अभी-अभी: कंगाल हुआ चीन, वर्ल्ड बैंक ने भी कहा-जब तक भारत नहीं कहेगा, कर्ज नहीं देंगे
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चीन की विशाल अर्थव्यवस्था धराशाई हो चुकी है । जहां एक तरफ पश्चिमी देश 'ब्लैक स्वांस' से परेशान हैं वहीं दूसरी तरफ चीन को 'ग्रे राइनो' की समस्या ने परेशान कर रखा है।वहीं वर्ल्ड बैंक ने भी चीन को कर्ज देने से इनकार कर दिया है। वर्ल्ड बैंक ने डोकलाम विवाद का हवाला देते हुए कर्ज देने से मना कर दिया। बैंक ने कहा है कि पहले चीन भारत से इस समस्या का हल निकाले और भारत की तरफ से NOC लेकर आए। न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी एक खबर के अनुसार 'ग्रे राइनोज' ने चीन की अर्थव्यवस्था को अंदर से खोखला करना शुरू कर दिया है।
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ग्रे राइनोज चीन के ऐसे बिजनेस टाइकून हैं जिन्होंने राजनीति में अपनी घुसपैठ बना कर ग्लोबल कंपनियों का एक संगठन तैयार कर लिया है। एनबैंग इंश्योरेंस ग्रुप, फोसन इंटरनेशनल, एचएनए ग्रुप और डेलियन वांडा ग्रुप ऐसी कंपनियां हैं जिन्होंने सरकारी बैंकों से सस्ती दरों पर कर्जा लेकर आज अपने बड़े एंपायर खड़े कर लिए हैं।बिजनेस के ये खिलाड़ी आज इतनी मजबूत स्थिति में आ गए हैं कि चीनी सरकार अब इन पर शिकंजा कसने जा रही है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने हाल ही में चेताया था कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए वित्तीय स्थिरता महत्त्वपूर्ण है। वहीं दूसरी तरफ कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र माने जाने वाले एक अखबार ने भी 'ग्रे राइनोज' से उपजे खतरों पर लेख लिखा था।
चीनी नियामक इस बात को लेकर आशंकित हैं कि इनमें से कुछ कंपनियों के संगठन बहुत मजबूत हो गए हैं। उन्होंने इतना कर्ज ले लिया है कि वो अब देश की आर्थिक व्यवस्था के लिए खतरा साबित हो सकते हैं। बैंक अधिकारी अब ऐसी कंपनियों की बैलेंस शीट की जांच कर रहे हैं।
पिछले साल ही एनबैंग नामक इंश्योरंस कंपनी ने न्यूयॉर्क में वाल्डोर्फ अस्टोरिया के लिए 2 अरब डॉलर चुकाए। इसके कुछ दिनों बाद ही इस कंपनी के चेयरमैन वू जियाहुई को चीनी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, हालांकि इनके कारण का खुलासा नहीं किया गया है।
चीन का वॉरेन बफे कहे जाने वाले फोकस कंपनी ने क्लब मेड के साथ मिलकर कई बिलियन डॉलर कमाए है। 2015 में इस कंपनी के चेयर मैन गुओ गुआनचांग को अधिकारियों ने गिरफ्तार कर लिया था। कंपनी को दबाव में आकर इस बात से इनकार करना पड़ा। इसी तरह एक रीजनल एयरलाइन्स की तरह शुरू हुई एचएनए देखते ही देखते एक पॉवरहाउस बन गई। इसके पास हिल्टन होटल, दूशे बैंक और स्विसपोर्ट के भी स्टेक्स थे। बैंक ऑफ अमेरिका ने अब इस कंपनी के साथ बिजनेस न करने का निर्णय लिया है।
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इसी तरह डिलियन वांडा ने भी बड़ी अमेरिकी एंटरटेनमेंट कंपनियों से जमकर मुकाबला किया। पिछले साल इसने चीन में डिज्नी को भी पीछे छोड़ दिया। अब ये कंपनी धीरे-धीरे अपने थीम पार्क और होटल बेच रही है। इन कंपनियों के साथ सबसे बुरी बात यह रही कि इन्हें कोई देखने वाला ही नहीं था। यानी इनपर कोई पकड़ नहीं बना पा रहा था। ग्रे राइनोज में एक बात सामान थी कि इन्होंने खूब सारा कर्ज ले रखा था और बहुत सारी डील्स साइन की थीं।पिछले कई सालों तक चीन के बैंक कंपनियों को ढेर सारा कर्ज देते रहे जिससे अर्थव्यवस्था में अधिक से अधिक पैसा भेजा जा सके। 2008 की मंदी के बाद इनको बढ़ाकर दोगुना कर दिया गया। इन संगठित कंपनियों ने बैंकों से हद से अधिक कर्ज ले रखा है। मिक्जिन पेई का कहना है कि इन कंपनियों के इतन अधिक फलने-फूलने का एक मात्र कारण चीनी सरकार है। अगर आप यह देखें कि ये कंपनियां अचानक इतनी बड़ी कैसे बढ़ गईं तो इसका मुख्य कारण है कर्ज।
2015 में अर्थव्यवस्था के कमजोर पड़ते ही चीन की सरकार ने इस ओर कदम उठाने शुरू कर दिए। एक तरफ चीन भारत के साथ सीमा विवाद पर लगातार भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है वहीं दूसरी तरफ आंतरिक तौर पर चीन इससे कहीं अधिक बड़ी मुसीबत झेलने पर मजबूर है। चीन की हालिया हरकतों से यह साफ हो जाता है कि वह एशिया में अतिक्रमण की नीति अपना रहा है। लेकिन आर्थिक तौर पर खुद को भारत से मजबूत बताने वाला चीन अपने देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने में नाकामयाब होता दिखाई दे रहा है।




