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    2005 में दाऊद इब्राहिम खुद मुंबई में था मौजूद, अजित डोवाल उसे पकड़ते उस से पहले कर लिए गए गिरफ्तार !

    ये सारी अहम् जानकारियां संजय द्विवेदी जी के फेसबुक वाल से ली गयी है, हमने इसमें कुछ भी एडिट नहीं किया है

    2005 में कर्नल पुरिहित ने रिपोर्ट दिया था कि  भारत का सर्वोच्च शत्रु दाऊद इब्राहिम
    मुम्बई में बैठकर नक्सली और ISI के बीच मध्यस्तता कर रहा है

    इस पर कभी जांच भी नहीं कि गयी कि कैसे दाऊद इब्राहिम भारत की भूमि पर रहा, किसने उसे आश्रय दिया, कौन कौन राजनैतिक व्यक्ति उसके सम्पर्क में थे, पुलिस को जानकारी थी किन्तु पुलिस एक प्रकार से दाऊद के कवच के रूप में तैनात थी..
    भारत मे ये सब कौन होने दे रहा था

    मैंने बताया था आपको की 2005 में कर्नल पुरोहित ने जानकारी दी थी कि दाऊद इब्राहिम मुम्बई में था और नक्सली और ISI के बीच
    सौदा करवा रहा था..

    2005 में अजीत डोवाल को मुंबई में पुलिस ने पकड़ लिया था क्योंकि उनके पास दाऊद को पकड़ने का पूरा प्लान था..

    * 10जनपथ का_खेल

    26/11 को जो होने वाला था कर्नल पुरोहित को पता था, लेकिन उनको कुछ दिन पहले चोरों के माफिक भोपाल हवाई अड्डे पर ही पकड़ लिया गया..
    जिनको शंका है वो जरा तारीखे पता कर लें..

    * 10जनपथ का_खेल

    26/11 पहले गुजरात में करना था, निशाने पर कोई और नहीं बल्कि नरेंद्र मोदी थे पर ये हमला मुम्बई में करना पड़ा क्योंकि गुजरात पुलिस अपने मुख्यमंत्री की सुरक्षा के लिए अत्यंत सक्रिय थी.. याद कीजिये आतंकियों की बात पहले गुजरात के तट पर ही देखी गयी थी किन्तु वहां दाल नहीं गली तो मुम्बई फारवर्ड किया गया था..

    फिर सवाल यह उठता है कि भगवा_आतंकवाद क्यों गढ़ा गया..
    ISI के Lt. Gen. Pasha ने वास्तव में यह शब्द गढ़े थे जिसपर 10 जनपथ सहमत था.. दिग्गी को निर्देश मिले,
    मप्र के धार में दिग्गी ने सिमी का गढ़ बना रखा था, उधर से स्लीपर सेल मुम्बई पहुंचे, बच्चों के लिए खाने रहने की व्यवस्था की गई..
    बच्चे आ रहे थे कर्नल पुरोहित को पता था...

    कर्नल को जेल क्यों हुई समझिये..

    कर्नल बहुत कुछ जानते थे और जिसकी जानकारी वे लगातार सेना को दे रहे थे, वह जानकारी सेना के एक वरिष्ठतम अधिकारी को पता थी, वहां से 10 जनपथ तक खबर हो रही थी..

    दिग्गी अपनी तैयारी में थे, कुछ ATS वालों को पहले से फोन पर बातें किया करते थे..
    पर फोन पर जिनसे बातें किया करते थे उनको बोत से आने वाले बच्चे नहीं पहचानते थे..

    कोऑर्डिनेशन में गड़बड़ हुई, ATS वाले अपनो से मिलने पहुंच गए "टहलते" हुए, बच्चों ने पुलिस की गाड़ी पर ak47की मैगजीन खाली कर दी, फिर गाड़ी को खाली किया और मुंबई सैर पर निकल गए..

    उधर दिग्गी पहले ही भगवा आतंकवाद की कहानी पर किताबों की प्रूफ रीडिंग करवा चुके थे, बच्चे मुम्बई में उतरे तो उन्हें कलावे पहना दिए गए, बच्चों को निर्देश था कि जिंदा नहीं पकड़े जाना नही तो अम्मी अब्बू बहन भाई सब ऊपर ही मिलेंगे..

    वो तो हवलदार देशभक्त था क्योंकि बच्चे इतनी दूर पहुंच जाएंगे इसकी तैयारी और सोच भी नहीं थी..
    बाकी ईश्वर की मर्जी के आगे सब शून्य ही तो है..
    कर्नल बहुत कुछ जानते थे, रिपोर्ट भी करते थे, बस कलावे के फेर में उलझते गए..

    * 10जनपथ का_खेल

    मालदा से दरभंगा तक नक्सलियों को रुपया पैसा हथियार नेपाल ISI दाऊद चीन कांग्रेस सब पता था कर्नल को किन्तु वो कौन था जो 10 जनपथ को सब बता रहा था..

    * 10जनपथ का_खेल

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    एक पुलिस अधिकारी को आतंकियों ने मार दिया, पुलिस अधिकारी को मरणोंपरान्त मेडल से सम्मानित किया गया..
    बाद में दिग्गी चुप नही रहे बता बैठे की एक दिन पहले ही दोनों की बात हुई थी, क्यो बताया, क्योंकि यदि नहीं बताते और कहीं गलती से जांच हो जाती तो फोन कॉल डिटेल्स में नाम तो आना ही था.. चौबेजी बनने चले थे छबे जी बनकर लौट आये..

    * 10जनपथ का_खेल

    आज आपने सुना होगा कि सबसे पहले शारद पवार ने हिन्दू आतंकवाद की अवधारणा भारत मे दी थी - डीपी त्रिपाठी ने कहा है..
    बच्चे आये थे, कलावे पहन कर.. जिंदा नहीं पकड़े जाने, बार बार हमने रिकार्डेड बातचीत में सब सुन है,, पर तुकाराम,, हवलदार तुकाराम तो बहुत दूर चौपाटी के करीब थे, उनको तो बस माँ भारती की सेवा करनी थी..
    सो पकड़ लिया कसाब को, जिंदा..

    खुद तुकाराम तो वास्तव में शहीद हो गए पर हिन्दुओ को जीवन दे गए, खुद विषपान कर नीलकण्ठ हो गए और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को अमरता का अमृत दे गए ..

    बस यहीं मात खा गया 10 जनपथ..

    ये भारतीय नाहक ही देशभक्ति दिखा जाते हैं नहीं तो आज जिन मोदी जी के सामने विपक्ष शून्य हो चुका है उस स्थान पर राऊल बाबा होते, सल्तनत बरकरार रहती..

    * 10जनपथ का_खेल

    क्या आपको पता है कि पाकिस्तान ने साझा जांच के लिए कर्नल से पाकिस्तान में पूछताछ की बात की बार कही थी जिसपर तत्कालीन सरकार क़ानूनी दांवपेंच सुलझाने में लगी थी..

    वास्तव में पाकिस्तानी ISI को यह पता करना था कि 10 जनपथ के साथ मिलकर उनके बनाय

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