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    गोरखपुर घटना: मोदी ने फोन पर 15 मिनट तक लगाई योगी की क्लास, बोले- जो गलत है.. उसे उल्टा टांग दो । Jagran24

    NEW DELHI:
    यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के क्षेत्र गोरखपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज बाबा राघव दास (BRD) में 60 बच्चों समेत 63 मौतों पर केंद्र ने राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है। केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल को सरकार ने गोरखपुर भेजा है, उनके साथ यूनियन हेल्थ सेक्रेटरी भी गोरखपुर जाएंगे। इस बीच नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा, "इस मामले पर मेरी नजर है। मैं लगातार केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों से संपर्क में हूं।"



    न्यूज एजेंसी के मुताबिक, गोरखपुर के डीएम राजीव रौतेला के मुताबिक, 10 अगस्त से अब तक करीब 30 बच्चों की मौत हुई है। उधर, यूपी के हेल्थ मिनिस्टर सिद्धार्थनाथ सिंह का कहना है कि 7 अगस्त से अब तक 60 बच्चों की मौत हुई है। सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा- ''2015 में अगस्त महीने में 668 मौतें हुई, जिसका एवरेज 22 लोग प्रतिदिन है। 2016 के अगस्त महीने में 587 मौतें हुईं, इसका एवरेज 19 प्रतिदिन है। साल भर में भी 17-18 प्रतिदिन मौतें होती हैं। मेडिकल कॉलेज में लोग लास्ट स्टेज में आते हैं। यही कारण है कि किसी भी मेडिकल कॉलेज में डेथ का ये ट्रेंड दिखेगा।''

     बच्चों की मौतों का मामला सामने आने के बाद बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल को यूपी सरकार ने सस्पेंड कर दिया है। यूपी सरकार ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल राजीव मिश्रा को शनिवार को सस्पेंड कर दिया। इसके बात उन्होंने कहा कि मैंने निलंबन होने के पहले ही अपनी जिम्मेदारी मानते हुए इस्तीफा सौंप दिया था। योगी आदित्यनाथ ने कहा, "इस मामले में अब जवाब मांगने की गुंजाइश नहीं है। क्या हुआ, कैसे हुआ.. इसकी जांच की जा रही है।



    दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।" यूपी सरकार ने कहा है कि बच्चों भी मौत ऑक्सीजन सप्लाई में कमी के चलते नहीं हुई। यूपी हेल्थ मिनिस्टर ने सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा, "मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन सप्लाई बंद हुई थी, लेकिन इसकी वजह से बच्चों की मौत नहीं हुई है। मौतों की अलग-अलग वजह है।" गोरखपुर के डीएम ने कहा- डॉक्टरों का कहना है कि ऑक्सीजन की कमी की चलते कोई मौत नहीं हुई, क्योंकि उनके पास वैकल्पिक व्यवस्था थी। 7 बच्चों की मौत इन्सेफलाइटिस से हुई। इसे दिमागी बुखार भी कहा जाता है। वास्तव में ये वायरल इन्फेक्शन है। गोरखपुर और आसपास के इलाकों में यह समस्या लंबे समय से है। बच्चे इसके ज्यादा शिकार होते हैं। तेज बुखार, दर्द के साथ शरीर पर चकत्ते आ जाते हैं। 25 बच्चों की मौत दूसरी बीमारियों की वजह से होने का भी दावा किया जा रहा है।

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