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    3 गोलियां खाई हर्ष देसाई ने, वीरता पुरष्कार सलीम को, विजय रुपानी जी पहले जांच तो करा लो !

    अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमले के बाद बस के सहायक ड्राईवर सलीम को वीरता पुरष्कार की घोषणा करने में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने बहुत तेजी दिखाई, गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपानी ने ना जांच की और ना पड़ताल की, उन्होने यह भी पता करने की जहमत नहीं की कि कहीं बस को खतरे में डालने के लिए ड्राईवर ही तो दोषी नहीं हैं, उन्होंने सिर्फ सलीम नाम देखकर आनन फानन में उसे वीरता पुरष्कार देने की घोषणा कर दी.

    विजय रुपानी ने यह भी पता नहीं किया कि असली हीरो कौन है, जी हाँ, असली हीरो बस का मालिक और मेन ड्राईवर हर्ष देसाई थे, उन्होंने तीन गोलियां खाकर आतंकवादियों से लोहा लिया, जब आतंकियों ने बस में घुसने की कोशिश की तो हर्ष देसाई ने उन्हें लात मारकर बाहर भगा दिया, इस कोशिश में उन्हें तीन गोलियां भी लगीं, अगर आतंकी बस में घुस जाते तो ड्राईवर को भी ख़त्म कर देते और सभी यात्रियों को भी ख़त्म कर देते लेकिन हर्ष देसाई ने जांबाजी दिखाकर सभी यात्रियों की जान बचा ली.

    मीडिया ने हर्ष देसाई को इसलिए हीरो नहीं बनाया क्योंकि वो हिन्दू हैं, गुजरात सरकार ने हर्ष देसाई के लिए वीरता पुरष्कार की सिफारिश इसलिए नहीं की क्योंकि वो हिन्दू हैं. गुजरात की बीजेपी सरकार सोच रही है कि सलीम को वीरता पुरष्कार देने से आने वाले विधानसभा चुनावों में गुजरात के मुस्लिम उन्हें वोट दे देंगे. ऐसा लगता है कि अब बीजेपी भी सपा, बसपा और कांग्रेस के रास्ते पर चल पड़ी है और तुस्टीकरण करना चाहती है.

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    कल मीडिया के दोगलेपन की पोल खुल गयी, मीडिया ने उसे हीरो नहीं बनाया जिसनें अपनी जान पर खेलकर 50 यात्रियों की जान बचाई थी बल्कि उसे हीरो बना दिया जिसको एक भी गोली नहीं लगी और जो साइड हीरो का रोल निभा रहा था मतलब बस का कंडक्टर था.


    आपको बता दें कि अमरनाथ यात्री बस पर जब आतंकियों ने हमला किया तो उस वक्त बस हर्ष देसाई चला रहे थे वही बस के मेन ड्राईवर थे, आतंकियों ने उनपर तीन गोलियां चलाईं लेकिन उन्होंने बस नहीं रोका. एक गुजराती अखबार के मुताबिक़, जब हर्ष देसाई बस चला रहे थे तो आतंकियों ने उन्हें ख़त्म करने की कोशिश की, एक आतंकी ड्राईवर हर्ष देसाई को ख़त्म करने के प्रयास में थे इसलिए उन्होने हर्ष देसाई पर फायरिंग कर दी फायरिंग में हर्ष देसाई को तीन गोलियां लगीं.

    जब हर्ष देसाई को तीन गोलियां लग गयीं और उनकी तवियत खराब होने लगी तो उन्होने सहायक ड्राईवर सलीम के हाथों में स्टेयरिंग थमा दी और उसे बस लगातार चलाते रहने के लिए कहा. सलीम ने हर्ष देसाई की बात मानी और बस को चलाता रहा, उसनें पुलिस चेक पोस्ट पर जाकर बस रोक दी.

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    हर्ष देसाई सलीम को बस की ड्राइविंग सीट पर बिठाकर गेट की तरफ आ गए, एक आतंकी बस में घुसने की कोशिश कर रहा था लेकिन हर्ष देसाई ने उसे धक्का देकर बाहर फेंक दिया. उन्होंने अपनी जान पर खेलकर और तीन गोलियां खाकर 50 लोगों की जान बचाई, अगर हर्ष देसाई बहादुरी ना दिखाते और तीन गोलियां खाकर भी बस को ना चलाते रहते तो सभी लोग मारे जाते.

    यहाँ पर हर्ष देसाई को फिल्म का मेन हीरो बनाना चाहिए था जबकि सलीम को साइड हीरो बनाना था लेकिन हर्ष देसाई को इसलिए हीरो नहीं बनाया गया क्योंकि उनके नाम में मुस्लिम शब्द नहीं लगा था, उन्हें हीरो बनाने से मीडिया को TRP नहीं मिलती.

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