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    डराने खरीदने की खूब करी कोशिश, पर जज जगदीप सिंह को प्रभावित न कर सका राम रहीम !

    साध्वी रेप केस मामलें में गुरमीत सिंह को आज दोपहर 2 बजे सीबीआई कोर्ट की विशेष अदालत ने सजा मुकर्रर कर दिया। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम-रहीम सिंह पर साध्वी से रेप के मामले में शुक्रवार को ही सीबीआई कोर्ट ने अपने फैसले में राम रहीम को रेप केस का दोषी करार दे दिया था।

    आपको बताते चलें कि जब सीबीआई कोर्ट ने गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दिया गया उसके बाद गुरमीत के समर्थंको ने जमकर हरियाणा में उपद्रव किया जिसमें 40 लोग की जान चली गईं और अब कोर्ट ने 20 साल की सजा दी है गुरमीत को राम रहीम के इस हाई प्रोफाइल मामलें में फैसला सुनाने वाले हरियाणा जींद के रहने वाले न्यायिक सेवा अधिकारी जज जगदीप सिंह हैं।

    वह काफी सख्त मिजाज के जज माने जाते हैं इसीलिए किसी दबाव में आए बिना उन्होंने सजा सुनाईं और यौन शोषण के मामलें में राम रहीम को दोषी करार दिया। डेरा प्रमुुख राम रहीम की जिन्दगी का फैसला सुनाने वाले जज जगदीप सिंह एडीज स्तर के न्याय अधिकारी है। जगदीप सिंह 2012 मे न्यायिक सेवा में आए थे।

     इस मामले वह पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में क्रिमनल मामलों के वकील के रूप मे सक्रिय थे। उन्होंने 2000 से लेकर 2012 तक अपराधिक मामलों के मुकदमें लड़ रहे थे। 2012 में हरियाणा की न्यायिक सेवा में शामिल हुए थें जगदीप सिंह को पिछले साल ही सीबीआई स्पेशल जज के लिए चुना गया था जो कि एक न्यायिक ऑफिसर के रूप में दूसरी पोस्ट हैं।


    सिंह 2012 में हरियाणा की न्यायिक सेवाओं में शामिल हुए और उन्हें सोनीपत में तैनात किया गया। आमतौर पर हाईकोर्ट प्रशासन द्वारा कई जांच बाद सीबीआई कोर्ट पोस्टिंग दी जाती है पंजाब यूनिवर्सिटी से उन्होंने कानून की डिग्री ली हैं। वे पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के वकील थे। हरियाणा के रहने वाले सिंह ने 2000 और 2012 के बीच कई नागरिक और आपराधिक मामले उठाए थे।

    सिंह के साथ प्रैक्टिस कर चुके एक वकील के अनुसार वे हमेशा लॉ प्रोफाइल को पंसद करते हैं और कई लोगों को उनकी क्षमता और अखंडता पर पूरा यकीन है। 2000 में पंजाब यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री ले चुके एक न्यायिक अधिकारी ने कहा कि उन्हें बहुत और ईमानदार अधिकारी माना जाता है। जगदीप सिंह सबसे पहले सितंबर 2016 में उस वक्त सुर्खियों में आए थें जब वे हिसार से पंचकुला जा रहे थे। उस दौरान उन्होंने सड़क दुर्घटना में बुरी तरह से घायल हुए लोगों को देखकर सिंह ने एबुंलेंस को फोन किया।

    काफी देर बाद जब एबुंलेंस घटना स्थल पर नहीं पहुंची तो ऑपरेटर ने उन्हें बताया कि क्या एंबुलेंस उड़कर आएगी। तब उन्होंने किसी निजी वाहन को रूकवाकर घायल लोगों को हॉस्पिटल पहुंचाया था।

     गौरतलब है कि 2002 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के दौरान एक गुमनाम पत्र लिखकर डेरा प्रमुख राम रहीम पर साध्वी ने यौन शोषण को आरोप लगाया था। ये पत्र प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और हाईकोर्ट भेजा गया था। हाईकोर्ट ने इसे संज्ञान में लेकर कार्यवाही शुरू की और उसके बाद सीबीआई जांच शुरू हुई जिसकी परिणति आज फैसले के रूप में हो रही हैं।

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