रविवार की सबसे बड़ी खबर, लालू का साथ छोड़ बीजेपी संग जाएंगे नीतीश कुमार !
नई दिल्ली(रिपोर्ट अड्डा): बिहार की सियासत में रविवार का दिन भारी पड़ने वाला है। 2015 में मोदी और बीजेपी के खिलाफ जिस महागठबंधन की नींव पड़ी थी। जिसने बीजेपी और मोदी के विजय रथ को बिहार में रोका था। वही महागठबंधन रविवार को टूटने वाला है। इस बात की पूरी संभावना है कि नीतीश कुमार लालू का साथ छोड़ देंगे। दरअसल पिछले एक हफ्ते से बिहार में जिस तरह से सियासी उठा पटक चल रही है वो अब निर्णायक मोड़ पर आ गई है। तेजस्वी पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप नीतीश की छवि को दागदार कर रहे हैं। तेजस्वी पर फैसला लेने के लिए नीतीश ने लालू को 4 दिन का समय दिया था। जिसका मियाद शनिवार को खत्म हो गई।
इन 4 दिनों में लालू ने कोई फैसला लिया है तो ये कि तेजस्वी इस्तीफा नहीं देंगे। इतना ही नहीं लालू ने तेजस्वी के भ्रष्टाचार का भी एक तरह से समर्थन किया। उन्होंने कहा कि किसी का नाम एफआईआर में आना कोई बड़ी बात नहीं है। इस आधार पर इस्तीफा नहीं दिया जा सकता है। ऐसे में अब कहा जा रहा है कि नीतीश रविवार को जेडीयू के विधायकों की बैठक में महागठबंधन से हटने का फैसला ले सकते हैं। वो क्या फैसला करेंगे इस को लेकर सभी की निगाहें लगी हुई हैं।
कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार महागठबंधन तोड़कर बीजेपी के साथ हाथ मिला सकते हैं। वहीं ये भी कहा जा रहा है कि वो खुद इस्तीफा दे सकते हैं। कुल मिलाकर रविवार का दिन बिहार की सियासत में निर्णायक होने वाला है। इसी दिन साफ हो जाएगा कि मोदी के खिलाफ महागठबंधन को राष्ट्रीय स्तर पर बनाने का मंसूबा कितना सफल होगा। बिना विचारधारा के केवल मोदी और बीजेपी से नफरत के कारण बिहार में गठबंधन बना था। जो इतने दिन चल गया यही उसकी उपलब्धि है। अब देखना है कि नीतीश क्या फैसला करते हैं। वो कोई भी फैसला करें लेकिन ये ध्यान रखना होगा कि राजनीति को बदलने वाला फैसला करने वाले हैं।
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इन 4 दिनों में लालू ने कोई फैसला लिया है तो ये कि तेजस्वी इस्तीफा नहीं देंगे। इतना ही नहीं लालू ने तेजस्वी के भ्रष्टाचार का भी एक तरह से समर्थन किया। उन्होंने कहा कि किसी का नाम एफआईआर में आना कोई बड़ी बात नहीं है। इस आधार पर इस्तीफा नहीं दिया जा सकता है। ऐसे में अब कहा जा रहा है कि नीतीश रविवार को जेडीयू के विधायकों की बैठक में महागठबंधन से हटने का फैसला ले सकते हैं। वो क्या फैसला करेंगे इस को लेकर सभी की निगाहें लगी हुई हैं।
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रविवार को नीतीश ने विधायकों की बैठक बुलाई है। अभी तक नीतीश ने तेजस्वी के मुद्दे पर कोई बयान नहीं दिया है। उनकी पार्टी की तरफ से जिस लाइन पर बयान दिए जा रहे हैं उस से साफ है कि जेडीयू भी मन बना चुकी है। लालू और उनके परिवार के सदस्यों के घोटालों की आंच नीतीश कुमार की छवि पर पड़ रही है। ऐसे में अब गेंद नीतीश के पाले में हैं। अगर वो तेजस्वी को बर्खास्त करते हैं तो आरजेडी कोटे के सभी मंत्री इस्तीफा दे देंगे। अगर तेजस्वी को नहीं हटाते हैं तो नीतीश क्या करेंगे।कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार महागठबंधन तोड़कर बीजेपी के साथ हाथ मिला सकते हैं। वहीं ये भी कहा जा रहा है कि वो खुद इस्तीफा दे सकते हैं। कुल मिलाकर रविवार का दिन बिहार की सियासत में निर्णायक होने वाला है। इसी दिन साफ हो जाएगा कि मोदी के खिलाफ महागठबंधन को राष्ट्रीय स्तर पर बनाने का मंसूबा कितना सफल होगा। बिना विचारधारा के केवल मोदी और बीजेपी से नफरत के कारण बिहार में गठबंधन बना था। जो इतने दिन चल गया यही उसकी उपलब्धि है। अब देखना है कि नीतीश क्या फैसला करते हैं। वो कोई भी फैसला करें लेकिन ये ध्यान रखना होगा कि राजनीति को बदलने वाला फैसला करने वाले हैं।
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