भारत का चीन को दो टूक जवाब – सुषमा बोलीं – हम नहीं हटायेंगे अपनी सेना – हम भी हर तरह से तैयार
सिक्किम मामले में अब भारत ने भी चीन को जवाब दे दिया है l जवाब भी ऐसा जो चीन को चित कर दे l ऐसा जवाब जिसकी उम्मीद नरेद्र मोदी सरकार से की जा रही थी l चीन पिछले कुछ वक़्त से सिक्किम के डोकलाम में अपनी दादागिरी दिखा रहा था, लेकिन अब भारत ने भी चीन को उसकी दादागिरी का दो टूक जवाब दे दिया है l
भारत ने ये साफ कर दिया है कि वो किसी भी कीमत पर डोकलाम से अपनी सेना तब तक नहीं हटाएगा, जब तक कि चीन वहां से अपनी सेना नहीं हटा लेता l भारत ने ये भी साफ़ कर दिया है कि वो किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह चौकन्ना और तैयार है l
राज्यसभा में गुरुवार को चीन के साथ सैन्य गतिरोध के मुद्दे पर चर्चा के दौरान विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि भारत और चीन के बीच सीमा रेखा को रेखांकित किया जाना है और डोकलाम में एक ट्राईजंक्शन है l 2012 में एक लिखित समझौते के तहत निर्णय हुआ था कि इसमें कोई फेरबदल भारत, चीन और भूटान के बीच चर्चा के बाद ही होगा l
विदेशमंत्री ने कहा कि चीन लगातार वहां आता रहा है, कभी निर्माण के लिए कभी किसी और काम के लिए, लेकिन इस बार वे सीधे ट्राईजंक्शन प्वाइंट पर आ गए l इस बार कोई भी एकतरफा फैसला हमारी सुरक्षा व्यवस्था के लिए खतरा है l
चीन की वन बेल्ट वन रोड नीति पर विदेश मंत्री ने कहा कि जैसे ही में पता चला कि वन बेल्ट वन रोड में चीन पाक आर्थिक कॉरिडोर को डाल रहे हैं, भारत ने पूरी कड़ाई से अपना विरोध दर्ज कराया है l
विदेश मंत्री से पहला सवाल कांग्रेस सांसद छाया वर्मा ने पूछा। छाया ने पूछा कि क्या चीन ने हिंद महासागर में अपनी पनडुब्बियों को तैनात किया है और क्या वह भारत की घेराबंदी कर रहा है? इस मामले में सरकार क्या कर रही है? सुषमा ने हिंद महासागर में चीन के भारत को घेरने पर कहा कि ऐसी खबरें आई थीं चीन समुद्री ताकत बनना चाहता है। इसके लिए उसने समुद्री सीमाओं के आसपास सक्रियता बढ़ाई है, लेकिन भारत अपनी सुरक्षा के बारे में बहुत चौकन्ना है, इसलिए उसे कोई घेर नहीं सकता। सुषमा ने बताया कि भारत की स्थिति दक्षिण चीन सागर के बारे में बिल्कुल साफ है। वहां फ्रीडम ऑफ नेविगशन होनी चाहिए। किसी तरह से व्यापार को बाधित नहीं बनाना चाहिए l
गुरुवार को कांग्रेस सांसद के बाद समाजवादी पार्टी के सांसद नरेश अग्रवाल ने विदेश मंत्री से सवाल किया कि चीन और भारत के बीच मौजूदा तनाव का कारण क्या है और चीन की क्या -क्या मांगें हैं ? उन्होंने पूछा कि चीन क्या-क्या विरोध कर रहा है और भारत का इस पर क्या जवाब है? दुनिया के कौन-कौन से देश भारत के साथ इस मुद्दे पर खड़े हैं ?
इसके बाद सिक्किम सीमा पर हुए ताजा विवाद के बारे में जानकारी देते हुए सुषमा ने कहा कि भारत और चीन के अलावा चीन और भूटान के बीच सीमा तय होनी है। भारत ने इस मामले के हल के लिए प्रतिनिधि तय किए हैं। विदेश मंत्री के मुताबिक, सीमा तय किए जाने का मामला देशों को आपस में सुलझाना होता है, लेकिन एक जगह ऐसी थी, जिसे ट्राइजंक्शन कहते हैं। इसे लेकर 2012 में समझौता हुआ था कि भारत, चीन और थर्ड कंट्री यानी कि भूटान मिलकर सीमा तय करेंगे। विदेश मंत्री के मुताबिक, इसके बाद, चीन बीच-बीच में इस क्षेत्र में आता रहा और उसकी हल्की-फुल्की गतिविधियां जारी रहीं। हालांकि, इस बार चीनी सेना बुलडोजर और भारी साजो-सामान लेकर पहुंच गई।
विदेश मंत्री ने बताया कि इस बार चीन चाहता था कि ट्राइजंक्शन को लेकर ‘स्टेटस क्वो’ यानी यथापूर्व स्थिति खत्म हो जाए। सुषमा ने कहा कि ट्राइजंक्शन पॉइंट में चीन की दखल होते ही भारत के हित इस मामले से सीधे तौर पर जुड़ गए। अगर चीन यहां की यथापूर्व स्थिति को बदल देता तो हमारी सुरक्षा खतरे में पड़ जाती। चीनी सेना से आमना-सामना पर सुषमा ने कहा कि अगर बातचीत के लिए दोनों देशों द्वारा सेनाएं पीछे हटाने की शर्त रखी गई तो इसमें कुछ भी गलत नहीं था। विदेश मंत्री के मुताबिक, भारत की ओर से इस मामले में कोई भी गैर वाजिब कदम नहीं उठाया गया है और भूटान समेत सभी देश उसके रुख के साथ खड़े हैं।
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राज्यसभा में गुरुवार को चीन के साथ सैन्य गतिरोध के मुद्दे पर चर्चा के दौरान विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि भारत और चीन के बीच सीमा रेखा को रेखांकित किया जाना है और डोकलाम में एक ट्राईजंक्शन है l 2012 में एक लिखित समझौते के तहत निर्णय हुआ था कि इसमें कोई फेरबदल भारत, चीन और भूटान के बीच चर्चा के बाद ही होगा l
विदेशमंत्री ने कहा कि चीन लगातार वहां आता रहा है, कभी निर्माण के लिए कभी किसी और काम के लिए, लेकिन इस बार वे सीधे ट्राईजंक्शन प्वाइंट पर आ गए l इस बार कोई भी एकतरफा फैसला हमारी सुरक्षा व्यवस्था के लिए खतरा है l
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उन्होंने कहा कि जैसे ही चीन के साथ सैन्य गतिरोध इसलिए बना हुआ है कि चीन लगातार यह कह रहा है कि भारत अपनी सेना को वापस अपनी सीमा में बुलाए l विदेशमंत्री ने कहा कि चीन की बात मानना संभव नहीं है और हमारा प्वाइंट सही है और बाकी देश इस बात को समझ रहे हैं lचीन की वन बेल्ट वन रोड नीति पर विदेश मंत्री ने कहा कि जैसे ही में पता चला कि वन बेल्ट वन रोड में चीन पाक आर्थिक कॉरिडोर को डाल रहे हैं, भारत ने पूरी कड़ाई से अपना विरोध दर्ज कराया है l
विदेश मंत्री से पहला सवाल कांग्रेस सांसद छाया वर्मा ने पूछा। छाया ने पूछा कि क्या चीन ने हिंद महासागर में अपनी पनडुब्बियों को तैनात किया है और क्या वह भारत की घेराबंदी कर रहा है? इस मामले में सरकार क्या कर रही है? सुषमा ने हिंद महासागर में चीन के भारत को घेरने पर कहा कि ऐसी खबरें आई थीं चीन समुद्री ताकत बनना चाहता है। इसके लिए उसने समुद्री सीमाओं के आसपास सक्रियता बढ़ाई है, लेकिन भारत अपनी सुरक्षा के बारे में बहुत चौकन्ना है, इसलिए उसे कोई घेर नहीं सकता। सुषमा ने बताया कि भारत की स्थिति दक्षिण चीन सागर के बारे में बिल्कुल साफ है। वहां फ्रीडम ऑफ नेविगशन होनी चाहिए। किसी तरह से व्यापार को बाधित नहीं बनाना चाहिए l
गुरुवार को कांग्रेस सांसद के बाद समाजवादी पार्टी के सांसद नरेश अग्रवाल ने विदेश मंत्री से सवाल किया कि चीन और भारत के बीच मौजूदा तनाव का कारण क्या है और चीन की क्या -क्या मांगें हैं ? उन्होंने पूछा कि चीन क्या-क्या विरोध कर रहा है और भारत का इस पर क्या जवाब है? दुनिया के कौन-कौन से देश भारत के साथ इस मुद्दे पर खड़े हैं ?
विदेश मंत्री ने बताया कि इस बार चीन चाहता था कि ट्राइजंक्शन को लेकर ‘स्टेटस क्वो’ यानी यथापूर्व स्थिति खत्म हो जाए। सुषमा ने कहा कि ट्राइजंक्शन पॉइंट में चीन की दखल होते ही भारत के हित इस मामले से सीधे तौर पर जुड़ गए। अगर चीन यहां की यथापूर्व स्थिति को बदल देता तो हमारी सुरक्षा खतरे में पड़ जाती। चीनी सेना से आमना-सामना पर सुषमा ने कहा कि अगर बातचीत के लिए दोनों देशों द्वारा सेनाएं पीछे हटाने की शर्त रखी गई तो इसमें कुछ भी गलत नहीं था। विदेश मंत्री के मुताबिक, भारत की ओर से इस मामले में कोई भी गैर वाजिब कदम नहीं उठाया गया है और भूटान समेत सभी देश उसके रुख के साथ खड़े हैं।
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