नेता पर पत्थर पड़े तो लोकतंत्र की हत्या, पर सैनिको को पत्थर मारना "अभिव्यक्ति की आज़ादी" - Jagran 24
राहुल गाँधी कल गुजरात में थे
और साजिश के तहत उनकी गाडी का सीसा तोड़ दिया गया, जिसके बाद राहुल गाँधी और पूरी कांग्रेस बीजेपी के खिलाफ बोल रहे है, बता दें की गुजरात में इसी साल चुनाव भी है और कांग्रेस के पास मुद्दों का अकाल है
चूँकि गुजरात के कई इलाके बाढ़ के चपेट में है
राहुल गाँधी की गाडी का सीसा तोड़ दिया गया
इसके बाद कोंग्रेसी नेता, सेक्युलर मीडिया के लोग चींखने लगे, सभी एक के बाद एक बाद एक ट्वीट करने लगे
कोई इसे लोकतंत्र की हत्या बता रहा है, तो कोई इसे आपातकाल घोषित करने में जुट गया है
राष्ट्रवादी पत्रकार सुरेश चव्हाणके इस मुद्दे पर एक ट्वीट किया है जिसे आपको देखना चाहिए
जो कांग्रेस पार्टी राहुल गाँधी के मामले पर चींख रही है, ये वही कांग्रेस पार्टी है जो सैनिको को पत्थरों से मारने वाले पत्थरबाजों का समर्थन करती है
पत्थरबाजों के खिलाफ सेना बोलती है तो सेना को गुंडा बताती है, पत्थरबाजों के पत्थरबाजी को अभी व्यक्ति की बाते बताती है
ये तो वही बात हो गयी की देश में पत्थर भी 2 तरह के हो गए
एक वो पत्थर जिसके चलने के बाद कहा जाता है की "लोकतंत्र की हत्या हो गयी"
और एक दूसरा पत्थर जिसके चलने पर कहा जाता है की, "ये तो अभिव्यक्ति की आज़ादी है"
और साजिश के तहत उनकी गाडी का सीसा तोड़ दिया गया, जिसके बाद राहुल गाँधी और पूरी कांग्रेस बीजेपी के खिलाफ बोल रहे है, बता दें की गुजरात में इसी साल चुनाव भी है और कांग्रेस के पास मुद्दों का अकाल है
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यहाँ तक की कांग्रेस के सभी विधायक गुजरात छोड़ फरार है जिसके बाद लोगों में आक्रोश भी हैचूँकि गुजरात के कई इलाके बाढ़ के चपेट में है
राहुल गाँधी की गाडी का सीसा तोड़ दिया गया
इसके बाद कोंग्रेसी नेता, सेक्युलर मीडिया के लोग चींखने लगे, सभी एक के बाद एक बाद एक ट्वीट करने लगे
कोई इसे लोकतंत्र की हत्या बता रहा है, तो कोई इसे आपातकाल घोषित करने में जुट गया है
राष्ट्रवादी पत्रकार सुरेश चव्हाणके इस मुद्दे पर एक ट्वीट किया है जिसे आपको देखना चाहिए
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जो कांग्रेस पार्टी राहुल गाँधी के मामले पर चींख रही है, ये वही कांग्रेस पार्टी है जो सैनिको को पत्थरों से मारने वाले पत्थरबाजों का समर्थन करती है
पत्थरबाजों के खिलाफ सेना बोलती है तो सेना को गुंडा बताती है, पत्थरबाजों के पत्थरबाजी को अभी व्यक्ति की बाते बताती है
ये तो वही बात हो गयी की देश में पत्थर भी 2 तरह के हो गए
एक वो पत्थर जिसके चलने के बाद कहा जाता है की "लोकतंत्र की हत्या हो गयी"
और एक दूसरा पत्थर जिसके चलने पर कहा जाता है की, "ये तो अभिव्यक्ति की आज़ादी है"
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