रेप के आरोप में बाबा राम रहीम दोषी करार, कोर्ट ने सुनाया ये फैसला
नई दिल्ली: यौन उत्पीड़न के मामले में आरोपी गुरमीत राम रहीम सिंह पर बड़ा फैसला सुनाया गया है। जज जगदीप सिंह के द्वारा बाबा को दोषी करार दिया गया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि पुलिस और सेना को कार्रवाई की छूट है। हाईकोर्ट ने कहा कि पंचकूला
में कोई भी नेता नहीं आना चाहिए। किसी भी नेता ने भड़काऊ भाषण दिया तो कार्रवाई की जाएगी। गुरुवार को
भी हाईकोर्ट ने हालात पर काबू पाने के लिए सेना को अलर्ट पर रखने के लिए कहा था।
अदालत ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि पूरे मामले में डीजीपी हालात पर काबू पाने में
नाकाम रहे। कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा था इतनी कम सेना क्यों भेजी? हाईकोर्ट ने सख्त लहजे में केंद्र
सरकार से कहा इस पूरे मामले में हमें दोपहर बाद जवाब दें। साथ ही अटार्नी जनरल पंजाब और अटार्नी
जनरल हरियाणा से भी पूरी जानकारी देने के लिए कहा था। अदालत ने कहा कि यदि पूरे मामले में कोई भी
अप्रिय घटना हुई तो डीजीपी जिम्मेदार होंगे। एक भी जान गई तो डीजीपी को सस्पेंड कर देंगे, सुप्रीम कोर्ट
जाना है तो जाएं।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि ऐसे ही हालात जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान भी पैदा हुए थे। गौरतलब है
कि डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के खिलाफ 25 अगस्त को यौन उत्पीड़न को लेकर आने
वाले अदालती फैसले से पहले हरियाणा और पंजाब में सतर्कता बरती जा रही है।
बताते चलें कि डेरा सच्चा सौदा की स्थापना 1948 में शाह मस्ताना महाराज ने की थी। शाह सतनाम महाराज
इसके प्रमुख बने और उन्होंने 1990 में संत गुरमीत सिंह को गद्दी सौंप दी। संत गुरमीत श्रीगंगानगर
(राजस्थान) के गांव गुरुसरमोडिया के रहने वाले हैं।
अप्रैल 2002- राम रहीम की अनुयायी एक साध्वी ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट और तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल
बिहारी वाजपेयी को एक शिकायत भेजी थी। साध्वी ने शिकायत में राम रहीम पर यौन शोषण का आरोप
लगाया था।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि पुलिस और सेना को कार्रवाई की छूट है। हाईकोर्ट ने कहा कि पंचकूला
में कोई भी नेता नहीं आना चाहिए। किसी भी नेता ने भड़काऊ भाषण दिया तो कार्रवाई की जाएगी। गुरुवार को
भी हाईकोर्ट ने हालात पर काबू पाने के लिए सेना को अलर्ट पर रखने के लिए कहा था।
अदालत ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि पूरे मामले में डीजीपी हालात पर काबू पाने में
नाकाम रहे। कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा था इतनी कम सेना क्यों भेजी? हाईकोर्ट ने सख्त लहजे में केंद्र
सरकार से कहा इस पूरे मामले में हमें दोपहर बाद जवाब दें। साथ ही अटार्नी जनरल पंजाब और अटार्नी
जनरल हरियाणा से भी पूरी जानकारी देने के लिए कहा था। अदालत ने कहा कि यदि पूरे मामले में कोई भी
अप्रिय घटना हुई तो डीजीपी जिम्मेदार होंगे। एक भी जान गई तो डीजीपी को सस्पेंड कर देंगे, सुप्रीम कोर्ट
जाना है तो जाएं।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि ऐसे ही हालात जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान भी पैदा हुए थे। गौरतलब है
कि डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के खिलाफ 25 अगस्त को यौन उत्पीड़न को लेकर आने
वाले अदालती फैसले से पहले हरियाणा और पंजाब में सतर्कता बरती जा रही है।
बताते चलें कि डेरा सच्चा सौदा की स्थापना 1948 में शाह मस्ताना महाराज ने की थी। शाह सतनाम महाराज
इसके प्रमुख बने और उन्होंने 1990 में संत गुरमीत सिंह को गद्दी सौंप दी। संत गुरमीत श्रीगंगानगर
(राजस्थान) के गांव गुरुसरमोडिया के रहने वाले हैं।
अप्रैल 2002- राम रहीम की अनुयायी एक साध्वी ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट और तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल
बिहारी वाजपेयी को एक शिकायत भेजी थी। साध्वी ने शिकायत में राम रहीम पर यौन शोषण का आरोप
लगाया था।




