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    कश्मीर से धारा 370 हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट भी आगई मोदी सरकार के साथ, बौखला गई मेहबूबा

    JAMMU KASHMIR को विशेष अधिकार मिला हुआ है जिसे हम धारा-370 के नाम से भी जानते है, अब मोदी सरकार में इस धारा पर सुप्रीम कोर्ट में बहस शुरू हो गई है। सरदार वल्लभ भाई पटेल ने भारत के नेताओ को चेताया था की कश्मीर को ये विशेष अधिकार न दे पर तब के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने उनकी बात नहीं मानी थी जिसका खामियाजा भारत को भुगतना पद रहा है। पर अब वो दिन दूर नहीं जब इस धारा को ख़त्म करदिया जाएगा क्युकी भारत के इस समय के प्रधानमंत्री बहुत निडर है और कोई भी साहसी कदम उठाने में हिचकिचाते नहीं।

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    मोदी सरजर में एक NGO ने धारा 370 के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील डाली थी। याचिका में कहा गया है कि यह अनुच्छेद कभी संसद में पेश नहीं हुआ और इसे राष्ट्रपति के आदेश पर लागू किया गया। इस प्रावधान को 1954 में तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने अनुच्छेद 370 में प्रदत्त राष्ट्रपति के अधिकारों का उपयोग करते हुए ‘संविधान (जम्मू एवं कश्मीर के लिए आवेदन) आदेश 1954’ को लागू किया था।

    याचिककर्ता के मुताबिक संविधान के इन प्रावधानों के तहत अगर जम्मू-कश्मीर की स्थाई निवासी महिला कश्मीर से बाहर के शख्स से शादी करती है, तो वो सूबे में सम्पति, रोजगार के तमाम हक़ खो देगी और साथ ही बच्चों को भी परमानेंट रेसिडेंट सर्टिफिकेट नही मिलेगा। और तो और जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के अलावा अन्य भारतीय नागरिक राज्य में अचल संपत्ति नहीं खरीद सकते और ना ही मताधिकार हासिल कर सकते हैं।

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    वहीं इतने कदम के बाद जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री मेहबूबा मुफ़्ती ने अपना असली राग दिखा दिया। कश्मीर से विशेष अधिकार छिनता देख बौखै मेहबूबा ने ऐलान किया की अगर धारा 370 कश्मीर से हटाई गई तो भारत का झंडा उठाने वाला कश्मीर में कोई नहीं होगा। मेहबूबा भी अब समझ गई है की मोदी जी कश्मीर से ये धारा हटाए बिना मानेंगे नहीं और कश्मीरो को जो अलग कानून के तहत अधिकार मिला था वो छीन जाएगा।
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