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    हमले के बाद दर्द से कराह रहे थे हिन्दू तीर्थ यात्री, हंस रहे थे उनपर कश्मीरी मुस्लिम दूकानदार !

    आतंकियों की बंदूक से निकली गोलियों से एक-एक कर बस के यात्री गिर रहे थे। दिल दहला देने वाले इस मंजर के बीच बस में चार बाहदुर नौजवान ऐसे थे, जो खुद की जान की परवाह किए बगैर बस के यात्रियों की जिंदगी बचाने कूद पड़े।

    गोलियां उनके शरीर को चीरकर निकलती रहीं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और 50 जिंदगियां बचा लीं। घायल यात्रियों का कहना है कि इन बहादुर जवानों ने बस का गेट बंद न किया होता तो कोई जिंदा नहीं बचता।

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    मुकेश पटेल और हर्ष देसाई बस के गेट के पास बैठे थे। फायरिंग शुरू होते ही मुकेश के पास बैठे यात्री की मौत हो गई। फायरिंग करते आतंकी दौड़ते हुए बस के गेट की तरफ भागे तो मुकेश और हर्ष नीचे झुककर गेट बंद करने भागे। तभी दो गोलियां हर्ष के कंधे और हाथ पर लगीं। एक गोली मुकेश के गाल को चीरते हुए निकल गई। लेकिन दोनों ने रेंगते हुए बस का गेट लॉक कर दिया। इससे आतंकी अंदर नहीं घुस पाए।


    घायल महाराष्ट्र की योगिता बेन ने बताया कि हम श्रीनगर से साढ़े 6 बजे रवाना हुए थे। हमारे साथ तीन और बसें थी। रास्ते में बस पंक्चर हो गई। हम पीछे रह गए थे। पंक्चर निकालने के बाद रवाना होने लगे तभी पंक्चर वाले ने कहा कि एक और पंक्चर है, इससे करीब 2 घंटे लेट हो गए।

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    घायल वलसाड के राजेश नवल भाई ने बताया कि हमले वाली जगह के पास कई दुकानें थीं। बस में महिलाएं, वृद्ध चिल्ला रहे थे। लेकिन दुकानदार हमें देखकर हंस रहे थे। कोई भी मदद के लिए आगे नहीं आया।

    घायलों को एयरपोर्ट से सीधे सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया। वलसाड निवासी मुकेश वित्तल पटेल, नानी दमन निवासी राजेश नवलभाई प्रजापति, मयूरी, वापी निवासी प्रेम गोपाल, वलसाड निवासी रमेश कन्नू भाई पटेल, महाराष्ट्र के कासागाम दहनू निवासी यशवंत नावूभाई डोंगरे और योगिता को भर्ती कराया।

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