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    सच में "लातों के भूत है देश के सेक्युलर", बातों से नहीं माने, बांग्लादेशियों की लात खाकर नींद खुली !

    कल नॉएडा की एक हाई सोसाइटी में बांग्लादेशियों ने खूब तांडव किया
    सोसाइटी के खिलाफ सैंकड़ो बांग्लादेशियों ने जिहाद छेड़ दिया, सोसाइटी के आसपास झुग्गी लगाकर सैंकड़ो बांग्लादेशी बसे हुए थे, सोसाइटी वालो के कारण ही वहां बसे हुए थे

    ये हाल सिर्फ इसी इलाके का नहीं भारत के हर शहर का यही हाल है
    सेक्युलर तत्व बांग्लादेशियों को पालते है, आप यकीन मानिये कल नॉएडा में बांग्लादेशियों के हाथो सेकुलरों की पिटाई से दैनिक भारत की टीम को कोई दुःख नहीं है

    बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से पाएं !

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    जब हम बांग्लादेशियों, जिहादियों के बहिष्कार की बात करते है तो यही  सेक्युलर तत्व हमे सांप्रदायिक बताते है, और कहते है सभी एक जैसे थोड़ी है
    पर जब इन सेकुलरों ने लात खाई तो देखिये इन्होने खुद ही सभी बांग्लादेशियों को सोसाइटी से बैन कर दिया


    क्यों भाई अब वो डायलॉग नहीं मारोगे की, "सब एक जैसे नहीं होते"
    चलिए नॉएडा के इस इलाके के सेकुलरों पर बीती तो ये सुधर गए, सच ही तो लिख रहे है हम, कड़वा लिख रहे है, तो बुरा क्या मानना

    बातों से राष्ट्रवादी तत्व समझाते है तो समझ आता नहीं, बांग्लादेशियों की लात खाई तो ही समझे न
    तो देश के सेक्युलर लातों के ही तो भूत हुए

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    वैसे नॉएडा के इस इलाके के सेक्युलर तो सुधर गए, पर यकीन मानिये अन्य शहरों और नॉएडा के ही अन्य इलाकों के सेक्युलर तत्वों को इस से भी कोई फर्क नहीं पड़ता, जबतक उनपर बीतेगी नहीं
    वो सुधरेंगे भी नहीं

    अब भी समय है, सुधर जाओ देश के सेकुलरों, वरना तुम्हारे घरों पर इन बांग्लादेशियों का  ही कब्ज़ा होगा
    देखों न उदाहरण भी है, पश्चिम बंगाल और असम के बांग्लादेश से सटे हुए इलाकों  से हिन्दू विलुप्त ही है
    बांग्लादेशियों का ही कब्ज़ा है, उदाहरण
    असम का धुबरी और बंगाल का मुर्शिदाबाद, मालदा इत्यादि 

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