यूपी चुनाव के दूसरे चरण में त्रिकोणीय रहा मुकाबला, देखें एक रिपोर्ट
वेस्ट यूपी और रुहेलखंड की अधिकतर सीटों पर बुधवार को आम तौर पर त्रिकोणात्मक मुकाबला नजर आया। सपा, भाजपा और बसपा की नजरें बढ़े मतदान और मुस्लिमों की वोटिंग के ट्रेंड और पैटर्न पर लगी रहीं। तीनों ही दल दूसरे चरण में भी अपनी बढ़त बनाए रखने का दावा कर रहे हैं।
11 जिलों में जिन 67 सीटों पर बुधवार को मतदान हुआ है, उनमें 47 मुस्लिम बहुल हैं। इनमें सहारनपुर, बिजनौर, मुरादाबाद, अमरोहा, संभल, रामपुर और बरेली की 37 सीटों पर 30 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम मतदाता हैं।
वहीं, 17 सीटों पर 20 से 29 फीसदी के बीच मुस्लिम वोटर हैं। सहारनपुर से पीलीभीत तक सभी दलों की नजरें वोटिंग परसेंटेज और मुस्लिमों के रुझान पर लगी हुई थीं।
जैसे-जैसे सूरज चढ़ा, मतदान का प्रतिशत बढ़ता गया। सपाइयों का कहना है कि मुसलमान ही नहीं, सभी वर्गों के मतदाताओं को राहुल-अखिलेश का साथ पसंद आया है। हालांकि कहीं साइकिल की रफ्तार तेज रही तो कहीं कमल खिला। कई जगह हाथी मस्त चाल से बढ़ता दिखा।
भाजपा को ध्रुवीकरण से कामयाबी की उम्मीद
सहारनपुर से पीलीभीत तक कई सीटों पर वोटों का ध्रुवीकरण भी होता दिखा। इसी लाइन पर चलकर भाजपा ने लोकसभा चुनाव में बड़ी कामयाबी हासिल की थी।
हालांकि अब 2014 जैसी लहर नहीं है, फिर भी मतों के ध्रुवीकरण से भाजपा खेमे में राहत महसूस की जा रही है। भाजपा को उम्मीद है कि उसे दूसरे चरण में अच्छी कामयाबी मिलेगी।
बसपा का दलित-मुस्लिम समीकरण दांव पर
सहारनपुर, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, संभल, रामपुर, बदायूं, बरेली, शाहजहांपुर, पीलीभीत और लखीमपुर खीरी तक दलितों का रुझान लगभग एक जैसा रहा। उनका बड़ा हिस्सा हाथी पर सवार नजर आया।
बसपा ने इस बार दलित-मुस्लिम समीकरण को केंद्र में रखकर चुनावी रणनीति बनाई है। चुनावी नतीजे बताएंगे कि यह समीकरण कितना हिट होता है? बसपा दूसरे चरण में भी आगे रहने का दावा कर रही है।
रणनीतिक मतदान नहीं
कई राजनीतिक विश्लेषक अंदाजा लगा रहे थे कि मुसलमान रणनीतिक मतदान (टेक्टिकल वोटिंग) करेगा लेकिन सामान्य तौर पर ऐसा दिखा नहीं।
जिन सीटों पर बसपा का अकेला मुसलमान प्रत्याशी था, वहां भी मुस्लिम वोटों का बंटवारा सपा-बसपा में हुआ। बसपा के पास बेस वोट होने के कारण कई सीटों पर मुसलमान उसके साथ गए, लेकिन कई जगह नहीं गए।
सपा-कांग्रेस खेमे में मतदान से उत्साह
सपा-कांग्रेस खेमा मतदान के रुझान से उत्साहित है। उनका दावा है कि मुसलमानों ने सांप्रदायिक ताकतों को हराने के लिए अखिलेश-राहुल की जोड़ी को पसंद किया है। इससे सहारनपुर समेत कई जिलों में समीकरण बदलेंगे।
सहारनपुर एकमात्र जिला है जहां 2012 में सपा का खाता नहीं खुला था। इस बार यहां अधिकतर सीटों पर मुख्य मुकाबला सपा-कांग्रेस गठबंधन, भाजपा और बसपा के बीच माना जा रहा है।
कहां कितनी मुस्लिम आबादी
जिला--मुस्लिम आबादी
सहारनपुर--39.11
बिजनौर--41.71
मुरादाबाद/संभल--45.54
रामपुर--49.14
बरेली--33.89
अमरोहा--39.38
पीलीभीत--22.61
लखीमपुर खीरी--19.10
शाहजहांपुर--18.46
बदायूं--21.33
ये था 2012 का परिणाम
कुल सीटें--67
सपा--34
बसपा--18
भाजपा--10
कांग्रेस--03
पीस पार्टी--01
आईएमसी--01
11 जिलों में जिन 67 सीटों पर बुधवार को मतदान हुआ है, उनमें 47 मुस्लिम बहुल हैं। इनमें सहारनपुर, बिजनौर, मुरादाबाद, अमरोहा, संभल, रामपुर और बरेली की 37 सीटों पर 30 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम मतदाता हैं।
वहीं, 17 सीटों पर 20 से 29 फीसदी के बीच मुस्लिम वोटर हैं। सहारनपुर से पीलीभीत तक सभी दलों की नजरें वोटिंग परसेंटेज और मुस्लिमों के रुझान पर लगी हुई थीं।
जैसे-जैसे सूरज चढ़ा, मतदान का प्रतिशत बढ़ता गया। सपाइयों का कहना है कि मुसलमान ही नहीं, सभी वर्गों के मतदाताओं को राहुल-अखिलेश का साथ पसंद आया है। हालांकि कहीं साइकिल की रफ्तार तेज रही तो कहीं कमल खिला। कई जगह हाथी मस्त चाल से बढ़ता दिखा।
भाजपा को ध्रुवीकरण से कामयाबी की उम्मीद
सहारनपुर से पीलीभीत तक कई सीटों पर वोटों का ध्रुवीकरण भी होता दिखा। इसी लाइन पर चलकर भाजपा ने लोकसभा चुनाव में बड़ी कामयाबी हासिल की थी।
हालांकि अब 2014 जैसी लहर नहीं है, फिर भी मतों के ध्रुवीकरण से भाजपा खेमे में राहत महसूस की जा रही है। भाजपा को उम्मीद है कि उसे दूसरे चरण में अच्छी कामयाबी मिलेगी।
बसपा का दलित-मुस्लिम समीकरण दांव पर
सहारनपुर, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, संभल, रामपुर, बदायूं, बरेली, शाहजहांपुर, पीलीभीत और लखीमपुर खीरी तक दलितों का रुझान लगभग एक जैसा रहा। उनका बड़ा हिस्सा हाथी पर सवार नजर आया।
बसपा ने इस बार दलित-मुस्लिम समीकरण को केंद्र में रखकर चुनावी रणनीति बनाई है। चुनावी नतीजे बताएंगे कि यह समीकरण कितना हिट होता है? बसपा दूसरे चरण में भी आगे रहने का दावा कर रही है।
रणनीतिक मतदान नहीं
कई राजनीतिक विश्लेषक अंदाजा लगा रहे थे कि मुसलमान रणनीतिक मतदान (टेक्टिकल वोटिंग) करेगा लेकिन सामान्य तौर पर ऐसा दिखा नहीं।
जिन सीटों पर बसपा का अकेला मुसलमान प्रत्याशी था, वहां भी मुस्लिम वोटों का बंटवारा सपा-बसपा में हुआ। बसपा के पास बेस वोट होने के कारण कई सीटों पर मुसलमान उसके साथ गए, लेकिन कई जगह नहीं गए।
सपा-कांग्रेस खेमे में मतदान से उत्साह
सपा-कांग्रेस खेमा मतदान के रुझान से उत्साहित है। उनका दावा है कि मुसलमानों ने सांप्रदायिक ताकतों को हराने के लिए अखिलेश-राहुल की जोड़ी को पसंद किया है। इससे सहारनपुर समेत कई जिलों में समीकरण बदलेंगे।
सहारनपुर एकमात्र जिला है जहां 2012 में सपा का खाता नहीं खुला था। इस बार यहां अधिकतर सीटों पर मुख्य मुकाबला सपा-कांग्रेस गठबंधन, भाजपा और बसपा के बीच माना जा रहा है।
कहां कितनी मुस्लिम आबादी
जिला--मुस्लिम आबादी
सहारनपुर--39.11
बिजनौर--41.71
मुरादाबाद/संभल--45.54
रामपुर--49.14
बरेली--33.89
अमरोहा--39.38
पीलीभीत--22.61
लखीमपुर खीरी--19.10
शाहजहांपुर--18.46
बदायूं--21.33
ये था 2012 का परिणाम
कुल सीटें--67
सपा--34
बसपा--18
भाजपा--10
कांग्रेस--03
पीस पार्टी--01
आईएमसी--01



