देखिये आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता कपिल मिश्रा का ट्वीट, जिसमे उन्होंने पूरी साजिश की पोल खोली है.

    क्या है पूरी साजिश ?
    दरअसल गुजरात समेत कुल पांच राज्यों में चुनाव होने को हैं. पीएम मोदी का विरोध करने के लिए विपक्ष मुद्दे की तालाश में बैचेन घूम रहा है. पीएम मोदी के विरोध के लिए पहले तो यूनिवर्सिटी में दंगल मचाया गया, छात्रों को आगे करके अपना उल्लू सीधा किया गया और उसके बाद प्रशांत भूषण समेत कई नेताओं ने बाकायदा झूठी ख़बरें चला कर मुद्दे को भड़काने की साजिश रची.

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    दरअसल मोदी सरकार जिस तरह से देश के लिए रोहिंग्या मुस्लिमों को देश से निकालने पर अदि हुई है और साथ ही अवैध बांग्लादेशियों को भी बाहर निकालने की कवायद शुरू की जा चुकी है. उससे कोंग्रेसी और वामपंथी बुरी तरह से बौखलाए हुए हैं. यही लोग तो इनके वोट बैंक हैं और इन्हे सोची समझी रणनीति के तहत देश के अलग-अलग राज्यों में बसाया गया था, इनको निकाल देंगे 2019 से पहले-पहले तो कांग्रेस व् अन्य पार्टियों का क्या होगा.

    एक तो पहले से ही नोटबंदी के कारण सारे काले कुबेर कंगाल हो गए हैं. पैसों से वोट खरीदना बंद हो चुका है. अब बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं को निकालने से तो वोटबैंक पूरी तरह से धवस्त हो जाएगा. आपको बता दें कि सत्ता में आने के बाद से मोदी सरकार भारत में 2 करोड़ 33 लाख फर्जी राशन कार्ड रद्द कर चुकी है. ये फ़र्ज़ी राशन कार्ड भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों के थे. नेताओं ने इनके राशन कार्ड बनवाये थे और बदले में इन्हे वोट देने की सेटिंग थी. इनसे सरकार को हर साल करोड़ों रुपयों का घाटा हो रहा था.

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    रिपोर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा फर्जी राशन कार्ड तो ममता के बंगाल में ही रद्द किये जा चुके हैं. बंगाल में तकरीबन 66 लाख 13 हजार 961 फ़र्ज़ी राशन कार्ड चल रहे थे, जिन्हें रद्द किया जा चुका है. अब जल्द ही सभी अवैध-बांग्लादेशी और रोहिंग्या बाहर होंगे. ऐसे में वामपंथियों, कोंग्रेसियों में छटपटाहट मची हुई है और उसी का फल देखने को मिल रहा है.

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