अभी-अभी : चीन के खिलाफ गुस्से में आये मोदी ने लिया बड़ा फैसला, घुटनो पर आये चीन ने जोड़े हाथ !
नई दिल्ली : सिक्किम में भारत-चीन विवाद को एक महीने से अधिक हो गया. इस दौरान चीन ने कई बार युद्ध की धमकियां भी दी. जब तक भारत शान्ति वार्ता की बात करता रहा, तब तक अपने सरकारी अखबार के जरिये चीन ने भारत को धमकियां देनी जारी रखी लेकिन अब मोदी सरकार ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी है, इसके बाद चीन से एक ऐसी खबर सामने आ रही, जिसे देख दुनियाभर के देश हैरान रह गए हैं.
घुटनो पर आया चीन !
दरअसल भारत शांतिवार्ता की बात कर रहा था तो चीन भारत में तबाही मचाने की धमकियां दे रहा था. चीन की ओर से द्विपक्षीय वार्ता भी रद्द कर दी गयी. जिसके बाद पीएम मोदी ने चीन के खिलाफ सख्त रुख अपनाने का फैसला ले लिया. विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ने चीन को दो टूक सुनाते हुए कह दिया कि अब तो बात तभी होगी जब चीन अपनी सेना को बॉर्डर से पीछे हटाएगा, वरना बात नहीं होगी, जो होगा उससे निपट लेंगे.
सुषमा स्वराज के इस ऐलान के तुरंत बाद चीन ने घुटने टेकते हुए अपने स्वर बदल लिए. चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने एक लेख में चीन को सलाह दी है कि वो युद्ध की बात छोड़कर भारत के साथ व्यापार के बारे में सोचे. कहीं भारत ने व्यापार बंद कर दिया तो चीन में खाने के लाले पड़ जाएंगे.
व्यापार समझौते के रद्द होने से चीन को होगा भयंकर नुक्सान
बता दें कि हैदराबाद में रीजनल कंप्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी या RCEP) के लिए 16 देशों के 100 से ज्यादा अधिकारी इकट्ठा होंगे. ये बैठक अगले हफ्ते होगी और इसमें भारत के साथ-साथ चीन भी शामिल होगा. इस बैठक में एशिया केंद्रित व्यापार सौदे पर 16 देशों के बीच बातचीत होगी.
इन 16 देशों में भारत और चीन सबसे बड़े देश हैं, ऐसे में चीन के साथ सीमा विवाद को लेकर यदि भारत ने चीन के साथ व्यापार करने से इंकार कर दिया तो व्यापार समझौता रद्द हो सकता है और चीन का इतना बड़ा आर्थिक नुक्सान हो सकता है, जिससे उबरने में उसे सालों लग जाएंगे.
जापान सिखा चुका है चीन को सबक !
ऐसा 2012 में चीन के साथ हो भी चुका है, जब चीन ने जापान के दियाओयू आइसलैंड में घुसपैठ की कोशिश की थी. दोनों देशों के बीच तनाव इतना अधिक बढ़ गया था कि चीन-जापान-दक्षिण कोरिया फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से जापान ने अपने हाथ खींच लिए और ये व्यापार समझौता स्थगित हो गया था. इसके स्थगित हो जाने से चीनी अर्थव्यवस्था को बड़ी चोट पहुंची थी और उसके बाद से चीन ने जापान के इलाकों में घुसपैठ करनी बंद कर दी.
ऐसे में कपटी और चालबाज चीन ने शान्ति का ढोंग करना शुरू कर दिया है. चीन का कहना है कि RCEP के व्यापार सौदे पर विवाद का असर नहीं पढ़ना चाहिए. चीन नहीं चाहता कि भारत के साथ व्यापार में सीमा विवाद कोई बाधा बने.
कल तक भारत में तबाही मचाने की धमकियां देने वाले ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि चीन अपने पड़ोसी देशों के साथ सीमा विवाद को बातचीत के जरिए हल करने के लिए पूरी तरह दृढ़ प्रतिज्ञ है. किसी भी विवाद को बढ़ावा देना दोनों देशों के लिए घातक होगा. अब देखना है कि क्या पीएम मोदी इस व्यापार सझौते को रद्द करके चीन को कभी ना भरने वाला घाव देते हैं या चीन को बच्चा समझ कर माफ़ कर देते हैं.
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घुटनो पर आया चीन !
दरअसल भारत शांतिवार्ता की बात कर रहा था तो चीन भारत में तबाही मचाने की धमकियां दे रहा था. चीन की ओर से द्विपक्षीय वार्ता भी रद्द कर दी गयी. जिसके बाद पीएम मोदी ने चीन के खिलाफ सख्त रुख अपनाने का फैसला ले लिया. विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ने चीन को दो टूक सुनाते हुए कह दिया कि अब तो बात तभी होगी जब चीन अपनी सेना को बॉर्डर से पीछे हटाएगा, वरना बात नहीं होगी, जो होगा उससे निपट लेंगे.
सुषमा स्वराज के इस ऐलान के तुरंत बाद चीन ने घुटने टेकते हुए अपने स्वर बदल लिए. चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने एक लेख में चीन को सलाह दी है कि वो युद्ध की बात छोड़कर भारत के साथ व्यापार के बारे में सोचे. कहीं भारत ने व्यापार बंद कर दिया तो चीन में खाने के लाले पड़ जाएंगे.
व्यापार समझौते के रद्द होने से चीन को होगा भयंकर नुक्सान
बता दें कि हैदराबाद में रीजनल कंप्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी या RCEP) के लिए 16 देशों के 100 से ज्यादा अधिकारी इकट्ठा होंगे. ये बैठक अगले हफ्ते होगी और इसमें भारत के साथ-साथ चीन भी शामिल होगा. इस बैठक में एशिया केंद्रित व्यापार सौदे पर 16 देशों के बीच बातचीत होगी.
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इन 16 देशों में भारत और चीन सबसे बड़े देश हैं, ऐसे में चीन के साथ सीमा विवाद को लेकर यदि भारत ने चीन के साथ व्यापार करने से इंकार कर दिया तो व्यापार समझौता रद्द हो सकता है और चीन का इतना बड़ा आर्थिक नुक्सान हो सकता है, जिससे उबरने में उसे सालों लग जाएंगे.
जापान सिखा चुका है चीन को सबक !
ऐसा 2012 में चीन के साथ हो भी चुका है, जब चीन ने जापान के दियाओयू आइसलैंड में घुसपैठ की कोशिश की थी. दोनों देशों के बीच तनाव इतना अधिक बढ़ गया था कि चीन-जापान-दक्षिण कोरिया फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से जापान ने अपने हाथ खींच लिए और ये व्यापार समझौता स्थगित हो गया था. इसके स्थगित हो जाने से चीनी अर्थव्यवस्था को बड़ी चोट पहुंची थी और उसके बाद से चीन ने जापान के इलाकों में घुसपैठ करनी बंद कर दी.
ऐसे में कपटी और चालबाज चीन ने शान्ति का ढोंग करना शुरू कर दिया है. चीन का कहना है कि RCEP के व्यापार सौदे पर विवाद का असर नहीं पढ़ना चाहिए. चीन नहीं चाहता कि भारत के साथ व्यापार में सीमा विवाद कोई बाधा बने.
कल तक भारत में तबाही मचाने की धमकियां देने वाले ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि चीन अपने पड़ोसी देशों के साथ सीमा विवाद को बातचीत के जरिए हल करने के लिए पूरी तरह दृढ़ प्रतिज्ञ है. किसी भी विवाद को बढ़ावा देना दोनों देशों के लिए घातक होगा. अब देखना है कि क्या पीएम मोदी इस व्यापार सझौते को रद्द करके चीन को कभी ना भरने वाला घाव देते हैं या चीन को बच्चा समझ कर माफ़ कर देते हैं.
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