प्रथम चरण में भाजपा की धमाकेदार शुरुआत, जीत लगभग तय
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण का मतदान संपन्न हो चुका है। 73 सीटों पर हुए मतदान से सभी राजनीतिक दलों को खासी उम्मीदें थीं, लेकिन मतदान के बाद जमीनी स्थिति कुछ अलग ही नजर आ रही है।
सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी जीत की दावेदारी ठोक रहे
प्रथम चरण के मतदान के पहले सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी जीत की दावेदारी ठोक रहे थे, लेकिन मतदान के बाद सपा-कांग्रेस गठबंधन फेल होता नजर आया और बसपा का हाथी भी कुछ ख़ास नहीं चल पाया। 73 सीटों में से दो-तिहाई सीटें भाजपा के खाते में जाती हुई दिखाई दे रही है।
जनता अखिलेश सरकार से खासा नाराज
सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी जीत की दावेदारी ठोक रहे
प्रथम चरण के मतदान के पहले सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी जीत की दावेदारी ठोक रहे थे, लेकिन मतदान के बाद सपा-कांग्रेस गठबंधन फेल होता नजर आया और बसपा का हाथी भी कुछ ख़ास नहीं चल पाया। 73 सीटों में से दो-तिहाई सीटें भाजपा के खाते में जाती हुई दिखाई दे रही है।
जनता अखिलेश सरकार से खासा नाराज
विधानसभा चुनाव का प्रथम चरण मतदान पश्चिमी उत्तर में सपंन्न हो चुका है।
सपा-कांग्रेस गठबंधन को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता ने कुछ ख़ास अहमियत नहीं दी और न ही मायावती का कोई जोर चल पाया। कारण साफ़ था, सपा पहले ही अपने पांच वर्षों के शासनकाल में प्रदेश को बढ़ा हुआ अपराध, महिला हिंसा और भ्रष्टाचार के सिवा कुछ नहीं दे पायी थी, जिस कारण प्रदेश की जनता अखिलेश सरकार से खासा नाराज थी।
कांग्रेस से गठबंधन करना सपा को और भारी पड़ गया
उसके ऊपर कांग्रेस से गठबंधन करना सपा को और भारी पड़ गया, साथ ही सपा परिवार की पारिवारिक कलह का भी असर चुनाव पर पड़ा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पलायन की घटना के कारण भी जाट मतदाताओं ने सपा और बसपा से किनारा करना ही सही समझा और भाजपा को ही एकमात्र विकल्प समझा, जिस कारण भाजपा को प्रथम चरण के मतदान में काफी फायदा हुआ है।
इन सब कारणों को देखते हुए ये कहना गलत नहीं होगा कि प्रथम चरण की 73 सीटों में से लगभग 45 सीटें भाजपा के खाते में जाएंगी और इस कारण प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के आसार भी नजर आ रहे हैं।



